श्रीकृष्ण-सुदामा की मित्रता के संदेश के साथ श्रीमद्भागवत कथा की हुई पूर्णाहुति, भजनों की बही सरिता

FacebookWhatsAppTelegramLinkedInXPrintCopy LinkGoogle TranslateGmailThreadsShare
[metaslider id=”119252″]


नंदनवन गौशाला का पन्द्रहवें वर्ष में होगा प्रवेश, वार्षिकोत्सव में भामाशाहों व गौसेवकों का होगा सम्मान
बीकानेर। गडिय़ाला स्थित नंदनवन गौशाला में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा की सोमवार को पूर्णाहुति हुई। कथा वाचन करते हुए संत श्रीसुखदेवजी महाराज ने कहा सुदामा चरित्र का मार्मिक वर्णन किया। उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण की करुणा और मित्रता की महिमा का आभास कराया। रुक्मिणी-श्याम विवाह व अन्य व्याख्यानों के साथ भजनों की प्रस्तुतियों से पूर्णाहुति की गई। श्रीसुखदेवजी महाराज ने बताया कि 14 जनवरी मंगलवार को नंदनवन गौशाला 14 वर्ष पूर्ण करने के साथ ही 15वें वर्ष में प्रवेश कर रही है। नंदनवन गौशाला का वार्षिकोत्सव में भामाशाहों व गौसेवकों का सम्मान किया जाएगा। सुबह 10 बजे से दोपहर 1 बजे तक चलने वाले इस कार्यक्रम में संत-महात्माओं का भी आगमन होगा। संत श्रीसुखदेवजी महाराज ने कथा को सम्बोधित करते हुए कहा कि गाय के लिए छाया की व्यवस्था करना, गोचर व गौशाला की व्यवस्था करना जीवन का उत्कृष्ट कार्य है। गौमाता की सेवा से ही सुख है, जीवन में आने वाले संकट गौसेवा से दूर हो जाते हैं। कथा यजमान मदनदान कीनिया ने व्यास पूजन किया। आयोजन से जुड़े घनश्याम रामावत ने बताया कि कथा के दौरान वीरेंद्र सिंह नाल, विजयपाल गाट, श्रीरामदासजी महाराज (फलोदी), बच्चनसिंह, दुर्गादान, अखेराज खत्री सहित अनेक गौभक्त शामिल रहे।

Categories:
error: Content is protected !!