गाय/बछड़े, ऊंट और अन्य जानवरों की अवैध हत्या/बलि को रोकने के लिये एड़वाजयरी जारी

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भारतीय जीव जंतु कल्याण बोर्ड ने बोर्ड के मानद जीव जंतु कल्याण प्रतिनिधि श्रेयांस बैद के पत्र पर संज्ञान करते हुए कड़े कदम उठाते हुए आगामी त्योहार के मद्देनजर एडवायजरी करते हुए देश के समस्त पुलिस महानिदेशक व चीफ सेक्रेटरी को जारी पत्र में बताया की बकरीद के दौरान बड़ी संख्या में जानवरों का वध किए जाने की संभावना होती है। बताया गया है कि जानवरों के परिवहन के दौरान जानवरों के मालिक पशु कल्याण कानूनों का पालन नहीं करते हैं जिसके परिणामस्वरूप जानवरों के प्रति क्रूरता होती है और यहां तक कि कुछ जानवर परिवहन के दौरान मर भी जाते हैं। पत्र में उल्लेख किया गया की पशु क्रूरता निवारण अधिनियम, 1960 के तहत किसी भी जानवर के साथ क्रूरता एक दंडनीय अपराध है। ऐसा उल्लंघन भारत के संविधान के अनुच्छेद 48. 48 (ए) और 51 ए (जी) की भावना के खिलाफ है।
पशु क्रूरता निवारण (वथगृह) नियम, 2001 के नियम 3 के अनुसार, कोई भी व्यक्ति नगरपालिका क्षेत्र के भीतर किसी भी पशु का वध उस वधगृह के अलावा नहीं करेगा जो उस समय कानून के तहत अधिकार प्राप्त संबंधित प्राधिकारी द्वारा मान्यता प्राप्त या लाइसेंस प्राप्त हो। ऐसे किसी भी जानवर का वध नहीं किया जाएगा, जो गर्भवती हो, या जिसकी संतान 3 महीने से कम की हो, या 3 महीने से कम उम्र की हो, या जिसे पशु चिकित्सक द्वारा प्रमाणित नहीं किया गया हो कि वह वध करने के लिए उपयुक्त स्थिति में है। वध का अर्थ भोजन के उद्देश्य से किसी भी जानवर की हत्या या विनाश है जब तक कि इस तरह के विनाश के साथ अनावश्यक दर्द या पीड़ा न हो। उक्त नियमों में पशुओं के मानवीय वध की प्रक्रियाएं शामिल हैं । स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के तहत भारतीय खाद्य सुरक्षा और दिनांक 06.08.2014 मानक प्राधिकरण ने LrNo.1-988/FSSAI/आयात/ के माध्यम से एक निर्देश जारी किया है कि “पशु” निर्दिष्ट प्रजातियों में से किसी एक से संबंधित जानवर है। नीचेः (1) ओवाइन्स (II) कैप्राइन्स (iii) सुइलिन्स (iv) बोवाइन्स और इसमें मुर्गी और मछली शामिल हैं। इसने यह भी निर्देश दिया है कि खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम,नियमों और विनियमों के तहत ऊपर आसूचीबद्ध प्रजातियों के अलावा किसी अन्य प्रजाति के जानवरों का वध करने की अनुमति नहीं है।
इसका प्रभावी अर्थ यह है कि भोजन के लिए ऊंटों का वध बिल्कुल नहीं किया जा सकता है। साथ ही, जहां भी गौहत्या निषेध अधिनियम लागू है, वहां गौवध करना कानून का उल्लंघन होगा । बोर्ड ने भारत के माननीय सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालय के निर्णयों की कॉपी देश के समस्त चीफ सेक्रेटरी व पुलिस महानिदेशक को प्रेषित की है ।

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