मकान ढहने से 1 मजदूर की मौत, 3 घायल:हाईवे को चौड़ा करने के लिए तोड़ रहे थे मकान, अचानक पिलर टूटने से ढहा

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मकान ढहने से 1 मजदूर की मौत, 3 घायल:हाईवे को चौड़ा करने के लिए तोड़ रहे थे मकान, अचानक पिलर टूटने से ढहा

तीन घायलों को हॉस्पिटल में एडमिटट करवाया गया है।

हाईवे को चौड़ा करने के लिए चल रहे अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के दौरान अचानक एक मकान ढह गया। इस दौरान काम कर रहे चार लोग दब गए। इनमें से एक की मौत हो गई, जबकि तीन जने घायल हो गए। घायलों में से एक को फ्रैक्चर हुआ है जबकि शेष दो को हल्की चोटें आई हैं। घटना जोधपुर के भोपालगढ़ की सुबह करीब 11 बजे की है।

जानकारी के अनुसार हाईवे को चौड़ा करने के बाद इसके दोनों और नाले और फुटपाथ का काम करवाया जाना है। इसके लिए यहां बने मकानों व दुकानों के लिए संबंधित मालिकों को पीडब्ल्यूडी ने मुआवजा दे दिया था। उसी के तहत कुछ लोग अपनी दुकानें व मकान तुड़वा रहे थे। गुरुवार सवेरे बस स्टैंड के समीप काम के दौरान अचानक एक मकान ढह गया और वहां काम कर रहे चार श्रमिक अंदर दब गए। लोगों ने तुरंत ही तीन को तो क्रेन की मदद से बाहर निकाल लिया, लेकिन एक श्रमिक जितेंद्र मेघवाल (20) पुत्र पप्पूराम मेघवाल निवासी असावरी अंदर फंस गया। कुछ देर बाद उसे भी निकालकर अस्पताल पहुंचाया गया। जहां उसे मृत घोषित कर दिया गया। घायलों का भोपालगढ़ के उप जिला अस्पताल में इलाज चल रहा है।

सूचना के बाद भोपालगढ़ थानाधिकारी गिरधारी राम कड़वासरा मौके पर पहुंचे। उन्होंने पूरे मामले की जानकारी ली। अभी तक मामले में कोई रिपोर्ट दर्ज नहीं हुई है।

हादसे में घायल 3 लोगों हॉस्पिटल में एडमिटट करवाया गया है। तीनों का भोपालगढ़ के उप जिला अस्पताल में इलाज चल रहा है।

हादसे में घायल 3 लोगों हॉस्पिटल में एडमिटट करवाया गया है। तीनों का भोपालगढ़ के उप जिला अस्पताल में इलाज चल रहा है।

2 महीने पहले PWD ने दिया था मकान हटाने का नोटिस

स्टेट हाइवे की जद में मकान व दुकानें आ रही थी। इसको लेकर PWD ने दो महीने पहले नोटिस दिए थे, वहीं इसका मुवावजा भी दे दिया गया। पिछले 10 दिनों से मकान व दुकान हटाने का कार्य चल रहा है। वहीं गुरुवार को हुए हादसे में जितेंद्र की दबने से मौके पर ही मौत हो गई, जबकि 3 श्रमिक घायल हो गए।

परिवार में सबसे बड़ा था जितेंद्र, तीन छोटे भाई

जितेंद्र परिवार में सबसे बड़ा था। उसके तीन छोटे भाई हैं, जो पढ़ाई कर रहें हैं। पिता भी मजूदरी का काम करते हैं। आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण पिता के साथ जितेंद्र भी परिवार की जिम्मेदारी संभाल रहा था।

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