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भाभड़ा ने कहा था- सत्ता की दहलीज पर दलाल खड़े:चुनाव से पहले सीएम का चेहरा घोषित करने का किया था विरोध, दल-बदल पर दिया था बड़ा फैसला

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भाभड़ा ने कहा था- सत्ता की दहलीज पर दलाल खड़े:चुनाव से पहले सीएम का चेहरा घोषित करने का किया था विरोध, दल-बदल पर दिया था बड़ा फैसला

पूर्व डिप्टी सीएम और पूर्व विधानसभा स्पीकर हरिशंकर भाभड़ा का गुरुवार सुबह जयपुर में निधन हो गया। हरिशंकर भाभड़ा की गिनती राजस्थान के बेबाक नेताओं में होती थी। पार्टी में आंतरिक लोकतंत्र के कट्टर समर्थक भाभड़ा ने कभी बेबाकी नहीं छोड़ी। वे जिंदगी भर मुखर रहे। पार्टी सिद्धांतों और पार्टी के आंतरिक लोकतंत्र के खिलाफ जब भी कोई काम हुआ तो भाभड़ा ने मुखर होकर विरोध किया। उन्होंने चुनाव से पहले सीएम का चेहरा घोषित करने का विरोध किया था। इस चुनाव में हारने के बाद भाभड़ा ने कहा था कि सत्ता की दहलीज पर दलाल खड़े हैं।

19 महीने जेल में रहे

ऐसे अनेक मौके आए जब भाभड़ा ने तल्ख लहजे में बयान दिए, लेकिन कभी भी उन्होंने खंडन नहीं किया। राज्यसभा सांसद घनश्याम तिवाड़ी ने भाभड़ा के जीवन से जुड़े कई किस्से साझा किए। हरिशंकर भाभड़ा इमरजेंसी के दौरान 19 महीने तक जेल में रहे थे। जेल में उन्होंने दाढ़ी बढ़ा ली थी। जेल से छूटने के बाद भी लंबे समय तक उतनी ही बढ़ी हुई दाढ़ी के साथ रहे।

टिकट मिलने का किस्सा भी रोचक

हरिशंकर भाभड़ा को राज्यसभा का टिकट मिलने का किस्सा भी रोचक है। राज्यसभा सांसद घनश्याम तिवाड़ी ने उस दौर को याद करते हुए भाभड़ा के बारे में वह किस्सा बताया। उन्होंने बताया- इमरजेंसी हटने के बाद हुए चुनावों में राजस्थान में जनसंघ, जनता पार्टी की सरकार बन चुकी थी। भैरोंसिंह शेखावत मुख्यमंत्री थे। 1978 में राज्यसभा की एक सीट खाली हुई थी। जनसंघ-जनता पार्टी से गिरिराज किशोर आचार्य का नाम तय हुआ, लेकिन उन्होंने मना कर दिया। आचार्य के मना करने के बाद उस समय सीएम भैरोंसिंह शेखावत ने भाभड़ा को राज्यसभा भेजने का फैसला किया। शेखावत का तर्क था कि भाभड़ा जनसंघ के लिए लंबे समय से काम करते रहे हैं। इसलिए उन्हें राज्यसभा भेजा जाए। इस तरह से बिना दावेदारी किए, उन्हें राज्यसभा का टिकट मिला।

जिस वक्त भाभड़ा को राज्यसभा का टिकट देने का फैसला हुआ, उनकी दाढ़ी बढ़ी हुई थी। भैरोंसिंह शेखावत ने उनसे कहा- अब यह दाढ़ी कटवा लीजिए। इस भेष में राज्यसभा जाना ठीक नहीं होगा। शेखावत के कहने के बाद उन्होंने दाढ़ी कटवाई।

हरिशंकर भाभड़ा 1978 से लेकर 1984 तक राज्यसभा सासंद रहे। चूरू जिले की रतनगढ़ सीट से तीन बार विधायक रहे।

हरिशंकर भाभड़ा 1978 से लेकर 1984 तक राज्यसभा सासंद रहे। चूरू जिले की रतनगढ़ सीट से तीन बार विधायक रहे।

