ब्रिक्स कार्यकारी समूह की बैठक में उच्च प्रदर्शन कंप्यूटिंग (एचपीसी) और सूचना संचार प्रौद्योगिकी (आईसीटी) पर चर्चा

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ब्रिक्स कार्यकारी समूह की बैठक में उच्च प्रदर्शन कंप्यूटिंग (एचपीसी) और सूचना संचार प्रौद्योगिकी (आईसीटी) पर चर्चा की गई
बीआरआईसीएस-ब्रिक्स कार्यकारी समूह की हाल में ही संपन्न बैठक में उच्च प्रदर्शन कंप्यूटिंग (एचपीसी) और इसके मौसम-जलवायु-पर्यावरण अनुप्रयोगों, दवा निर्माण, कृत्रिम बुद्धिमता, एवं एचपीसी आधारित सटीक दवा और जन स्वास्थ्य, विशेषकर महामारी से लड़ने में भू-सूचना विज्ञान जैसे क्षेत्रों में अनुसन्धान और दीर्घकालिक विकास के लिए सुपर कंप्‍यूटर के प्रयोग हेतु भविष्य में सहयोग पर चर्चा हुईI

विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार ट्रैक के तहत, उच्च प्रदर्शन कंप्यूटिंग (एचपीसी) और सूचना संचार प्रौद्योगिकी (आईसीटी) पर ब्रिक्स कार्यकारी समूह की यह पांचवीं बैठक थी जो 27-28 मई 2021 को दक्षिण अफ्रीका द्वारा ऑनलाइन मोड में आयोजित की गई थी।

इस बैठक में सभी पांच ब्रिक्स देशों ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका ने भाग लिया। बैठक में इन देशों के शोधकर्ताओं, शिक्षाविदों और सरकारी अधिकारियों सहित 50 से अधिक प्रतिभागियों ने भाग लिया।

विज्ञानं और प्रौद्योगिकी विभाग में अंतर्राष्ट्रीय सहयोग प्रकोष्ठ के प्रमुख और सलाहकार, श्री संजीव कुमार वार्ष्णेय ने इस बैठक में भारतीय पक्ष का नेतृत्व किया। उन्होंने कृत्रिम बुद्धिमता, विशाल आंकड़े (बिग डाटा), मशीन से शिक्षा, जैसे नए विषयों के उभार और चिकित्सा विज्ञानं, कृषि, पृथ्वी विज्ञानं, मॉडलिंग और सिमुलेशन जैसे क्षेत्रों में इसके संभावित प्रयोग को देखते हुए इन सभी की आवश्यकता बताई। उन्होंने ब्रिक्स बहुपक्षीय परियोजनाओं का समर्थन करने के लिए वित्त पोषण सहित संसाधनों के सह-निवेश के लिए भारत की प्रतिबद्धता की पुष्टि की। हर देश ने ब्रिक्स सहयोग को आगे बढ़ाने के लिए एचपीसी अवसंरचना नेटवर्क और रुचि के क्षेत्रों के निर्माण में अपने देश में हुई प्रगति को साझा किया।

भारतीय पक्ष की ओर से सी-डैक के वरिष्ठ निदेशक डॉ. संजय वांधकर ने राष्ट्रीय सुपरकंप्यूटिंग मिशन के तहत सुपर कंप्यूटरों के स्वदेशी विकास की भारत की पहल और बाढ़ की पहले से चेतावनी के लिए एक उपयोगकर्ता के अनुकूल और व्यापक प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली विकसित और तैनात करने के लिए दवा डिजाइन में उनके अनुप्रयोगों का प्रस्तुतीकरण किया।

भारत स्वास्थ्य, कृषि और शिक्षा के क्षेत्रों में गहन प्रौद्योगिकी में ब्रिक्स स्टार्टअप्स के बीच सहयोग पर अवधारणा नोट साझा करेगा। चीन ने एआई+एचपीसी+5 जी-आधारित डिजिटल ट्विन प्लेटफॉर्म और स्मार्ट विनिर्माण, सटीक खेती, और सटीक दवा के लिए एक मुक्त-स्रोत-व्यवस्था (ओपन-सोर्स इकोसिस्टम) का प्रस्ताव रखा। ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका ने डिजिटल पृथ्वी पर प्रमुख परियोजना का प्रस्ताव रखा।
कार्यकारी समूह (वर्किंग ग्रुप) की जिन सिफारिशों पर सभी ब्रिक्स देशों ने सर्वसम्मति से सहमति व्यक्त की है, उन्हें अगले ब्रिक्स प्रस्तावों के लिए आह्वान हेतु बैठक (ब्रिक्स कॉल फॉर प्रपोजल) में शामिल किया जा सकता है। ब्रिक्स आह्वान (कॉल) सचिवालय के प्रतिनिधि ने संकेत दिया है कि 2021 की दूसरी छमाही में अगली बैठक की घोषणा की जा सकती है।

बीआरआईसीएस (ब्रिक्स) उच्च प्रदर्शन कंप्यूटिंग (एचपीसी) और सूचना संचार प्रौद्योगिकी (आईसीटी) कार्यकारी समूह अपने सदस्य देशों के शोधकर्ताओं के लिए परस्पर हित के क्षेत्रों पर चर्चा और विचार-विमर्श करने के लिए एक मंच प्रदान करता है ताकि साझेदारी बनाने और सामाजिक चुनौतियों जैसे कि सस्ती स्वास्थ्य देखभाल, टिकाऊ कृषि, विषम मौसम, मौसम और जलवायु मॉडलिंग आदि की घटनाओं पर गहन प्रौद्योगिकी-आधारित समाधान विकसित किया जा सके।

ब्रिक्स देशों से भाग लेने वाले प्रमुख वैज्ञानिक संस्थानों में भारत से विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी), इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (एमईआईटीवाई), सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ एडवांस कंप्यूटिंग (सी-डैक), वैज्ञानिक संगणना की राष्ट्रीय प्रयोगशाला (एलएनसीसी), ब्राजील, सेनाई सिमटेक, ब्राजील में अनुसंधान संस्थान, अनुसंधान कंप्यूटिंग केंद्र, मॉस्को स्टेट यूनिवर्सिटी (आरसीसी एमएसयू), रूस, गुआंगज़ौ विश्वविद्यालय, चीन से सन यात-सेन विश्वविद्यालय और विज्ञान और नवाचार विभाग, दक्षिण अफ्रीका, राष्ट्रीय अनुसंधान फाउंडेशन (एनआरएफ), दक्षिण अफ्रीका, दक्षिण अफ्रीकी मौसम सेवा, दक्षिण अफ्रीका शामिल हैं।

यह बैठक सभी ब्रिक्स देशों द्वारा ब्रिक्स विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार कैलेंडर के लिए 2020-21 के लिए अपनाए गए कैलेंडर का एक अंग है। भारत इस वर्ष जनवरी 2021 से ब्रिक्स का अध्यक्ष बना है। ब्रिक्स 2021 कैलेंडर के एक हिस्से के रूप में मंत्रिस्तरीय बैठकों, वरिष्ठ आधिकारिक बैठकों और क्षेत्रीय बैठकों/सम्मेलनों सहित लगभग 100 कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा।

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