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राजस्थान में कांग्रेस के दिग्गज नहीं लड़ना चाहते लोकसभा चुनाव:भाजपा में हर सीट के लिए 3 से 5 दावेदार; दिल्ली की बैठकों में तय हो सकते हैं कैंडिडेट्स

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राजस्थान में कांग्रेस के दिग्गज नहीं लड़ना चाहते लोकसभा चुनाव:भाजपा में हर सीट के लिए 3 से 5 दावेदार; दिल्ली की बैठकों में तय हो सकते हैं कैंडिडेट्स

राजस्थान में लोकसभा चुनावों के लिए भाजपा और कांग्रेस दोनों ने तैयारियां शुरू कर दी हैं। कांग्रेस ने 16 फरवरी को दिल्ली में स्क्रीनिंग कमेटी की बैठक रखी है, तो भाजपा की भी 17 व 18 फरवरी को दिल्ली में ही राष्ट्रीय परिषद की मीटिंग है।

लोकसभा चुनावों को लेकर दोनों पार्टियों में दो अलग-अलग रुख देखने में आए हैं। कांग्रेस में जहां ज्यादातर सीनियर नेताओं ने कमेटी की 9 फरवरी को हुई बैठक में चुनाव लड़ने के लिए अनिच्छा जाहिर कर दी थी, वहीं भाजपा में ज्यादातर वर्तमान सांसद, विधायक या पदाधिकारी चुनाव लड़ने के इच्छुक हैं।

पिछले दो लोकसभा चुनावों में कांग्रेस राजस्थान की 25 लोकसभा सीटों में से एक भी सीट जीत नहीं सकी है। भाजपा ने वर्ष 2014 और 2019 में सभी 25 सीटों (एक पर गठबंधन के तहत) पर जीत दर्ज की थी।

इस सप्ताह के अंत तक दिल्ली में होने वाली दोनों पार्टियों की मीटिंग के बाद लोकसभा चुनावों के बारे में स्थिति स्पष्ट होगी।

12 जनवरी को हुई कार्ययोजना बैठक में CM भजनलाल शर्मा, प्रदेशाध्यक्ष सीपी जोशी, प्रभारी अरुण सिंह सहित अन्य वरिष्ठ नेता भी उपस्थित रहे।

12 जनवरी को हुई कार्ययोजना बैठक में CM भजनलाल शर्मा, प्रदेशाध्यक्ष सीपी जोशी, प्रभारी अरुण सिंह सहित अन्य वरिष्ठ नेता भी उपस्थित रहे।

कांग्रेस के यह दिग्गज नहीं लड़ेंगे लोकसभा चुनाव

कांग्रेस सूत्रों के अनुसार, पार्टी में पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, पूर्व विधानसभा अध्यक्ष सी. पी. जोशी, गोविंद सिंह डोटासरा, हरीश चौधरी, सचिन पायलट, अशोक चांदना, भंवर जितेन्द्र सिंह, रघुवीर मीणा, रामलाल जाट, बृजेन्द्र ओला, प्रताप सिंह खाचरियावास, मुरारी लाल मीणा जैसे दिग्गजों को लोकसभा चुनाव लड़वाना चाहती थी।

कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी सुखजिंदर सिंह रंधावा ने खुद एक महीने पहले जयपुर में कहा था कि इन नेताओं को पार्टी लोकसभा चुनावों में उतारकर मजबूत मुकाबला बनाना चाहती है।

अब एक महीने में तस्वीर बदल गई है। 9 फरवरी को दिल्ली में हुई स्क्रीनिंग कमेटी के सामने इनमें से ज्यादातर नेताओं ने चुनाव नहीं लड़ने की बात कह दी है।

सूत्रों के अनुसार अशोक गहलोत, सी. पी. जोशी, सचिन पायलट, जितेन्द्र सिंह, गोविंद सिंह डोटासरा, रघुवीर मीणा, मुरारी लाल मीणा, हरीश चौधरी संभवतया चुनाव नहीं लड़ने वाले हैं।

किसी ने स्वास्थ्य संबंधी कारणों से, तो किसी ने नई पीढ़ी को आगे लाने की बात कहकर चुनाव लड़ने की मंशा को टाल दिया है। हाल ही पूर्व मुख्यमंत्री गहलोत एक बार फिर कोरोना से पीड़ित भी हुए हैं।

अब 16 फरवरी को होने वाली बैठक में यह देखना रोचक होगा कि कांग्रेस आलाकमान इन नेताओं को सख्ती से चुनाव लड़ने को कहता है या नहीं।

अशोक गहलोत, सचिन पायलट और गोविंद सिंह डोटासरा जैसे कई दिग्गज नेता संभवतया लोकसभा चुनाव नहीं लड़ेंगे।

