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महाराष्ट्र के इस गांव को क्यों कहते हैं सीरिया:NIA की रेड में सामने आई ड्रोन अटैक की साजिश, पहले भी तीन ब्लास्ट

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महाराष्ट्र के इस गांव को क्यों कहते हैं सीरिया:NIA की रेड में सामने आई ड्रोन अटैक की साजिश, पहले भी तीन ब्लास्ट

मुंबई

9 दिसंबर, शनिवार को रात 3 बजे ठाणे के पडघा-बोरीवली गांव में पुलिस की 20 गाड़ियां पहुंचीं। इन गाड़ियों से 400 पुलिसवाले और सिविल ड्रेस में आए 10 से ज्यादा लोग उतरे और एक-एक घर की तलाशी लेने लगे। अलमारियों, बेड और बॉक्स के ताले तोड़कर सामान चेक किया।

करीब 50 घरों में तलाशी के बाद 15 लोगों को हिरासत में ले लिया। ये 15 लोग गांव के सबसे प्रभावशाली और अमीर लोगों में शामिल हैं। इनमें साकिब माचन भी है, जो 2002 और 2003 में मुंबई में हुए बम धमाकों का मास्टरमाइंड था। NIA के मुताबिक, 20 साल जेल में रह चुका साकिब गांव में अपने साथियों को ड्रोन अटैक की ट्रेनिंग दे रहा था।

पडघा-बोरीवली आपस में सटे गांव हैं। बोरीवली में करीब 90% आबादी मुस्लिम है, वहीं पडघा में करीब 80% हिंदू आबादी है।

पडघा-बोरीवली आपस में सटे गांव हैं। बोरीवली में करीब 90% आबादी मुस्लिम है, वहीं पडघा में करीब 80% हिंदू आबादी है।

सुबह 8 बजे तक चली छापेमारी के दौरान सिविल ड्रेस में आए लोगों ने गांव वालों को बताया कि वे नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी, यानी NIA से हैं और ये छापेमारी आतंकी संगठन ISIS के टेरर मॉड्यूल के शक में की गई है। इसी दौरान NIA की टीमें महाराष्ट्र में 42 जगहों के अलावा कर्नाटक के बेंगलुरु में छापेमारी कर रही थीं।

NIA की रेड के बाद टीम भिवंडी तहसील के पडघा-बोरीवली गांव पहुंचा। ये गांव कोंकण रीजन में आता है। डिस्ट्रिक्ट हेडक्वॉर्टर ठाणे से 35 किमी और मुंबई से 59 किमी दूर है। गांव के बाहर अब भी पुलिस तैनात है। पढ़िए पूरी रिपोर्ट-

पुलिसवाले बोले- ये गांव सीरिया से कम नहीं, अंदर जाकर खतरा मोल नहीं ले सकते
हम गांव में पहुंचे, तब एंट्री पॉइंट पर पुलिस की 20 से ज्यादा गाड़ियां खड़ी थीं। पुलिस वाले गांव के बाहर ही खड़े थे। हालांकि, गांव के अंदर कोई पुलिसवाला नहीं था। हमने इसकी वजह पूछी तो जवाब मिला- ये गांव सीरिया से कम नहीं है। हम खतरा मोल नहीं ले सकते, इसलिए गांव के बाहर खड़े हैं।

पडघा-बोरीवली गांव के बाहर अब भी पुलिस की गाड़ियां मौजूद हैं।

पडघा-बोरीवली गांव के बाहर अब भी पुलिस की गाड़ियां मौजूद हैं।

छापेमारी के बाद गांव के ज्यादातर लड़के घर से भागे
पुलिस की घेराबंदी पार कर हम गांव में पहुंचे। गांव में करीब 90% कोंकणी मुस्लिम रहते हैं। बाकी आबादी बुद्धिस्ट और आदिवासियों की है। गांव में लगे ज्यादातर साइन बोर्ड और नेम प्लेट पर उर्दू में नाम लिखे हैं।

