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पीबीएम हॉस्पिटल में रोगियों को हो रही परेशानी:पीबीएम में रोज 26 मशीनों पर 50 रोगियों की डायलिसिस, 16 पर यूपीएस भी नहीं

पीबीएम हॉस्पिटल में रोगियों को हो रही परेशानी:पीबीएम में रोज 26 मशीनों पर 50 रोगियों की डायलिसिस, 16 पर यूपीएस भी नहीं

बीकानेर

फाइल फोटो। - Dainik Bhaskar

फाइल फोटो।

बुधवार काे शहर में बिजली की लंबी कटाैती के कारण पीबीएम हॉस्पिटल में राेगियाें काे काफी परेशानी उठानी पड़ी। नेफ्रोलॉजी विभाग में डायलिसिस पर असर पड़ा। मरीजाें काे आधा-पाैन घंटे पहले फ्री कर दिया गया। पीबीएम हाॅस्पिटल के नेफ्राेलाॅजी विभाग में डायलिसिस की कुल 26 मशीन वर्किंग में हैं। इनमें से 16 पीबीएम में और 10 सुपर स्पेशियलिटी ब्लाॅक में लगी हैं। इन पर राेज 24 घंटे में 50 मरीजाें की डायलिसिस हाेती है। कुछ मरीज एेसे भी हैं, जिन्हें पांच से लेकर 15 साल से सप्ताह में तीन बार डायलिसिस के लिए पीबीएम जाना पड़ता है। बुधवार काे दिनभर बिजली की आँख मिचाैली के कारण इन सभी मरीजाें काे भारी परेशानी उठानी पड़ी। नेफ्राेलाॅजी विभाग के प्रभारी डाॅ. जितेंद्र फलाैदिया और उनकी टीम मैनेज करने में जुटी रही।

जेनरेटर बंद हाे गया और बैटरी बैकअप भी खत्म हाे गया। शाम काे पेट्राेल पंप खुलने पर डीजल मंगवाया गया। ऐसे में मरीजाें काे समय कम दिया जा सका। एक मरीज के डायलिसिस में साढ़े तीन से चार घंटे लगते हैं। उन्हें आधा-पाैन घंटे पहले ही छाेड़ दिया गया। डाॅक्टराें ने बताया कि मरीज की कंडीशन काे देखते हुए यह फैसला लिया गया। क्याेंकि मरीजाें काे अगले दिन का टाइम नहीं दे सकते। बिजली की कटाैती के कारण मरीजाें काे देर तक रुकना पड़ा। डाॅ. फलाैदिया ने बताया कि यूराेलाॅजी और नेफ्राेलाॅजी के लिए एक ही जेनरेटर है, जिस पर पूरा लाेड था। नेफ्राेलाॅजी में 16 मशीनाें पर बैटरी बैकअप रहता है। एसएसबी की तरह अब यहां के लिए भी यूपीएस की डिमांड की जाएगी।

कांग्रेसी नेता की तबीयत बिगड़ी बेटी का वीडियाे वायरल

पीबीएम हाॅस्पिटल में डायलिसिस के दाैरान बिजली गुल हाेने से कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कर्णपाल सिंह शेखावत की तबीयत बिगड़ गई। उनका पीबी डाउन हाेने लगा और क्लाॅट बनने लगा। ऐसा मशीन के बंद हाेने से हुअा। उनकी बेटी याेगिता शेखावत का एक वीडियाे वायरल हुआ है, जिसमें उन्हाेंने जिला और पीबीएम प्रशासन से शिकायत की है। याेगिता ने कहा है कि बिजली की परेशानी काे देखते हुए बैटरी बैकअप और डीजल के इंतजाम पहले से करने चाहिए थे। कुछ भी हाे सकता था। एक ही नर्सिंग स्टाफ मरीज और डीजल की व्यवस्था देख रहा था। डायलिसिस करने वाले स्टाफ का कहना है कि पांच सेकंड के बिजली के झटके से मशीन वापस प्राेसेस में चली जाती है। उसे वापस एडजस्ट हाेने में समय लगता है।

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