अशोक गहलोत, सचिन पायलट और गोविंद सिंह डोटासरा जैसे कई दिग्गज नेता संभवतया लोकसभा चुनाव नहीं लड़ेंगे।

कांग्रेस के बड़े नेताओं के चुनाव नहीं लड़ने से मनोबल पर फर्क पड़ेगा

एक-दो बड़े नेता तो राज्य सभा से संसद जाने की भी पूरी कोशिश कर रहे हैं। अब संभवत: यह मसला राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी तक ले जाया जाएगा।

कांग्रेस ने वर्ष 2014 में जिन्हें सांसद का टिकट दिया था, उनमें से ज्यादातर को वर्ष 2019 में भी टिकट दिया था। वे सभी लगातार दो बार चुनाव हार चुके हैं।

कांग्रेस के टिकट पर UPA सरकार में मंत्री रहे सचिन पायलट व भंवर जितेन्द्र सिंह सहित वैभव गहलोत, मोहम्मद अजहरूद्दीन, अशोक चांदना, कृष्णा पूनिया जैसे चर्चित चेहरे भी चुनाव हार चुके हैं।

कांग्रेस की बैठक में इस बात पर भी विचार किया गया है कि जिस तरह से हाल ही भाजपा के एक सीनियर नेता पूर्व मंत्री सुरेन्द्र पाल सिंह टीटी के सामने एक युवा को टिकट दिया गया और चुनाव (करणपुर उप चुनाव) जीता गया, वैसे ही पार्टी को लोकसभा चुनावों में भी युवाओं पर ही दांव खेलना चाहिए।

ऐसे में कांग्रेस के सामने दूसरा बड़ा संकट यह है कि उसे 25 सीटों पर अब ऐसे चेहरों पर विचार करना पड़ेगा जो चुनाव जीतने की क्षमता रखते हों।

स्क्रीनिंग कमेटी को इस बात की चिंता है कि अगर राजस्थान में 5 वर्ष तक सरकार चलाने और 71 विधायकों के होने के बावजूद बड़े नेता चुनाव नहीं लड़ेंगे तो पार्टी के मनोबल पर विपरीत असर पड़ सकता है।

स्क्रीनिंग कमेटी को इस बात की चिंता है कि अगर राजस्थान में 5 वर्ष तक सरकार चलाने और 71 विधायकों के होने के बावजूद बड़े नेता चुनाव नहीं लड़ेंगे तो पार्टी के मनोबल पर विपरीत असर पड़ सकता है।

भाजपा में हर सीट पर 3 से 5 नामों में विचार, कुछ नए चेहरे भी चर्चा में

कांग्रेस के विपरीत भाजपा की लोकसभा चुनावों की तैयारियां काफी आगे बढ़ चुकी। पार्टी ने जयपुर स्थित एक रिसोर्ट (दिल्ली रोड स्थित) में जनवरी में लोकसभा चुनावों को लेकर विशेष बैठक की थी। इस बैठक में विभिन्न पदाधिकारियों सहित मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा भी उपस्थित थे।

केन्द्र सरकार और भाजपा के अलग-अलग अभियानों (विकसित भारत संकल्प यात्रा, चलो गांव की ओर, राममंदिर यात्रा, चाय पर चर्चा आदि) के तहत मुख्यमंत्री, केन्द्रीय मंत्री, सांसद, मंत्री, पदाधिकारी जुटे हुए हैं।

अब दिल्ली में 17-18 फरवरी को भारत मंडपम में होने वाली राष्ट्रीय परिषद की बैठक में लोकसभा चुनावों की तैयारियों को लेकर विशेष सत्र में बात होगी। इस बैठक की शुरुआत पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जे. पी. नड्‌डा और समापन PM नरेंद्र मोदी करेंगे।

बैठक से पहले प्रदेश के कई सांसदों ने राष्ट्रीय अध्यक्ष जे. पी. नड्‌डा और केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात भी की है। शुक्रवार को दिल्ली में प्रदेशाध्यक्ष सी. जी. जोशी ने अपने आवास पर सभी सांसदों को लंच भी दिया है।

सूत्रों के अनुसार पार्टी ने प्रदेश की सभी 25 सीटों पर 3 से 5 नामों पर विचार कर लिया है। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, केन्द्रीय जल शक्ति मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत, केन्द्रीय कृषि मंत्री कैलाश चौधरी, केन्द्रीय सामाजिक अधिकारिता मंत्री अर्जुनराम मेघवाल, प्रदेशाध्यक्ष सी. पी. जोशी, दुष्यंत सिंह आदि चुनाव लड़ सकते हैं।

इनके अलावा केन्द्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव और वन पर्यावरण मंत्री भूपेन्द्र यादव भी राजस्थान से चुनाव लड़ सकते हैं।

