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सरकार के दखल और रेमेडेसीवर इंजेक्शन की कीमतों में कमी के बावजूद नहीं रुक रही कालाबाजारी

सरकार के दखल और रेमेडेसीवर इंजेक्शन की कीमतों में कमी के बावजूद इसकी कालाबाजारी रुकने का नाम नहीं ले रही है।
भारत में दिनों दिन बढ़ती कोरोना मरीजों की संख्या के कारण रेमेडेसीवर की मांग भी तेजी से बढ़ रही है ।दवा की दुकानों में इंजेक्शन के लिए लंबी-लंबी कतारें लगी है इसके बावजूद लोगों को इस इंजेक्शन की पूर्ति नहीं हो पा रही है ।
कोरोना काल में रेमेडीसीवर लोगों के लिए कोरोना से लड़ाई का एक प्रमुख हथियार माना जा रहा है ।हाल ही में सरकार द्वारा इस कंपनी के इंजेक्शन की कीमतों को कम किया गया है। अलग-अलग कंपनियों ने इसकी अलग-अलग कीमतें निर्धारित कर रखी थी परंतु सरकार के दखल के बाद इन कीमतो को घटाया गया है। बावजूद इसके रेमडेसीवर इंजेक्शन की कालाबाजारी पर सरकार अंकुश नहीं लगा पा रही है ।
सरकार के दखल के पश्चात सिंजीन इंटरनेशनल लिमिटेड ने इंजेक्शन की कीमत ₹2450 कर दी है जबकि पहले इसकी कीमत ₹3950 थी ।इसी प्रकार कैडिला हेल्थकेयर लिमिटेड ने इसकी कीमत 2800 रुपए से घटाकर ₹899 कर दी है ।इसी प्रकार माइलन फार्मास्यूटिकल्स प्राइवेट लिमिटेड ने इस इंजेक्शन की कीमत ₹4800 से घटाकर ₹3400 कर दिए हैं। सिपला लिमिटेड ने इसकी कीमत ₹3000 कर दी है जबकि पूर्व में इसकी कीमत ₹4000 थी । हेटरो हेल्थ केयर लिमिटेड ने कॉविफोर इंजेक्शन की कीमत 5400 रुपए से घटाकर ₹3490 कर दी है बावजूद इसके इंजेक्शन की कालाबाजारी रुकने का नाम नहीं ले रही है।

उल्लेखनीय है कि भारत में प्रतिदिन लाखों की संख्या में लोग कोरोनावायरस से संक्रमित हो रहे हैं तथा गंभीर मरीजों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी हो रही है ।जिसकी वजह से इसकी मांग दिनोंदिन बढ़ती जा रही है ।
रेमदेसीविर इंजेक्शन सन 2009 में विकसित किया गया था ।इस दवा को कैलिफोर्निया के वैज्ञानिक ने हेपेटाइटिस सी के इलाज के लिए तैयार किया था परंतु यह उस पर कारगर साबित नहीं हो सका। इसके बाद इंजेक्शन का इस्तेमाल इबोला वायरस के इलाज के लिए शुरू किया गया।यह एक एंटीवायरल इंजेक्शन है जिसका इस्तेमाल शरीर के अंदर फैल रहे वायरस को रोकने के लिए किया जाता है । कोरोना काल में यह इंजेक्शन लोगों के लिए उपयोगी साबित हुआ जिसके बाद इसके दाम में काफी उछाल देखने को मिला। हालांकि सरकार ने इसके दाम घटा दिए हैं इसके बावजूद इस इंजेक्शन की आपूर्ति आवश्यकता के अनुरूप नहीं हो पा रही है। जबकि इससे पूर्व कोरोना काल में भारत ने अन्य देशों को 10लाख से भी ज्यादा रेमदेसीविर इंजेक्शन का निर्यात किया था। लेकिनअब देश में बढ़ती है जमाखोरी और कालाबाजारी के कारण गंभीर मरीजों कोभारत में भी यह दवा आसानी से उपलब्ध नहीं हो पा रही है।

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