डीडवाना जनसंघ के बहुमत वाली पहली नगरपालिका थी, भाभड़ा उसके अध्यक्ष बने

60 के दशक में हरिशंकर भाभड़ा डीडवाना बार काउंसिल के अध्यक्ष थे। उसी दौरान नगरपालिका पार्षद का चुनाव जीते। डीडवाना नगरपालिका में जनसंघ का बहुमत आया था। 60 के दशक में डीडवाना नगरपालिका पहला ऐसा शहरी निकाय था, जहां जनसंघ का बहुमत आया था।

2002 में साहिब सिंह वर्मा ने सभा के दौरान वसुंधरा राजे को सीएम घोषित किया था

हरिशंकर भाभड़ा ने चुनाव से पहले मुख्यमंत्री घोषित करने का विरोध किया था। वसुंधरा राजे को 2002 में बीजेपी का चेहरा बनाया गया था। चुनावी साल में एक किसान रैली रखी गई थी। उसमें वसुंधरा राजे और दिल्ली के पूर्व सीएम साहिब सिंह वर्मा मौजूद थे। साहिब सिंह वर्मा ने उस कार्यक्रम में वसुंधरा राजे को अगला मुख्यमंत्री घोषित कर दिया था। चुनाव से पहले राजे को मुख्यमंत्री घोषित करने के साहिब सिंह वर्मा के बयान पर हरिशंकर भाभड़ा ने तल्ख प्रतिक्रिया जताते हुए विरोध किया था। भाभड़ा ने उस वक्त खुलकर बयान दिए थे कि साहिब सिंह वर्मा किस हैसियत से सीएम घोषित कर रहे हैं। सीएम का फैसला विधायक करते हैं। भाभड़ा ने अंत तक अपना स्टैंड साफ रखा। विधायकों की राय के बिना सीएम घोषित करने का लगातार विरोध किया।

वसुंधरा राजे भी हरिशंकर भाभड़ा से मिलने पहुंची थीं।

वसुंधरा राजे भी हरिशंकर भाभड़ा से मिलने पहुंची थीं।

जब भाभड़ा ने कहा था- सत्ता की दहलीज पर दलाल खड़े हैं

2002 के विधानसभा चुनावों में बीजेपी की जीत के बाद वसुंधरा राजे सीएम बनीं। भाभड़ा रतनगढ़ से चुनाव हार गए थे। उन्हें इकोनॉमिक रिफॉर्म्स काउंसिल का अध्यक्ष बनाया गया था। राजनीतिक नियुक्ति मिलने के बाद भी वे पार्टी से जुड़े मुद्दों पर हमेशा मुखर रहे। उन्होंने एक इंटरव्यू में उस समय के सत्ता तंत्र के बारे में नाराजगी जताते हुए यहां तक कह दिया था कि सत्ता की दहलीज पर दलाल खड़े हैं। उन्होंने सत्ता तंत्र के आसपास के पावर ब्रोकर पर निशाना साधा था।

भाभड़ा 30 दिसंबर 1993 से 5 अक्टूबर 1994 तक विधानसभा अध्यक्ष रहे। इसके बाद वे शेखावत सरकार में डिप्टी सीएम बने।

भाभड़ा 30 दिसंबर 1993 से 5 अक्टूबर 1994 तक विधानसभा अध्यक्ष रहे। इसके बाद वे शेखावत सरकार में डिप्टी सीएम बने।

जब बजट पास होने से ठीक पहले सदन स्थगित कर चैंबर में चले गए थे भाभड़ा

हरिशंकर भाभड़ा जब विधानसभा अध्यक्ष थे तो नई विधानसभा बिल्डिंग बनाने के लिए उन्हें सरकार से टकराव तक मोल ले लिया था। वे 1993 के बजट में हर हाल में विधानसभा के नए भवन की घोषणा करवाना चाहते थे। मुख्य बजट में घोषणा नहीं हुई तो बजट पास कराने से पहले एप्रोप्रिएशन बिल पर सीएम से घोषणा का आश्वासन दिया गया। मौजूदा राज्यसभा सांसद घनश्याम तिवाड़ी ने हाल ही में विधायकों की ट्रेनिंग वर्कशॉप के दौरान यह किस्सा बताया था।