छापेमारी के बाद गांव में सन्नाटा है। सभी दुकानें बंद थीं। हम गांव के फोटो-वीडियो लेने लगे तो कुछ लोग आ गए और हमें रोक दिया। कहने लगे कि हमारे गांव को बार-बार बदनाम करने की साजिश हो रही है। रेड के बाद से ज्यादातर लड़के गांव छोड़कर भाग गए हैं। नाम न बताते हुए एक शख्स ने कहा कि हमें आतंकी बताकर डराया जा रहा है। यहां हिंदू-मुसलमान साथ में रहते हैं।

NIA की रेड के बाद से गांव में पुलिस का पहरा है। NIA के मुताबिक, यहां से पकड़े गए लोग ISIS के महाराष्ट्र मॉड्यूल के मेंबर थे।

NIA की रेड के बाद से गांव में पुलिस का पहरा है। NIA के मुताबिक, यहां से पकड़े गए लोग ISIS के महाराष्ट्र मॉड्यूल के मेंबर थे।

NIA की टीम सबसे पहले साकिब नाचन के घर पहुंची, परिवार के 5 लोग अरेस्ट
गांव के लोग बताते हैं कि NIA की टीम सबसे पहले साकिब नाचन के घर गई थी। साकिब गांव का सबसे प्रभावशाली व्यक्ति है। NIA ने साकिब समेत परिवार के 5 लोगों को अरेस्ट किया है। इनमें साकिब के अलावा उसके भतीजे मुखलिस, सैफ, अतीक, राफील और रझिल नाचन शामिल हैं।

NIA ने हासिब मुल्ला, मुसाब मुल्ला, रेहान सुसे, फरहान सुसे, फिरोज कुवर, आदिल खोत, याहा खोत, शकूब दिवकर, कासीफ बेलारे और मुंझिर केपी को भी अरेस्ट किया है। इनमें कोई किराना शॉप चलाता है, कोई ब्रॉडबैंड सर्विस देता है, कोई मोबाइल फोन बेचता है और कोई प्रॉपर्टी डीलिंग के काम से जुड़ा है।

सूत्रों के मुताबिक NIA ने इन लोगों से कुछ हार्ड डिस्क जब्त की हैं, जिनकी फोरेंसिक जांच करवाई जा रही है। एक ब्रॉडबैंड सेंटर को भी सील किया गया है।

साकिब नाचन मुंबई में हुए धमाकों का मास्टरमाइंड, 10 साल जेल में रहा
दिसंबर 2002 से मार्च 2003 तक मुंबई में तीन बम धमाके हुए थे। इनमें 12 लोगों की मौत हुई थी और 125 लोग घायल हुए थे। तीनों धमाकों में साकिब नाचन का नाम सामने आया था। उसे आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के साथ मिलकर ब्लास्ट करने का दोषी पाया गया था। उसे 10 साल की सजा भी मिली थी।

दो बार सजा काट चुका है साकिब नाचन
साकिब नाचन को पहली बार 1991 में गुजरात में हुए आतंकी हमले में गिरफ्तार किया गया था। शुरुआत में उसे उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी, जिसे बाद में सुप्रीम कोर्ट ने घटाकर 10 साल कर दिया था। 2001 में साकिब नाचन रिहा हो गया था।

मुंबई में हुए धमाकों में साकिब नाचन को हथियार रखने के लिए प्रिवेंशन ऑफ टेररिज्म एक्ट, यानी पोटा के तहत सजा सुनाई गई। इस केस में साकिब 2017 में रिहा हुआ था। अब एक बार फिर वो NIA की गिरफ्त में है। उस पर इस्लामिक स्टेट ऑफ इराक एंड सीरिया या ISIS के लिए भारत में नेटवर्क तैयार करने का आरोप है।

