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फिर टूटा कइयों का दिल, सरकार ने तोड़ी फिर बच्चों की आस, कब तक चलेगा ये खेल

REPORT BY DR MUDITA POPLI
बीकानेर।माध्यमिक शिक्षा सेकंड ग्रेड टीचर के लिए आज होने वाला सामान्य ज्ञान का पेपर प्रारंभ होने के बाद निरस्त होने की सूचना मिलते ही हड़कंप की स्थिति हो गई।
आज सुबह 9 बजे से आरंभ हुई इस परीक्षा के लिए प्रतियोगी न केवल सेंटरों पर पहुंच चुके थे बल्कि उन्हें पेपर वितरण कर दिया गया था। जिसके बाद सेंटरों पर कमरे में मौजूद इनविजीलेटर ने जब प्रतियोगियों से यह कहकर पेपर ले लिया कि परीक्षा निरस्त होने की सूचना मिली है तो स्थिति अजीब हो गई। इसे सरकारी तंत्र की गफलत ही माने कि इतने वृहद स्तर पर होने वाली परीक्षा के निरस्त होने की सूचना तक सेंटर पर उपलब्ध नहीं थी l विद्यार्थियों ने 20 से अधिक क्वेश्चंस कर दिए और उसके बाद यह कर पेपर ले लिया गया कि यह परीक्षा निरस्त हो गई है।सेंटर पर पहुंचे अभ्यर्थियों में इससे निराशा की लहर दौड़ गई। ज्ञान विधि कॉलेज में परीक्षा दे रहा एक अभ्यर्थी तो वहीं पर रोने लगा कि पिछले एक साल से इस परीक्षा के लिए तैयारी कर रहा है परीक्षा के प्रश्न पत्र में सारे प्रश्न से आते हैं और अब यकायक परीक्षा निरस्त कर दी गई है। सरकार की लापरवाही का सिलसिला बदस्तूर जारी है और परीक्षाओं की तैयारी में व्यस्त बच्चे निराशा के भंवर में हिचकोले खा रहे हैं। कभी रीट परीक्षा का निरस्त होना, कभी किसी अन्य प्रतियोगी परीक्षा का निरस्त होना और उसके बाद भी सरकार का अपनी गलती ना मानना इससे केवल बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। इन सब का असर युवाओं की मानसिकता पर भी पड़ने लगा है। युवा अपने दमखम के साथ प्रतियोगी परीक्षा का फार्म भरते हैं उसके बाद कभी प्रतियोगिता आरक्षण की सीटों के फेर में पड़ जाती है तो कभी साल साल भर तक सरकार पेपर का आयोजन ही नहीं करवा पाती। उसके बाद भी यदि पेपर आयोजित होने की तिथि घोषित हो भी जाती है तो पेपर लीक होना या अंदर की मिलीभगत के चलते पेपर निरस्त होने के कारण परीक्षार्थियों का मनोबल वहीं पर टूट जाता है। यदि वह पास भी हो गया उसके बाद कई बार भर्ती प्रक्रिया कोर्ट की तारीखों में उलझ जाती है कई बार परीक्षार्थी पांच 5 साल के लंबे इंतजार के बाद भी अपने लिए सरकारी नौकरी नहीं जुटा पाते और निराशा की गर्त में डूब जाते हैं। लेकिन सरकार अपने रुख पर कायम रहती है, कभी परीक्षाओं को निरस्त नहीं करने की जिद में और कभी गलती ना मानने की जिद में, किसी व्यक्ति के भविष्य दरकिनार करते हुए अपने राजनीतिक फायदों के लिए बच्चों के भविष्य के साथ खेल खेला जा रहा हैं।
राज्य सरकार ने इसके लिए कानून भी बना दिया है पर कोई भी क़ानून तब तक धरातल पर काम नहीं कर सकता जब तक उसको लागू करने वाले अपना ईमान बेचना बंद नहीं कर देते। नकल विरोधी कानून बनने के बावजूद नकलें हो रही हैं। चंद पैसे के ख़ातिर मेहनतकश लाखों अभ्यर्थियों के सपने बेचने का धंधा खुले आम चल रहा है। जाजम के नीचे तो हर पेपर का शायद यही हाल है।
इसीलिए केवल कड़ी सज़ाएँ पेपर आउट होने से नहीं बचा सकती। इसके लिए पूरे समाज को आगे आना होगा । ऐसे राजनेताओं और लोगों का बहिष्कार कर इसकी सूचना पुलिस को देनी चाहिए।इस प्रकार मिलकर ही इस समस्या पर निजात पाया जा सकता है ।सिस्टम में जो फ़र्ज़ी लोग घुस चुके है वे लाखों देकर सिस्टम में आए हैं और करोड़ों बनाने के प्रयास करते हैं।
ये लोग उस अभ्यर्थी का दर्द कभी नहीं समझ सकते जो अपने माता पिता के एक सपने की खातिर शहर के किसी कोने में छोटा सा कमरा किराए पर लेकर अथक प्रयासों में लगा है। एक बार फिर सपने टूटे हैं और मन भारी हैं पर ये खेल बस चले जा रहा है।

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