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नाटक ने महाभारत काल का करवाया एहसास:राजस्थान इंटरनेशनल सेंटर के वीकेंड थिएटर प्रोग्राम में हुआ जबलपुर के प्रसिद्ध नाटक भूमि का मंचन

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नाटक ने महाभारत काल का करवाया एहसास:राजस्थान इंटरनेशनल सेंटर के वीकेंड थिएटर प्रोग्राम में हुआ जबलपुर के प्रसिद्ध नाटक भूमि का मंचन

राजस्थान इंटरनेशनल सेंटर के ऑडिटोरियम में शुक्रवार को जबलपुर के समागम रंगमंडल के कलाकारों ने नाटक भूमि की प्रस्तुति दी। - Dainik Bhaskar

राजस्थान इंटरनेशनल सेंटर के ऑडिटोरियम में शुक्रवार को जबलपुर के समागम रंगमंडल के कलाकारों ने नाटक भूमि की प्रस्तुति दी।

राजस्थान इंटरनेशनल सेंटर के ऑडिटोरियम में शुक्रवार को जबलपुर के समागम रंगमंडल के कलाकारों ने नाटक भूमि की प्रस्तुति दी। प्रयोगधर्मी लेखक आशीष पाठक के लिखे और एनएसडी प्रशिक्षित स्वाति दुबे की ओर से निर्देशित नाटक से दर्शकों को जमीन के लिए संघर्ष विराम की सीख मिली।

महाभारत के वनपर्व की पृष्ठभूमि पर आधारित नाटक को देखकर दर्शकों को कुछ समय के लिए उस काल में रहने का एहसास हुआ। नाटक की शुरुआत कांगड़ा के महाराज प्रभंजन से हुई और चित्रांगदा के जन्म तक पहुंची।

नाटक की शुरुआत कांगड़ा के महाराज प्रभंजन से हुई और चित्रांगदा के जन्म तक पहुंची।

नाटक की शुरुआत कांगड़ा के महाराज प्रभंजन से हुई और चित्रांगदा के जन्म तक पहुंची।

अर्जुन महाभारत के पूर्व मित्रता यात्रा पर निकले हुए हैं, जो नाग लोक से होते हुए कांगड़ा की भूमि पर पहुंचते हैं। जहां उनकी भेंट चित्रांगदा से होती है। यह भेंट नायक-नायिका की तरह न होकर दो योद्धाओं की तरह होती है। दोनों का विवाह होता है लेकिन महाभारत के चलते अर्जुन को वापस लौटना पड़ता है, वह भी बिना चित्रांगदा के। चित्रांगदा पुत्र को जन्म देती है। अर्जुन की वापसी 20 वर्ष बाद अश्वमेध यज्ञ के घोड़े के साथ होती है, जिसे उनका पुत्र बभु वाहन पकड़ लेता है। फिर तीन योद्धा आमने-सामने होते हैं। भूमि को लेकर इस संघर्ष के जरिए लेखक व निर्देशक दर्शकों को यह संदेश देने में सफल रहे कि मनुष्य महाभारत काल से भूमि के लिए लड़ रहा है। इससे नुकसान हुआ है, बावजूद इसके भूमि पर वर्चस्व के लिए जंग जारी है।

महाभारत के वनपर्व की पृष्ठभूमि पर आधारित नाटक को देखकर दर्शकों को कुछ समय के लिए उस काल में रहने का एहसास हुआ।

महाभारत के वनपर्व की पृष्ठभूमि पर आधारित नाटक को देखकर दर्शकों को कुछ समय के लिए उस काल में रहने का एहसास हुआ।

चित्रांगदा की भूमिका में खुद निर्देशक स्वाति दुबे और अर्जुन की भूमिका में हर्षित सिंह ने अपने बेजोड़ अभिनय से दर्शकों के दिल पर अमिट छाप छोड़ी। वन्दिता सेठी, उत्सव हंडे, शिवाकर सप्रे, मानसी रावत, आयुषी राव, शिवांजलि गजभिए, उत्सव हंडे, अर्पित खटीक, ज्योत्सना कटारिया, आयुषी राव, उत्सव हंडे, वन्दित सेठी, मानसी रावत अभिनय भी खूब सराहा गया।

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