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कोविड-19 अपडेट:अधिकार प्राप्त समूह-2 ने ऑक्सीजन की उपलब्धता को लेकर घबराहट से बचने के लिए कार्रवाई शुरू की

डीपीआईआईटी, स्‍वास्‍थ्‍य एवं परिवार कल्‍याण मंत्रालय और केंद्रीय इस्पात मंत्रालय ने संयुक्त रूप से दैनिक उच्‍च मामले वाले राज्यों में स्थिति की समीक्षा की
कोविड-19 से प्रभावित रोगियों के उपचार में मेडिकल ऑक्सीजन एक महत्वपूर्ण घटक है। उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (डीपीआईआईटी) के सचिव डॉ. गुरुप्रसाद महापात्र की अध्यक्षता में अधिकारियों का एक अंतर-मंत्रालयी अधिकार प्राप्त समूह (ईजी-2) जिसमें स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय, कपड़ा मंत्रालय, आयुष मंत्रालय, एमएसएमई मंत्रालय आदि सहित विभिन्न मंत्रालयों और विभागों के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हैं, का मार्च – 2020 में कोविड महामारी के दौरान गठन किया गया था, जिससे प्रभावित राज्यों को मेडिकल ऑक्सीजन सहित अनिवार्य मेडिकल उपकरणों की उपलब्धता सुनिश्चित की जा सके।

पिछले एक वर्ष से, ईजी-2 प्रभावित राज्यों को मेडिकल ऑक्सीजन सहित अनिवार्य मेडिकल उपकरणों की सहज आपूर्ति को सुगम बनाता रहा है तथा इसकी निगरानी करता रहा है और समय-समय पर उत्पन्न होने वाली चुनौतियों का समाधान करता रहा है। बढ़ते कोविड मामलों के वर्तमान संदर्भ में ईजी-2 लगातार बैठकें करता रहा है तथा राज्‍यों को विशेष रूप से मेडिकल ऑक्‍सीजन आपूर्ति से संबंधित अनिवार्य मेडिकल उपकरणों की आपूर्ति को सुगम बनाता रहा है। ईजी-2 आवश्यकता के अनुसार राज्यों को मेडिकल ऑक्सीजन की आपूर्ति सुगम बनाने के लिए राज्‍यों, ऑक्सीजन विनिर्माताओं और अन्य हितधारकों के साथ नियमित रूप से बैठकें और परस्‍पर बातचीत करता रहा है।

उल्‍लेखनीय है कि देश में ऑक्सीजन के लिए लगभग 7,127 एमटी की पर्याप्त उत्पादन क्षमता है और आवश्यकतानुसार, इस्‍पात संयंत्रों के पास उपलब्ध सरप्‍लस ऑक्सीजन को भी उपयोग में लाया जा रहा है। देश में प्रतिदिन 7,127 एमटी ऑक्सीजन की दैनिक उत्पादन क्षमता है। इसके मुकाबले, जैसा कि ईजी-2 द्वारा निर्देश दिया गया है पिछले दो दिनों से कुल उत्पादन 100 प्रतिशत रहा है, क्योंकि मेडिकल ऑक्सीजन की आपूर्ति बहुत तेजी से बढ़ी है। 12 अप्रैल 2021 को, देश में मेडिकल ऑक्सीजन की खपत 3,842 एमटी थी, जो कि दैनिक उत्पादन क्षमता का 54 प्रतिशत है। देश में मेडिकल ऑक्सीजन की अधिकतम खपत महाराष्ट्र, गुजरात, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, कर्नाटक, तमिलनाडु, दिल्ली जैसे राज्‍यों द्वारा की जा रही है, जिसके बाद छत्तीसगढ़, पंजाब, राजस्थान का स्‍थान आता है।

बढ़ते मामलों के साथ, मेडिकल ऑक्सीजन की खपत को राज्यों की आवश्यकताओं के साथ तालमेल रखना होगा। इसके लिए, विनिर्माण संयंत्रों के साथ औद्योगिक ऑक्सीजन स्टॉक सहित देश का वर्तमान ऑक्सीजन स्टॉक 50,000 एमटी से अधिक है। ऑक्सीजन विनिर्माण इकाइयों में उत्पादन में वृद्धि और उपलब्ध सरप्‍लस स्टॉक के साथ, ऑक्सीजन की वर्तमान उपलब्धता पर्याप्त है। साथ ही, राज्यों को कहा जा रहा है कि वे मेडिकल ऑक्सीजन का विवेकपूर्ण उपयोग करें और सुनिश्चित करें कि ऑक्सीजन की बर्बादी न हो। इसके अतिरिक्‍त, राज्यों को अनिवार्य रूप से नियंत्रण कक्षों की स्‍थापना करनी चाहिए, जिससे कि आवश्यकता के अनुसार जिलों को ऑक्सीजन की सुचारू आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके और सिलेंडरों, टैंकरों आदि की जरूरत की समीक्षा हो सके।