फाइनेंस और लीगल हेल्प का काम देख रहा था साकिब नाचन
NIA सूत्रों के मुताबिक, साकिब नाचन ISIS के महाराष्ट्र मॉड्यूल का लीडर है। उसने कल्याण के बोरीवली गांव में सेंटर बनाया था। यहां से वो नए लड़कों को भर्ती करता, उन्हें फाइनेंशियल-लीगल हेल्प करता और ट्रेनिंग देता था। वो ISIS में शामिल होने वाले लोगों को ‘बैयत’ यानी ISIS के खलीफा के लिए निष्ठा की शपथ भी दिलाता था।

पुणे से फंडिंग जुटाने का आरोप
साकिब नाचन के घर से NIA ने मोबाइल फोन, दो लैपटॉप, कैश और डॉक्यूमेंट जब्त किए हैं। साकिब को बम बनाने का एक्सपर्ट माना जाता है। 2003 में हुए धमाकों के लिए उसने ही बम तैयार किए थे।

NIA के एक अधिकारी ने बताया कि साकिब नाचन कुछ महीने पहले पुणे गया था। वहां से उसने जिहाद के नाम पर काफी फंड जमा किया था। नाचन के संबंध पुणे में पकड़े गए डॉक्टर अदनान अली सरकार से भी थे।

NIA सूत्रों के मुताबिक अदनान, साकिब नाचन के कहने पर ही पुणे में ISIS के लिए भर्ती कर रहा था। NIA ने शनिवार को पुणे के कोंडवा इलाके में भी दो जगह रेड की है।

दो राज्यों में 44 जगह कार्रवाई के बाद NIA ने ये प्रेस रिलीज जारी की थी।

दो राज्यों में 44 जगह कार्रवाई के बाद NIA ने ये प्रेस रिलीज जारी की थी।

आरोपियों से मुंबई का नक्शा मिला, ड्रोन से हमले की साजिश का पता चला
NIA के मुताबिक, गिरफ्त में लिए गए लोगों से पूछताछ में पता चला कि ISIS 40 से ज्यादा जगहों पर ड्रोन हमले करने की साजिश कर रहा था। इसके लिए साकिब नाचन गांव के लोगों को ड्रोन उड़ाने की ट्रेनिंग दे रहा था। ये ट्रेनिंग ठाणे से कुछ दूर जंगल में दी जाती थी।

NIA सूत्रों के मुताबिक, आरोपियों से मुंबई के कई इलाकों की तस्वीरें और नक्शे मिले हैं। माना जा रहा है कि उनका टारगेट मुंबई हो सकता है। आरोपियों के फोन से विवादित धर्मगुरु जाकिर नाइक के वीडियो भी मिले हैं।

गांव को ‘लिबरेटेड जोन’ घोषित कर बनाया ट्रेनिंग का अड्डा
NIA के मुताबिक, आरोपियों ने पडघा गांव को फ्री जोन घोषित करके ‘अल शाम’ का नाम दिया था। ये अरबी का शब्द है, जिसे ‘अल दौलतुल इस्लामिया फिल इराक वल शाम’ के शॉर्ट फॉर्म के तौर पर बोला जाता हैं। ये शब्द ग्रेटर सीरिया के लिए इस्तेमाल किया जाता है।

NIA के एक अधिकारी ने बताया कि ‘अल शाम’ यानी ऐसी जगह जहां इस्लामिक कानून चलता है। गांव में कुछ लोग इस्लामिक स्टेट के नियम चला रहे थे, इसलिए ये समाज के लिए ज्यादा घातक हैं।

साकिब नाचन और उसके परिवार के कुछ सदस्य IED बनाने की ट्रेनिंग में भी शामिल थे। इन्होंने पडघा-बोरीवली को ही सेंटर बनाया था।

साकिब नाचन पहले प्रतिबंधित संगठन सिमी का जनरल सेक्रेटरी था। इसके बाद आतंकी संगठन इंडियन मुजाहिदीन से जुड़ा रहा। फिलहाल ISIS के हैंडलर के तौर पर काम कर रहा था।

