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धमौरा है सुखदेव सिंह का पैतृक गांव, यहां चूल्हे ठंडे:बुजुर्ग बोले- बेटियों के ब्याह में बर्तन तक मांझता था, गांव को भूला नहीं

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हर तरफ सुखदेव सिंह गोगामेड़ी की चर्चा है। राजपूत समाज में आक्रोश है। हनुमानगढ़ के गोगामेड़ी गांव में श्रीराजपूत राष्ट्रीय करणी सेना के अध्यक्ष सुखदेव सिंह का अंतिम संस्कार हो गया है। इस बीच बहुत कम लोग यह जानते हैं कि सुखदेव सिंह गोगामेड़ी का पैतृक गांव हनुमानगढ़ में नहीं बल्कि झुंझुनूं जिले में उदयपुरवाटी में है। यह गांव है धमौरा।

उदयपुरवाटी शहर से करीब 15 किलोमीटर दूर है धमौरा गांव। इस गांव की चर्चा कहीं भी नहीं है लेकिन बीते 3 दिन से गांव में सन्नाटा है। कई घरों में चूल्हा तक नहीं जला है। एक उदासी पूरे गांव में छाई हुई है। चर्चा सिर्फ सुखदेव सिंह गोगामेड़ी की है।

दुकानें नहीं खुलीं, चौपाल पर चर्चा

इस छोटे से गांव में कुछ दुकानें हैं। दो दिन से इनके शटर ऊंचे नहीं हुए हैं। दुकानदार आते हैं और गांव की चौपाल पर बैठकर गोगामेड़ी की बातें करते हैं।

धमौरा गांव से सुखदेव सिंह का रिश्ता जड़ों का है। सब यही जानते हैं कि सुखदेव सिंह हनुमानगढ़ जिले के गोगामेड़ी के रहने वाले थे। कम लोगों को पता है कि झुंझुनूं जिले का धमौरा उनका पैतृक गांव है। सुखदेव सिंह के दादा जवाहर सिंह कई साल पहले धमौरा से गोगामेड़ी चले गए थे।

तब से परिवार वहीं बस गया। सुखदेव सिंह ने कभी अपनी जड़ों काे नहीं छोड़ा। वे धमौरा अक्सर आते थे। किसी के यहां शादी ब्याह होता या गमी होती, वे मौजूद रहते थे।

धमौरा में सुखदेव का मूल गांव है। 55 साल पहले उनके पड़दादा यहां से गोगामेड़ी चले गए थे। सुखदेव के पिता अचल सिंह का मकान आज भी धमौरा में है।

धमौरा में सुखदेव का मूल गांव है। 55 साल पहले उनके पड़दादा यहां से गोगामेड़ी चले गए थे। सुखदेव के पिता अचल सिंह का मकान आज भी धमौरा में है।

बदमाशों को कोस रही बुजुर्ग टोली

सुखदेव सिंह की हत्या के बाद हम धमौरा पहुंचे। गांव के चौक पर कुछ बुजुर्ग बैठे बातें कर रहे थे। बातें सिर्फ गोगामेड़ी की ही थीं। बुजुर्ग टोली उन बदमाशों को कोस रही थी, जिन्होंने निर्मम तरीके से हत्या की।

हमने पूछा- गोगामेड़ी का परिवार सालों पहले यहां से चला गया, फिर भी आप लोगों का इतना लगाव कैसे है? सवाल पर वहां बैठे महीपाल ने तुरंत ही इसका जवाब दिया, कहा – अजी क्या पूछते हो आप? अभी 20 दिन पहले ही गांव में एक वृद्ध महिला की मौत हो गई थी। उनके शोक में शामिल होने के लिए सुखदेव सिंह गोगामेड़ी की पत्नी यहां आईं थीं। पूरे परिवार से मिलकर गईं। इससे सात आठ महीने पहले ही एक शादी में खुद सुखदेव सिंह भी यहां आए थे।

