भजनलाल सरकार में 7 बड़ी राजनीतिक नियुक्तियां:लोकसभा चुनाव के ऐलान से पहले सीआर चौधरी को किसान आयोग, विश्नाई को जीव-जंतु कल्याण बोर्ड अध्यक्ष बनाया

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जयपुर। भजनलाल सरकार ने लोकसभा चुनावों की आचार संहिता लगने से ठीक पहले 7 बड़ी राजनीतिक नियुक्तियां की हैं। आयोग, बोर्ड और निगमों में सात नेताओं को अध्यक्ष बनाया है। राजनीतिक रूप से अहम माने जाने वाले किसान आयोग, देवनारायण बोर्ड, एससी वित्त निगम, सैनिक कल्याण समिति में बीजेपी नेताओं को अध्यक्ष बनाया है। इन्हें कैबिनेट मंत्री का दर्जा देने के आदेश अलग से जारी होंगे।

नागौर से पूर्व बीजेपी सांसद सीआर चौधरी को राजस्थान किसान आयोग अध्यक्ष पद पर और जोधपुर से पूर्व बीजेपी सांसद जसवंत विश्नोई को जीव जंतु कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष पद पर नियुक्ति दी गई है। ओमप्रकाश भडाना को देवनारायण बोर्ड अध्यक्ष, पूर्व विधायक प्रेम सिंह बाजौर को राज्य स्तरीय सैनिक कल्याण सलाहकार समिति में अध्यक्ष नियुक्त किया है। प्रहलाद टाक को यादे माटी कला बोर्ड अध्यक्ष बनाया है। राजेंद्र नायक को राजस्थान राज्य एससी वित्त निगम अध्यक्ष पद पर नियुक्त किया है। राजेंद्र एससी मोर्चा के उपाध्यक्ष हैं। रामगोपाल सुथार को विश्वकर्मा कौशल विकास बोर्ड का अध्यक्ष बनाया गया।

जसवंत विश्नोई नाराज चल रहे थे, राजनीतिक नियुक्ति देकर साधा

जोधपुर से पूर्व सांसद जसवंत विश्नोई नाराज चल रहे थे। उन्होंने पिछले दिनों सोशल मीडिया पोस्ट करके इशारों में नाराजगी जाहिर की थी। पश्चिमी राजस्थान में प्रभावशाली विश्नोई समाज से आने वाले जसवंत विश्नोई को राजनीतिक नियुक्ति देकर सियासी मैसेज देने के साथ उनकी नाराजगी दूर करने का प्रयास किया गया है।

7 नियुक्तियों से छह अलग-अलग बड़े वोट बैंक को साधने का प्रयास
लोकसभा चुनाव से ठीक पहले छह राजनीतिक नियुक्तियां देकर बीजेपी सरकार ने छह बड़े वोट बैंक को मैसेज देकर साधने का प्रयास किया है। जाट, राजपूत, विश्नोई, गुर्जर, एससी, मूल ओबीसी को साधा गया है। किसान आयोग अध्यक्ष पद पर सीआर चौधरी को नियुक्ति देकर जाट वर्ग को मैसेज देने का प्रयास किया है। देवनारायण बोर्ड अध्यक्ष बनाकर गुर्जर समाज को साधने का प्रयास किया है।

सैनिक कल्याण समिति में पूर्व विधायक प्रेम सिंह बाजौर को नियुक्ति देकर राजपूत समाज को मैसेज देने का प्रयास किया है। एससी वित्त विकास निगम के जरिए दलित वोटर्स, माटी कला बोर्ड और विश्वकर्मा कौशल विकास बोर्ड के जरिए मूल ओबीसी को मैसेज दिया गया है

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