साकिब नाचन पहले प्रतिबंधित संगठन सिमी का जनरल सेक्रेटरी था। इसके बाद आतंकी संगठन इंडियन मुजाहिदीन से जुड़ा रहा। फिलहाल ISIS के हैंडलर के तौर पर काम कर रहा था।

बाहर से लोगों को लाकर गांव में बसाया
NIA के मुताबिक, गांव को ‘अल शाम’ यानी फ्री जोन घोषित करने के बाद साकिब नाचन बाहर से लोगों को लाकर यहां बसा रहा था। इसकी पुष्टि कई ग्रामीणों ने हम से की है। उन्होंने बताया कि रात के अंधेरे में युवाओं को गांव में लाया जाता था और ज्यादातर समय वे अपने घरों में ही कैद रहते थे। कई तो अपने परिवार के साथ यहां शिफ्ट हो चुके हैं।

सभी आरोपी ISIS के हैंडलर
सेंट्रल जांच एजेंसी के एक अधिकारी ने बताया कि सभी आरोपी ISIS के महाराष्ट्र मॉड्यूल का हिस्सा हैं। वे फॉरेन हैंडलर के तौर पर काम कर रहे थे। इन्हें गरीब लड़कों का ब्रेनवाश कर संगठन में शामिल करने की ट्रेनिंग दी गई थी। इनसे पहले पुणे में एक डॉक्टर और इंजीनियर समेत 6 लोगों को NIA ने अरेस्ट किया था।

साकिब का पिता पूर्व जिला परिषद प्रमुख और रिश्तेदार उप सरपंच
साकिब नाचन एरिया के सम्मानित परिवार से ताल्लुक रखता है। उसका पिता जिला परिषद प्रमुख था। बीकॉम तक पढ़ने के बाद उसने प्रॉपर्टी डीलिंग का काम शुरू किया था। उसके परिवार के पास ठाणे जिले में बहुत सी जमीन है। नाचन के दो बेटे और एक बेटी हैं। साकिब का एक रिश्तेदार फरहान गांव का उप सरपंच है। उसे भी NIA ने हिरासत में लिया है।

ठाणे में आर्किटेक्ट के घर से नक्शे जब्त
NIA ने ठाणे से सटे मीरा-भायंदर में भी रेड की थी। टीम ने रबाड़ी के चांदीवाला अपार्टमेंट में रहने वाले अंजुम अली बापे के घर छापा मारा था। अंजुम के बेटे असद के मुताबिक, तड़के 4 बजे NIA के चार-पांच अधिकारी पहुंचे थे। उन्होंने तीन से चार घंटे घर की तलाशी ली और पिता अंजुम से पूछताछ की। घर के सभी सदस्यों का मोबाइल फोन चेक किया और पिता का मोबाइल फोन साथ ले गए।

असद के मुताबिक उनके पिता पेशे से आर्किटेक्ट हैं और अधिकारियों ने उनके बनाए गए कुछ नक्शों को जांच की। वे कुछ नक्शे साथ भी ले गए। असद का कहना है कि किसी झूठी सूचना पर NIA ने उनके घर तलाशी ली थी। हालांकि, उन्हें कुछ नहीं मिला।

डिजिटल मार्केटिंग का काम करने वाले के घर रेड
NIA की टीम शनिवार सुबह मीरा रोड के न्याय नगर में रहने वाले रिजवान सईद के घर पहुंची। रिजवान के दोनों मोबाइल जब्त कर लिए। रिजवान न्याय नगर के लक्ष्मी पार्क में डेढ़ साल से किराए पर रह रहा था। वो डिजिटल मार्केटिंग का काम करता है।

NIA ने कल्याण में आरिफ माजिद के घर की भी तलाशी ली। आरिफ उस वक्त घर पर नहीं था। 2014 में कल्याण से 4 लोग ISIS में शामिल होने के लिए सीरिया गए थे। आरिफ भी उनमें से एक था।

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