ईजी-2 ने विभिन्न प्रभावित राज्यों को चिकित्सा ऑक्सीजन की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए कई कदम उठाए हैं। कुछ प्रमुख उपाय इस प्रकार हैं –

प्रत्येक ऑक्सीजन विनिर्माण संयंत्र की उत्पादन क्षमता के अनुसार ऑक्सीजन उत्पादन में वृद्धि करें; इसका परिणाम ऑक्सीजन विनिर्माण इकाइयों में 100 प्रतिशत उत्‍पादन के रूप में सामने आया है, जिससे देश में ऑक्‍सीजन की उपलब्‍धता में वृद्धि हुई है। (जैसा कि ऊपर कहा गया है)।
इस्‍पात संयंत्रों के पास उपलबध सरप्‍लस स्टॉक का उपयोग करें। इस्‍पात संयंत्रों के पास उपलब्‍ध स्‍टॉक में पिछले कुछ दिनों में वृद्धि हुई है, जिसमें 14000 एमटी अकेले सीपीएसयू के उत्‍पाद संयंत्रों के स्‍टॉक से ही आए हैं और इससे देश में कुल एलएमओ स्‍टॉक की बढ़ोतरी में मदद मिली है।
ऑक्सीजन सोर्सिंग पर अधिक स्पष्टता लाने और राज्‍यों को ऑक्‍सीजन सोर्सिंग के लिए आश्‍वस्‍त करने हेतु, राज्‍य सीमाओं के स्रोतों और इस्‍पात संयंत्रों के पास उपलब्‍ध स्रोतों सहित ऑक्सीजन स्रोतों वोले शीर्ष राज्यों की आवश्यकताओं को मैप करें। इस प्रकार, महाराष्ट्र डोलवी (महाराष्ट्र) में जेएसडब्ल्यू, भिलाई (छत्तीसगढ़) में सेल और बेल्लारी (कर्नाटक) में जेएसडब्ल्यू जैसे इस्‍पात संयंत्रों से दैनिक आधार पर सरप्लस मेडिकल ऑक्सीजन लेने में सक्षम रहा है। इसी तरह, मध्य प्रदेश भिलाई (छत्तीसगढ़) में स्टील प्लांट से अपनी ऑक्सीजन आपूर्ति को पूरा करने में सक्षम है।
वर्तमान चुनौती ऑक्‍सीजन को कम आवश्यकता वाले राज्यों से हटाकर अधिक आवश्यकता वाले राज्यों में पहुंचाना है। ऐसे राज्‍यों जैसे महाराष्ट्र, गुजरात, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, दिल्ली, छत्तीसगढ़ आदि जहां ऑक्सीजन की अधिक आवश्यकता है, के सरप्‍लस स्रोतों के मानचित्रण को विनिर्माताओं, राज्‍यों तथा अन्‍य हितधारकों के परामर्श से अंतिम रूप दिया जा रहा है। यह भारत और राज्य सरकारों के बीच समन्वित प्‍लानिंग के माध्यम से किया जा रहा है ताकि देश में ऑक्सीजन के उपलब्ध स्रोतों और स्टॉक के साथ 30 अप्रैल 2021 तक उनकी आवश्यकताओं का मानचित्रण किया जा सके।
लिक्विड मेडिकल ऑक्सीजन (एलएमओ) के लिए ट्रासपोर्ट टैंकरों की आवाजाही को सुगम बनाने के लिए रेल मंत्रालय और राज्यों के परिवहन विभागों के साथ सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के तहत एक उप-समूह का गठन किया गया है। रेल द्वारा ऑक्सीजन टैंकरों को ले जाए जाने की योजना पर भी सक्रियतापूर्वक काम किया जा रहा है।
ऑक्सीजन टैंकरों की निर्बाध आवाजाही के संदर्भ में लिए गए कुछ महत्वपूर्ण निर्णय इस प्रकार हैं:
ऑक्सीजन टैंकर के रूप में उपयोग के लिए आर्गन और नाइट्रोजन टैंकर के रूपांतरण के लिए पीईएसओ (पेट्रोलियम और सुरक्षा संगठन) द्वारा आदेश दे दिए गए हैं; इसके द्वारा टैंकरों के परिवहन के लिए फ्लीट की उपलब्‍धता बढ़ा दी गई है।
सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय द्वारा ऑक्सीजन टैंकरों की दूसरे राज्‍यों में पंजीकरण के बिना स्‍वतंत्र आवागमन करने की सुविधा प्रदान की गई है;
इसके अतिरिक्‍त, राज्यवार सिलेंडरों की मैपिंग की गई है और औद्योगिक सिलेंडरों का समुचित शुद्धिकरण के बाद मेडिकल ऑक्‍सीजन के लिए उपयोग करने की अनुमति दी गई है;
स्‍वास्‍थ्‍य एवं परिवार कल्‍याण मंत्रालय द्वारा अतिरिक्‍त एक लाख ऑक्सीजन सिलेंडरों की खरीद के आदेशों पर भी कार्य किया जा रहा है;
पीएम-केयर्स के तहत मंजूर किए गए पीएसए प्लांटों की संयंत्रों के 100 प्रतिशत की आरंभिक पूर्णता: की बारीकी से समीक्षा की जा रही है, जिससे कि विशेष रूप से दूरदराज के क्षेत्रों में अस्पतालों में ऑक्सीजन के स्व-उत्‍पादन में वृद्धि की जा सके।
स्‍वास्‍थ्‍य एवं परिवार कल्‍याण मंत्रालय और इस्पात मंत्रालय के साथ डीपीआईआईटी द्वारा संयुक्त रूप से उच्‍च संख्‍या वाले राज्‍यों की दैनिक समीक्षा की जा रही है। इन बैठको में ऑक्‍सीजन विनिर्माता तथा इस्‍पात इकाइयां भी उपस्थित रहती हैं। इसका परिणाम ऑक्सीजन आपूर्ति को सुगम बनाने, आपूर्ति या टैंकर आवाजाही पर दो राज्‍यों के बीच उठने वाले मुद्दों के समाधान आदि के लिए राज्‍यों को प्रारंभिक सहायता दिए जाने के रूप में सामने आया है।

