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कंगाल पाकिस्‍तान को अब भीख नहीं… दोस्‍त सऊदी अरब-चीन का ऐलान, IMF से क्‍यों डर रहे शहबाज?

*कंगाल पाकिस्‍तान को अब भीख नहीं… दोस्‍त सऊदी अरब-चीन का ऐलान, IMF से क्‍यों डर रहे शहबाज?*
कंगाल हो चुके पाकिस्‍तान के बार-बार कर्ज की भीख मांगने से परेशान दोस्‍त देशों सऊदी अरब, यूएई और चीन ने शहबाज सरकार को बड़ा झटका दिया है। इन देशों ने शर्त रखी है कि अब पाकिस्‍तान सरकार को तभी कर्ज दिया जाएगा जब वह आईएमएफ के प्रोग्राम में शामिल होगी।
इस्‍लामाबाद: पाकिस्‍तान में आर्थिक संकट दिन-ब‍-दिन गंभीर होता जा रहा है। वहीं शहबाज शरीफ सरकार यह फैसला नहीं कर पा रही है कि उसे देश को बचाने के लिए आईएमएफ के दरवाजे पर भीख मांगनी है या नहीं। दरअसल, अगर शहबाज शरीफ अंतरराष्‍ट्रीय मुद्राकोष के दरवाजे पर जाते हैं तो उन्‍हें कई कड़े फैसले लेने पड़ सकते हैं। इससे पाकिस्‍तान में रेकॉर्ड स्‍तर पर चल रही महंगाई कई गुना और बढ़ सकती है। इसके अलावा आईएमएफ ने सेना पर होने वाले खर्च को भी कम करने के लिए कहा है। पाकिस्‍तान में इस साल आम चुनाव होना है और इमरान खान की लोकप्रियता अपने पूरे उफान पर है।
शहबाज अगर आईएमएफ की शरण में जाता है तो इससे शरीफ परिवार का फिर से सत्‍ता में आने का सपना धरा का धरा रह जाएगा। वह भी तब पिछले कई उपचुनावों में इमरान खान शहबाज शरीफ के गढ़ पंजाब में पानी पिला चुके हैं। इसकी बजाय शहबाज शरीफ चाहते हैं कि एक केयरटेकर सरकार बने और वही इन अलोकप्रिय फैसलों को ले। पीएम शहबाज के फैसला नहीं लेने की वजह से पाकिस्‍तान की 23 करोड़ की आबादी त्राहिमाम-त्राहिमाम कर रही है। पाकिस्‍तान के लिए यह पहली बार नहीं है कि वह गंभीर आर्थिक संकट में फंसा है।
*परमाणु बम परीक्षण पर सऊदी ने दी थी मदद*
हालांकि इस बार हालत पहले से काफी अलग है और यही वजह है कि शहबाज सरकार को रास्‍ता नहीं सूझ रहा है। असल में इससे पहले आए आर्थिक संकट में पाकिस्‍तान की मदद के लिए उसके दोस्‍त देश सऊदी अरब, कतर और चीन आ जाते थे। इस बार हालात पलट गए हैं। पाकिस्‍तान की बार-बार भीख मांगने की आदत से परेशान होकर सऊदी अरब और चीन ने साफ कह दिया है कि वे अब खैरात नहीं देंगे। इससे पहले पाकिस्‍तान ने जब साल 1998 में परमाणु बम का परीक्षण किया था, 1999 में सैन्‍य तख्‍तापलट हुआ था, हर बार इन दोस्‍त देशों ने बचाया था।
पाकिस्‍तान के परमाणु बम का परीक्षण करने के बाद भी सऊदी अरब ने उसे चोरी से तेल की सप्‍लाइ की थी। इसका पैसा भी उसने नहीं लिया था। इसी तरह से चीन, यूएई और कतर ने भी पाकिस्‍तान की मदद के लिए हाथ बढ़ाया था। पाकिस्‍तान को इस खैरात की आदत लग गई और वह बार-बार भीख पहुंचने के लिए पहुंचने लगा। इससे चीन, यूएई और सऊदी अरब परेशान हो गए और उन्‍होंने पाकिस्‍तान को खैरात देने से मना कर दिया है। ये सभी देश अब चाहते हैं कि शहबाज सरकार आईएमएफ के पास जाए।
*सऊदी अरब ने अपनी मदद में कई शर्तें लगाईं*
वहीं शहबाज सरकार किसी तरह से प्‍लान बी बनाने में जुटी है जो संभव नहीं होता दिख रहा है। पाकिस्‍तान को पहली बार अपनी असली हैसियत पता चल रही है। पाकिस्‍तान के दोस्‍त अब उसे मुफ्त में बेलआउट नहीं करने जा रहे हैं। पाकिस्‍तान आर्थिक सुधार से बच रहा है जो आईएमएफ की पहली शर्त है। इससे उसकी आईएमएफ से बातचीत और ज्‍यादा कठिन होती जा रही है। सऊदी अरब के वित्‍त मंत्री ने पिछले दिनों वर्ल्‍ड इकनॉमिक फोरम में ऐलान किया था कि उनका देश अब दोस्‍तों को खैरात नहीं देगा।
इससे पहले सऊदी प्रिंस से पाकिस्‍तानी आर्मी चीफ के गिड़गिड़ाने पर उन्‍होंने अरबों डॉलर की मदद का ऐलान किया था। कामरान ने बताया कि सऊदी अरब ने अपनी मदद में कई शर्तें लगा दी हैं। सऊदी अब तभी पाकिस्‍तान को कर्ज देगा जब आईएमएफ के प्रोग्राम में जाएगा। वहीं शहबाज और सेना प्रमुख इसके लिए तैयार नहीं हैं।

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