तत्कालीन सीएम भैरोंसिंह शेखावत सदन में एप्रोप्रिशन बिल पर बहस का जवाब दे रहे थे। उन्होंने बहस के जवाब में बाकी घोषणाएं तो कर दीं, लेकिन नई विधानसभा बिल्डिंग की घोषणा नहीं की थी। सीएम जैसे ही अपना जवाब खत्म करके बैठे विधानसभा स्पीकर हरिशंकर भाभड़ा ने कुछ समय के लिए सदन की कार्यवाही स्थगित कर दी थी। अपने चैंबर में जाकर बैठ गए थे। आम तौर पर जैसे ही सीएम एप्रोप्रिशन बिल पर बहस का जवाब खत्म करते हैं। तत्काल एप्रोप्रिशन बिल और फाइनेंस बिल पारित करवाए जाते हैं। लेकिन भाभड़ा ने इसका मौका दिए बिना ही सदन की कार्यवाही स्थगित कर दी थी। अचानक सदन की कार्यवाही स्थगित होने से सीएम और मंत्री चौंक गए थे।

अर्जुन राम मेघवाल के साथ हरिशंकर भाभड़ा ।

अर्जुन राम मेघवाल के साथ हरिशंकर भाभड़ा ।

सीएम जब तक तक नई विधानसभा बिल्डिंग की घोषणा नहीं करेंगे, बजट पास नहीं होगा

भैरोंसिंह शेखावत ने उस समय घनश्याम तिवाड़ी को भाभड़ा के पास भेजा। तिवाड़ी ने उनके चैंबर में जाकर अचानक सदन स्थगित करने के बारे में जानकारी ली। भाभड़ा ने दो टूक कह दिया जब तक नई विधानसभा बिल्डिंग की घोषणा नहीं होगी बजट पास नहीं होगा। तिवाड़ी वापस सीएम शेखावत के पास गए। सीएम घोषणा को तैयार हुए, सदन की कार्यवाही फिर से शुरू हुई तो भैरोंसिंह शेखावत ने नई विधानसभा की बिल्डिंग बनाने की घोषणा की। इसके लिए टोकन मनी का प्रावधान किया। इस घोषणा के बाद ही ​अप्रोप्रिएशन बिल पारित करवाया गया।

जनता दल के 26 विधायकों के अलग गुट को सही ठहराया था
राजस्थान में दल-बदल कानून के तहत हरिशंकर भाभड़ा ने पहला बड़ा फैसला दिया था। जनता दल के विधायकों ने 1990 में भैरोंसिंह शेखावत सरकार से समर्थन वापस ले लिया था। इससे सरकार एक बार के लिए अल्पमत में आ गई थी। इसी बीच, जनता दल के एक धड़े के 20 विधायकों ने दिग्विजय सिंह के नेतृत्व में अलग दल बनाकर सरकार को समर्थन दे दिया। जनता दल (दिग्विजय) में बाद में विधायकों की संख्या बढ़कर 26 हो गई। इन विधायकों के खिलाफ दल-बदल के तहत अध्यक्ष के पास याचिका पेश की गई। स्पीकर के तौर पर हरिशंकर भाभड़ा ने दल-बदल के तहत दायर याचिकाओं पर 27 मार्च 1991 को फैसला सुनाते हुए 26 विधायकों के अलग दल को सही ठहराया।
26 विधायकों के खिलाफ दल-बदल की याचिकाओं को खारिज कर दिया। स्पीकर के तौर पर भाभड़ा ने अपने फैसले में तर्क दिया था कि जनता दल से अलग हुए 26 विधायक एक ऐसे गुट का प्रतिनिधित्व करते हैं, जो मूल जनता दल में टूट की वजह से बना है। अलग गुट के विधायकों की संख्या मूल जनता दल की संख्या की ए​क तिहाई से ज्यादा है। ऐसे में उन्हें अलग दल के तौर पर मान्यता देना सही है।

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राजस्थान के पूर्व उप मुख्यमंत्री हरिशंकर भाभड़ा का निधन: स्पीकर रहते हुए विधानसभा में बोले- पास नहीं होगा बजट, चौंक गए थे सीएम-मंत्री

राजस्थान के उप मुख्यमंत्री व विधानसभा अध्यक्ष रहे हरिशंकर भाभड़ा का देर रात निधन हो गया। वे लंबे समय से बीमार थे। उन्होंने 96 साल की उम्र में जयपुर के रूंगटा अस्पताल में अंतिम सांस ली। उनके निधन पर सीएम भजनलाल शर्मा से लेकर विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने शोक व्यक्त किया है।

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