जयपुर ग्रामीण, अजमेर, अलवर, जालोर-सिरोही, राजसमंद के सांसदों (राज्यवर्द्धन राठौड़, भागीरथ चौधरी, बाबा बालकनाथ, देवजी पटेल और दीया कुमारी को हाल ही विधानसभा चुनावों में उतारा था, ऐसे में इन सीटों पर नए चेहरे आएंगे।

भीलवाड़ा, श्रीगंगानगर, चूरू, नागौर, दौसा, टोंक-सवाईमाधोपुर, करौली-धौलपुर आदि सीटों पर पार्टी नए चेहरों को सामने ला सकती है।

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत और केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव जैसे दिग्गज नेता राजस्थान से लोकसभा चुनाव लड़ सकते हैं।

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत और केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव जैसे दिग्गज नेता राजस्थान से लोकसभा चुनाव लड़ सकते हैं।

कांग्रेस के पूर्व सांसद बोले- मैं नहीं लड़ना चाहता चुनाव

कांग्रेस से पूर्व सांसद रघुवीर मीणा ने बताया, ‘मैंने लोकसभा चुनाव लड़ने के प्रति पूरी तरह से अनिच्छा जाहिर कर दी है। मैं ही नहीं बल्कि पार्टी के ज्यादातर सीनियर नेताओं, पूर्व मंत्रियों, पूर्व सांसदों आदि ने चुनाव नहीं लड़ने की बात पिछले दिनों आलाकमान को प्रकट कर दी है। स्क्रीनिंग कमेटी की चेयरपर्सन रजनी पाटील के समक्ष सभी ने अपना पक्ष रख दिया है।’

उधर भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष मुकेश दाधीच ने बताया कि 17-18 फरवरी को दिल्ली में होने वाली राष्ट्रीय परिषद की बैठक सभी सांसद, विधायक, जिला प्रमुख, पदाधिकारी शामिल होंगे। पार्टी जिसे भी आदेश देगी वो चुनाव लड़ने को तैयार है।

केन्द्र सरकार की योजनाओं और अभियानों पर लिया जाएगा ‌विशेष डिजिटल फीडबैक

भाजपा तैयारी कर रही है कि सभी सांसदों से उनके संसदीय क्षेत्रों में केन्द्र सरकार की विभिन्न योजनाओं व अभियानों पर अब तक सांसदों द्वारा जो भी काम किए गए हैं उनका विशेष फीडबैक लिया जाए।

इस फीडबैक को केवल मौखिक नहीं बल्कि डिजिटल मीडियम पर लिया जाएगा। जिसमें वीडियो, फोटो के माध्यम से बताना पड़ेगा कि किस योजना और अभियान में क्या-क्या काम हुआ है। वर्तमान सांसदों में से टिकट चाहने वालों ने इसकी तैयारी शुरू कर दी है।

7 फरवरी को दिल्ली में सी पी जोशी के आवास पर राजस्थान के सभी सांसद जुटे। मीटिंग में लोकसभा चुनाव पर चर्चा की गई।

7 फरवरी को दिल्ली में सी पी जोशी के आवास पर राजस्थान के सभी सांसद जुटे। मीटिंग में लोकसभा चुनाव पर चर्चा की गई।

भाजपा में 25 में से केवल एक सीट पर आयु सीमा में छूट हो सकती है

कांग्रेस 72 से 80 वर्ष की आयु वाले पूर्व मुख्यमंत्री गहलोत, पूर्व विधानसभा अध्यक्ष सी. पी. जोशी, विधायक शांति धारीवाल, पूर्व सांसद गोपाल सिंह ईडवा, विधायक दयाराम परमार, विधायक हरिमोहन शर्मा को भी लोकसभा का चुनाव लड़वा सकती है।

कांग्रेस का मानना है कि इन नेताओं की अपनी विशेष साख है। वे चुनाव जीत सकते हैं। वहीं भाजपा में उम्र को लेकर खास रणनीति बन चुकी है। कांग्रेस में उम्र को लेकर कोई सीमा तय नहीं है।

वहीं भाजपा में संभवत: 25 लोकसभा सीटों पर एक मात्र बीकानेर ऐसी सीट हो सकती है जहां 70 वर्ष से अधिक आयु के उम्मीदवार केन्द्रीय मंत्री अर्जुनराम मेघवाल को उम्मीदवार बनाया जा सकता है। शेष सभी 24 सीटों पर किसी भी ऐसे नेता को उम्मीदवार नहीं बनाया जाएगा जिसकी आयु 70-75 वर्ष के बीच है।

पार्टी विधानसभा चुनावों की ही तरह लोकसभा चुनावों में पीढ़ी परिवर्तन की रणनीति अपना रही है। इसके तहत 40 से 60 वर्ष की आयु के बीच वाले ज्यादा उम्मीदवार उतारे जाएंगे। 60 पार के उम्मीदवारों की संख्या 4-5 तक सीमित रखी जानी है।

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