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बीजेपी प्रवक्ता भारद्वाज बोले- डोटासरा की सोच सामंतवादी:कहा-साधारण किसान परिवार में जन्मे सीएम भजनलाल को बर्दाश्त नहीं का पा रहे कांग्रेस नेता

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बीजेपी प्रवक्ता भारद्वाज बोले- डोटासरा की सोच सामंतवादी:कहा-साधारण किसान परिवार में जन्मे सीएम भजनलाल को बर्दाश्त नहीं का पा रहे कांग्रेस नेता

जयपुर

कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा के जोधपुर में सीएम भजनलाल शर्मा पर दिए गए बयान को लेकर बीजेपी प्रदेश प्रवक्ता ने पलटवार किया है। बीजेपी के प्रदेश प्रवक्ता लक्ष्मीकांत भारद्वाज ने कहा कि कांग्रेस अपनी करारी हार को पचा नहीं पा रही है। इसलिए ये लोग ओछे और मनमाने बयान देकर अपनी खीज उतार रहे हैं। खुद को किसान पुत्र कहकर डींग हाकने वाले गोविंद डोटासरा की सोच और मानसिकता पूरी तरह सामंतवादी है।

भारद्वाज ने कहा- जिस तरह कांग्रेस में एक परिवार का गुणगान करके बड़े पद पाने का रिवाज है, उसी चश्मे से कांग्रेस के लोग भाजपा को देख रहे हैं। यह उनकी भूल है। भाजपा में पूरी तरह से लोकतंत्र है। हमारे यहां कोई छोटा या बड़ा नहीं है, हर कार्यकर्ता को बराबर तवज्जो दी जाती है।

रस्सी जल गई लेकिन बल नहीं गया
भारद्वाज ने कहा- एक सामान्य किसान के घर जन्म लेकर मुख्यमंत्री के पद तक पहुंचने वाले भजनलाल शर्मा को कांग्रेस बर्दाश्त नहीं कर पा रही है। कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष डोटासरा, अशोक गहलोत और प्रदेश प्रभारी रंधावा की इसी अहंकारी सोच के चलते राजस्थान उनकी ये दुर्दशा हुई है। कांग्रेस राज में पिछले पांच सालों तक प्रदेश में अराजकता, महिला अत्याचार, पेपर लीक, दलित उत्पीड़न चरम पर रहा और कांग्रेस के नेता मुफ्त की योजनाओं के नाम पर जनता को गुमराह करते रहे। जनता ने कांग्रेस सरकार की इन्ही कारगुजारियों से त्रस्त होकर उन्हे सत्ता से बाहर का रास्ता दिखाया है। मौजूदा समय में कांग्रेस नेताओं के ऐसे बयानों पर यह कहावत चरितार्थ होती है कि, रस्सी जल गई लेकिन बल नहीं गया।

कांग्रेस प्रदेश को बदहाल स्थिति में छोड़कर गई
भारद्वाज ने कहा- कांग्रेस पार्टी प्रदेश को बदहाल स्थिति में छोड़कर गई थी। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा प्रदेश को कर्जे से बाहर निकालकर पटरी पर लाने का प्रयास कर रहे हैं, लेकिन कांग्रेस के नेता ओछी बयानबाजी और अनर्गल आरोप लगाने से बाज नहीं आ रहे। प्रदेश की भजनलाल सरकार गरीब को उसका हक दिलाने के लिए और कानून व्यवस्था स्थापित करने के लिए ठोस काम कर रही हे। इसका जीरता जागता उदाहरण ईआरसीपी समझौता, पेपर लीक पर एसआईटी का गठन 450 रूपए में एलपीजी गैस सिलेंडर और अन्नपूर्णा योजना है।

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