महिपाल सिंह ने बताया- गांव का कोई भी काम पड़ा हो, उन्होंने कभी मना नहीं किया। अक्सर यहां आते रहते थे। कांग्रेस नेता सचिन पायलट ने गुढ़ा में किसान सम्मेलन किया था, उसमें सुखदेव शामिल हुए थे, कार्यक्रम के बाद वे धमौरा आकर गए थे।

सुखदेव गोगामेड़ी 7-8 महीने पहले ही धमौरा में शादी समारोह में शामिल हुए थे।

सुखदेव गोगामेड़ी 7-8 महीने पहले ही धमौरा में शादी समारोह में शामिल हुए थे।

लड़की की शादी में करते थे मदद

धमौरा के प्रहलाद सिंह ने बताया- सुखदेव सिंह गोगामेड़ी बेटियों की शादी में खूब मदद करते थे। बेटियों की शादी में उनको बर्तन साफ करने में भी शर्म महसूस नहीं होती थी। सुखदेव सिंह के परिवार की दुर्गा कंवर ने बताया कि वे बहुत मिलनसार व्यक्ति थे और सभी बड़ों का बहुत आदर देते थे।

सुखदेव सिंह के परिवार के मनोहर सिंह और धीरेंद्र सिंह ने बताया कि सुखदेव सिंह बालाजी और मां दुर्गा के भक्त थे। वे हर समय माला गले में रखते और माता का स्मरण करते रहते थे। वे धार्मिक कार्यक्रमों में बहुत रुचि से भाग लेते थे। वे हमेशा मंगलवार का उपवास रखते थे।

रेसर और निशानेबाज थे गोगामेड़ी

सुखदेव सिंह के बचपन के दोस्त राजेंद्र सिंह पहलवान बताते हैं- सुखदेव भागने में बहुत होशियार था। शिकार का शौकीन था और नंबर वन निशानेबाज। मैं कई बार उसके साथ नजदीकी जंगल में शिकार करने गया था।

धमौरा के ग्रामीणों ने बताया- राजपूत परिवार में पैदा होने के बावजूद सुखदेव सिंह हर प्रकार के नशे से दूर रहते थे। बीड़ी, सिगरेट, तंबाकू या शराब का सेवन नहीं करते थे। वे अपने साथियों को भी हमेशा नशे से दूर रहने की सलाह देते थे।

सुखदेव सिंह के पिता अचल सिंह का मकान आज भी धमौरा में है।

सुखदेव सिंह के पिता अचल सिंह का मकान आज भी धमौरा में है।

55 साल पहले छोड़ा था गांव

सुखदेव सिंह गोगामेड़ी के परदादा ठाकुर बेरीसाल सिंह थे। इनके तीन बेटे जवाहर सिंह, नानूसिंह और किशोर सिंह थे। उनकी जमीन गोगामेड़ी में भी थी। इसलिए जवाहर सिंह और नानूसिंह धमौरा से गोगामेड़ी चले गए और किशोर सिंह धमौरा में ही रहने लगे।

जवाहर सिंह के साथ उनके बेटे अचल सिंह, भगवान सिंह, रामसिंह व जगदीश सिंह भी गोगामेड़ी गए थे। अचल सिंह के तीन बेटे थे। जिनमें सबसे बड़े सुखदेव सिंह, दूसरे नंबर पर दलीप सिंह और छोटे बेटे कानसिंह थे।

सुखदेव सिंह के पिता अचल सिंह का देहांत बहुत कम उम्र में होने से सुखदेव को परिवार की जिम्मेदारी संभालनी पड़ी थी। उनके भाई कान सिंह की मौत भी महज 30 साल की उम्र में दो-तीन साल पहले हो गई थी। अब उनके परिवार में एक भाई दलीप सिंह हैं।

सुखदेव सिंह के दो बेटियां हैं। धमौरा में उनके पिताजी अचल सिंह के हिस्से के मकान आज भी मौजूद हैं। जहां परिवार के दूसरे लोग रहते हैं।

धमौरा गांव के लोगों ने गुरुवार को सुखदेव सिंह हत्याकांड के विरोध में नारेबाजी की।

धमौरा गांव के लोगों ने गुरुवार को सुखदेव सिंह हत्याकांड के विरोध में नारेबाजी की।

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