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फिर आ धमका चीनी जासूसी जहाज:इस बार श्रीलंका नहीं मालदीव ठिकाना देगा; भारत की टोह लेने 9 साल में 7वीं कोशिश

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फिर आ धमका चीनी जासूसी जहाज:इस बार श्रीलंका नहीं मालदीव ठिकाना देगा; भारत की टोह लेने 9 साल में 7वीं कोशिश

चीन का एक जासूसी जहाज 25 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हिंद महासागर में दाखिल हो रहा है। पिछले 5 साल में भारत के आसपास मंडराने की ये 6वीं चीनी कोशिश है। मकसद भले भारत की टोह लेना हो, लेकिन इस बार ठिकाना बदल गया है।

ओपन सोर्स इंटेलिजेंस कंपनी OSINT डिफेंडर ने दावा किया है कि चीन का जासूसी जहाज ‘जियांग यांग होंग 03’ फरवरी के पहले सप्ताह में मालदीव पहुंच जाएगा। 4 महीने पहले चीन के जासूसी जहाज को श्रीलंका ने अपने बंदरगाह पर खड़ा करने से मना कर दिया था। ऐसे में भारत मालदीव विवाद के बीच चीनी के जासूसी जहाज का मालदीव आना चिंता की बात है।

OSINT डिफेंडर ने चीनी जासूसी जहाज को लेकर क्या कहा है….
OSINT डिफेंडर ने अपने ट्विटर अकाउंट पर कहा है कि चीनी खोजी जहाज ‘जियांग यांग होंग 03’ हिंद महासागर में एंट्री कर चुका है। सोमवार को इंडोनेशिया के सुंडा जलडमरूमध्य के पास से इस जहाज ने हिंद महासागर में एंट्री की है। इसका ठिकाना मालदीव की राजधानी माले के करीब बताया जा रहा है।

यह पहला मौका नहीं है, जब चीनी जासूसी जहाज भारत के चक्कर लगा रहा हो। इससे पहले 2019 और 2020 में भी ये जहाज समुद्री सर्वेक्षण करने के लिए हिंद महासागर, बंगाल की खाड़ी और अरब सागर में देखा गया था।

मालदीव की ओर बढ़ रहे जासूसी जहाज पर भारत ने क्या कहा है…
द हिंदू की रिपोर्ट मुताबिक भारत सरकार के अधिकारियों ने जासूसी जहाज के मालदीव की ओर बढ़ने की बात स्वीकार की है। एक भारतीय अधिकारी ने नाम नहीं बताने की शर्त पर कहा कि ये एक रूटीन मूवमेंट हो सकता है। हालांकि, भारतीय नौसेना इस जहाज पर कड़ी नजर रख रही है।

‘एक दशक पहले किसी जंग की तैयारी करता है चीन’
डिफेंस एक्सपर्ट जेएस सोढ़ी चीनी जासूसी जहाज के मालदीव पहुंचने को सिर्फ एक रूटीन मूवमेंट मानने से इनकार करते हैं। उनका कहना है कि चीन किसी भी जंग या दूसरे चीजों की तैयारी दशकों पहले शुरू कर देता है।

यही वजह है कि पिछले कुछ समय से हिंद महासागर में चीनी जासूसी जहाजों की तैनाती में काफी वृद्धि हुई है। हिंद महासागर में इन जासूसी जहाजों की ज्यादातर मौजूदगी भारत के आसपास ही देखी गई है।

चीन के ये जहाज समुद्र में ट्रैवल करते समय रिसर्च करने के साथ ही जरूरी डेटा भी इकट्ठा करते हैं। इसके लिए इसमें ताकतवर उपकरण लगे होते हैं। ये चीनी जासूसी जहाज अपने समुद्री रास्ते में तैनात किसी दूसरे देश के जहाजों और पनडुब्बियों का भी पता लगाते हैं।

ये जहाज समुद्र के अंदर की हर चीज को ट्रैक कर रहा है। यह मरीन इंफॉर्मेशन चीन को भेज रहा है, ताकि वक्त आने पर इन्हीं जानकारी का इस्तेमाल करके चीनी पनडुब्बी हिंद महासागर में अपने मकसद में कामयाब हो सके।

जासूसी जहाज और नौसेना के जरिए भारत को चारों ओर से घेर रहा है चीन
जेएस सोढ़ी बताते हैं कि चीन भारत को जमीन और समुद्र दोनों जगहों पर घेरना चाहता है। चीन ने हमें समुद्र में घेरने के लिए तीन मुख्य बंदरगाह- पाकिस्तान में ग्वादर, श्रीलंका में हंबनटोटा और बांग्लादेश में कॉक्स बाजार बनाए हैं।

इसके अलावा चीन भारत के करीब अब दो और बंदरगाह मालदीव में लामू एटॉल और म्यामांर में क्याउकफ्यू बना रहा है। हिंद महासागर में चीनी जासूसी जहाजों का दौरा इसी कड़ी का एक हिस्सा है।

चीन के जासूसी जहाज के मालदीव के करीब आने से भारत का पूरा वेस्टर्न नेवल फ्रंट चीनी जहाज के रेंज में आ जाएगा। मालदीव भारत से सिर्फ 300 से 400 किलोमीटर दूर है। ऐसे में वह आसानी से भारत के करीब आकर जरूरी जानकारी इकट्ठा कर सकता है।