ईजी-2 के दिशा-निर्देशों के अनुरूप डीपीआईआईटी, स्‍वास्‍थ्‍य और परिवार कल्‍याण मंत्रालय, इस्पात मंत्रालय, गंभीर रूप से प्रभावित विभिन्न राज्यों, ऑक्सीजन विनिर्माताओं के प्रतिनिधियों सहित प्रमुख हितधारकों के साथ पेट्रोलियम और विस्फोटक सुरक्षा संगठन (पीईएसओ), अखिल भारतीय औद्योगिक गैस विनिर्माता संघ (एआईआईजीएमए) के अधिकारियों के बीच विस्तृत दैनिक विचार-विमर्श के आधार पर प्रभावित राज्यों को मेडिकल ऑक्सीजन की आपूर्ति के लिए स्रोतों की एक विस्तृत दैनिक मैपिंग की तैयारी चल रही है, जिससे कि मेडिकल ऑक्सीजन की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके।

विचार-विमर्श के दौरान यह भी पाया गया कि मेडिकल ऑक्सीजन की मांग में असामान्य बढ़ोतरी हुई है त‍था मेडिकल ऑक्‍सीजन की मांग के अनुमान में तेजी वृद्धि देखी जा रही है, जैसा कि 30.04.2021 को सक्रिय कोविड मामलों की संख्‍या के मुकाबले कुछ राज्यों में पाया गया है। ईजी-2 ने ऐसे राज्यों में मांग में असामान्‍य वृद्धि को नोट किया है और स्‍वास्‍थ्‍य एवं परिवार कल्‍याण मंत्रालय को संबंधित राज्यों के साथ समन्वय के साथ ऑक्सीजन के विवेकपूर्ण उपयोग की जांच करने का निर्देश दिया है।

ईजी-2 यह सुनिश्चित करने कि मेडिकल ऑक्सीजन की निर्बाध आपूर्ति के लिए सभी आवश्‍यक कदम उठाए जाएं, निरंतर रूप से मेडिकल ऑक्‍सीजन की मांग और आपूर्ति की स्थिति की निगरानी कर रहा है।

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