‘मुंबई जेल में संजय दत्त अपराधी की तरह रहे थे’:सुपर कॉप मीरा बोलीं- हम पर कड़ी नजर रहती थी, उन्हें कोई विशेष सुविधा न मिले

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‘मुंबई जेल में संजय दत्त अपराधी की तरह रहे थे’:सुपर कॉप मीरा बोलीं- हम पर कड़ी नजर रहती थी, उन्हें कोई विशेष सुविधा न मिले

जयपुर

जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल में सोमवार को मुंबई की पूर्व पुलिस कमिश्नर मीरा बोरबंकर भी शामिल हुईं। इस दौरान उन्होंने भास्कर से खास बातचीत की। उन्होंने बताया- मुंबई को एक समय में क्राइम की राजधानी कहा जाता था। जब मैंने क्राइम ब्रांच काे जॉइन किया। उस वक्त मैं पुलिस सर्विस में 25 साल पूरे कर चुकी थी।

मीरा ने संजय दत्त के जेल के समय की बातों को साझा करते हुए बताया- संजय दत्त जब जेल में आए। वो गुनहगार थे। उन्हें समझ में आ गया था कि अगर वो ठीक से व्यवहार नहीं करेंगे तो उन्हें पेरोल नहीं मिल पाएगी। उन्होंने बहुत अच्छे से व्यवहार किया। मीडिया ने खूब इस पर मॉनिटर किया कि उन्हें किसी भी प्रकार की सहूलियत न दी जाए। मैं ये कहना चाहूंगी कि महाराष्ट्र जेल में संजय दत्त को वही ट्रिटमेंट दिया गया। जो हम बाकि अपराधियों को देते हैं।

मीरा बोरबंकर ने बताया – महिला होने के नाते कई चैलेंज होते हैं, लेकिन मुझे मेरे मेरे काम का अनुभव बहुत अच्छे से था। मुझे मेल ऑफिसर्स को भी लीड करने का अनुभव था। जब मैं मुंबई क्राइम ब्रांच तक पहुंची। उस वक्त तक दो बड़े जिलों को हैंडल कर चुकी थी। सतारा में मैं जिला पुलिस प्रमुख रह चुकी थी। इन सभी अनुभवों के कारण ही मुंबई ने मुझे एक लीडर के रूप में एक्सेप्ट किया ना कि एक वूमेन लीडर के तौर पर। कुछ हद के बाद हमारा जेंडर कोई मायने नहीं रखता। हमारी लीडरशिप क्वालिटी और नॉलेज ऑफ इन्वेस्टिगेशन इंपोर्टेंट हो जाता है। सभी अधिकारियों को दिख रहा था कि मुझे इन्वेस्टिगेशन अच्छे से आती है। किसी भी केस काे फ्रंट से लीड करती हूं। इसलिए मुझे मुंबई जैसे शहर ने स्वीकार्य किया।

मुंबई के बड़े प्रोड्यूसर डायरेक्टर को मिल रही थी धमकियां

बॉलीवुड और पॉलिटिकल प्रेशर का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा- क्राइम ब्रांच के काम में पॉलिटिशियन थोड़ा कम इंटरफेयर करते है। मेरी डयूटी के दौरान की एक घटना बताना चाहती हूं। बॉलीवुड में कई बार धमकियों के मामले सामने आते हैं। हाई प्रोफाइल मामलों में वे हमसे शेयर नहीं करते। हम अपराधियों के फोन कानूनी दायरों में रहते हुए टेप करते हैं। हमने ऐसा ही एक फोन सर्विलांस पर रखा था। हमें पता चला कि उस समय के एक बहुत बड़े प्रोड्यूसर डायरेक्टर को धमकियां मिल रही थी। वो प्रोड्यूसर हमारे डीसीपी का फोन नहीं उठा रहे थे।

जेएलएफ के सेशन में शामिल हुईं मीरा बोरबंकर (दाएं से पहली)।

जेएलएफ के सेशन में शामिल हुईं मीरा बोरबंकर (दाएं से पहली)।

डायरेक्टर ने मेरे ऊपर फिल्म बनाने की बात कही

मुंबई हर प्रोड्यूसर डायरेक्टर मुंबई के जॉइंट पुलिस कमिश्नर का या क्राइम ब्रांच के अधिकारियों का फोन नंबर अपने पास रखते हैं। जब मैंने उनको फोन किया। उन्होंने फोन उठाया। मैंने उनसे कहा आप जिस बिल्डिंग में बैठे हैं। आप दूसरी मंजिल पर हैं। आप नीचे नहीं आइएगा। उन्होंने कहा क्यों नहीं आऊं। मैंने उनसे कहा आपकी जान को खतरा है। हमारी इन्फॉर्मेशन के हिसाब से नीचे शूटर्स तैयार बैठे हैं। वे इसकी गंभीरता समझने की जगह मुझे बोले आप मीरा बोलबंकर बोल रही हैं। मैंने कहा हां आप नीचे नहीं आएंगे। क्योंकि नीचे शूटर्स है। उन्होंने कहा मैं आप पर पिक्चर बनाना चाहता हूं। फिल्म के लोग भी बड़े अजीब हैं। जिस व्यक्ति के लाइफ को खतरा है। वह उस वक्त मेरे ऊपर फिल्म बनाने की बात कर रहा है।

मुंबई क्राइम ब्रांच की कमिश्नर के रूप में तैनात होने वाली पहली महिला अधिकारी रहीं

बता दें कि मीरा महाराष्ट्र कैडर की पहली महिला IPS अफसर रही हैं। 1981 बैच की IPS अधिकारी मीरा बोरवंकर मुंबई क्राइम ब्रांच की कमिश्नर के रूप में तैनात होने वाली पहली महिला अधिकारी भी रही हैं। डॉ. मीरा सी बोरवंकर ने भारतीय पुलिस सेवा (IPS) के अधिकारी के रूप में 1981 से 2017 तक महाराष्ट्र कैडर में काम किया। नेशनल और इंटरनेशनल पत्रिकाओं में लेख, इनवेस्टिगेशन, जेंडर, कानून-प्रवर्तन, ई-गवर्नेंस और सामुदायिक भागीदारी पर उनके कई दर्जन शोध-पत्र छपे हैं। देश की पहली महिला IPS अधिकारी किरण बेदी से प्रेरणा लेकर ही मीरा भारतीय प्रशासनिक सेवा से जुड़ी थीं।

उन्होंने बताया- इस फील्ड में काफी काम किया। इसके बाद मैंने सेंट्रल इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो में काम किया। अमेरिका की पुलिस के साथ एक साल काम किया। मुझे काम करने का जो पूरा एक्पीरियंस था। गुनहगार को पेश करने से लेकर चार्ट शीट तैयार करना, इन्वेस्टिगेशन, डॉक्यूमेंटेशन इन सबका मुझे अभ्यास हो चुका था। इसलिए मैं क्राइम ब्रांच मुंबई को लीड कर पाई।

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