ट्रेड के लिहाज से भी हिंद महासागर और मालदीव के करीब का समुद्री हिस्सा भारत के लिए काफी खास है। भारत ज्यादातर तेल यहीं से इंपोर्ट करता है। ऐसे में अगर यहां चीनी जहाजों की मौजूदगी हुई तो भारत को बड़ा खतरा है।

इसके अलावा पिछले कुछ दिनों मे भारत और मालदीव के रिश्ते में तल्खी आई है। मालदीव के राष्ट्रपति मुइज्जू ने भारत को अपने सैनिक हटाने के लिए 15 मार्च तक की डेडलाइन दी है। वहीं, मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू इस महीने की शुरुआत में चीन की पांच दिवसीय राजकीय यात्रा से वापस लौटे हैं।

कम्युनिस्ट पार्टी (CCP) की नेता और उप विदेश मंत्री सन हैयान इस समय मालदीव में हैं। सोमवार को ही राष्ट्रपति मुइज्जू से मुलाकात कर हैयान ने कहा है कि दोनों देशों के रिश्ते पहले से बेहतर करने पर सहमति बनी है। इस वजह से भी भारत के लिए चिंता की बात है।

चीन के रिसर्च वेसल को जासूसी जहाज क्यों कहता है भारत?
चीन ने अपने जियांग यांग होंग 03 और युआन वांग-6 जैसे जासूसी जहाजों को रिसर्च वेसल कहता है। वहीं, भारत इसे जासूसी जहाज कहता है। इसकी वजह ये है कि चीनी सेना इस जहाज को ऑपरेट करती है।

ये पूरे प्रशांत, अटलांटिक और हिंद महासागर में काम करने में सक्षम हैं। ये शिप जासूसी कर बीजिंग के लैंड बेस्ड ट्रैकिंग स्टेशनों को पूरी जानकारी भेजते हैं। चीन युआन वांग क्लास शिप के जरिए सैटेलाइट, रॉकेट और इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल की लॉन्चिंग को ट्रैक करता है।

अमेरिकी रक्षा विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक, इस शिप को चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी यानी PLA की स्ट्रैटेजिक सपोर्ट फोर्स यानी SSF ऑपरेट करती है। SSF थिएटर कमांड लेवल का ऑर्गेनाइजेशन है। यह PLA को स्पेस, साइबर, इलेक्ट्रॉनिक, इन्फॉर्मेशन, कम्युनिकेशन और साइकोलॉजिकल वारफेयर मिशन में मदद करती है।

चीन के जासूसी जहाज पावरफुल ट्रैकिंग शिप हैं। ये शिप अपनी आवाजाही तब शुरू करते हैं, जब भारत या कोई अन्य देश मिसाइल टेस्ट कर रहा होता है। शिप में हाईटेक ईव्सड्रॉपिंग इक्विपमेंट (छिपकर सुनने वाले उपकरण) लगे हैं। इससे यह 1,000 किमी दूर हो रही बातचीत को सुन सकता है।

मिसाइल ट्रैकिंग शिप में रडार और एंटीना से बना इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम लगा होता है। ये सिस्टम अपनी रेंज में आने वाली मिसाइल को ट्रैक कर लेता है और उसकी जानकारी एयर डिफेंस सिस्टम को भेज देता है। यानी, एयर डिफेंस सिस्टम की रेंज में आने से पहले ही मिसाइल की जानकारी मिल जाती है और हमले को नाकाम किया जा सकता है।

चीन के समुद्री बेड़े पर नौसेना भी कर चुकी है अलर्ट
चीनी नौसेना बेड़े के भारत के लिए कितनी बड़ी चुनौती है, ये नौसेना की एक रिपोर्ट बताती है। दरअसल, अप्रैल 2023 में भारतीय नौसेना की तरफ से ‘रक्षा संबंधी संसद की स्टैंडिंग कमेटी को बताया गया था कि केवल एक दशक में, चीन के जहाज 250 से बढ़कर 350 से ज्यादा हो गए हैं।

इस आंकड़े के हिसाब से चीन फिलवक्त दुनिया की सबसे बड़ी नौसेना रखता है। कमेटी को ये भी बताया गया था कि चीनी जहाजों की संख्या के अलावा उनके ऑपरेशंस भी बढ़े हैं और फिलहाल पहले की तुलना में अब 5 की जगह 9 जहाज हिंद महासागर के इलाके में एक्टिव हैं। ये भारतीय समुद्री सुरक्षा को प्रभावित कर सकता है।

सिर्फ चीन ही नहीं भारत के पास भी है मिसाइल ट्रैकिंग शिप
मिसाइल ट्रैकिंग शिप भारत समेत सिर्फ 5 देशों चीन, फ्रांस, रूस और अमेरिका के पास हैं। ट्रैकिंग शिप बनाने का कॉन्सेप्ट सबसे पहले अमेरिका ने शुरू किया था। अमेरिका ने अपने मिसाइल प्रोग्राम को सपोर्ट करने के लिए दूसरे विश्वयुद्ध के बाद बचे हुए जहाजों को ट्रैकिंग शिप का रूप दे दिया था। अमेरिका ने उसके बाद से ही 25 से ज्यादा ट्रैकिंग शिप बनाए।

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