‘सफाई कर्मचारी मूल काम पर नहीं आए तो वेतन रुकेगा’:UDH मंत्री बोले- स्वच्छता सर्वे में अच्छी रैंक नहीं आने के लिए कर्मचारी से लेकर आयुक्त तक जिम्मेदार
जयपुर

स्वायत्त शासन मंत्री झाबर सिंह खर्रा ने कहा है कि स्वच्छता सर्वेक्षण में राजस्थान के शहरों की अच्छी रैंक नहीं आने के लिए सफाई कर्मचारी, सफाई निरीक्षक से लेकर अधिकारी और आयुक्त तक जिम्मेदार हैं। क्योंकि यह सब अपनी जिम्मेदारी अच्छे से नहीं निभा पाए। इसी वजह से राजस्थान के शहरों की स्वच्छता सर्वेक्षण में अच्छी रैंक नहीं आई है। हमारी सरकार के गठन के बाद सफाई को और बेहतर कैसे बनाया जाए। इसकी प्लानिंग शुरू कर दी गई है। इसका असर अगले स्वच्छता सर्वेक्षण में नजर आएगा।
झाबर सिंह खर्रा ने ने कहा- मंत्री बनने के बाद मैने पहला आदेश सफाई को लेकर ही निकाला है। इसके तहत प्रदेशभर में सफाई कर्मचारी अब सिर्फ सफाई का काम ही करेंगे। इसको लेकर स्वायत शासन विभाग ने आदेश भी जारी कर दिए हैं। क्योंकि प्रदेशभर में लगभग एक तिहाई सफाई कर्मचारियों को सफाई के काम से हटाकर दूसरे कामों में लगा रखा था। ऐसे में अगर 31 जनवरी तक वह सभी लोग अपने मूल काम (सफाई कर्मचारी) पर नहीं आए तो अगले महीने से उनका वेतन (सैलरी) रोक दिया जाएगा।

विधायक बालमुकुंद आचार्य के साथ मकर संक्रांति के मौके पर नहर की गणेश जी मंदिर में सफाई करते मंत्री झाबर सिंह खर्रा।
झाबर सिंह खर्रा ने कहा- राजस्थान में कांग्रेस सरकार के वक्त शुरू हुई सफाई कर्मचारियों की भर्ती को भी नए सिरे से शुरू किया जाएगा। क्योंकि सफाई कर्मचारी भर्ती में रिटन एग्जाम और प्रैक्टिकल एग्जाम को लेकर असमंजस की स्थिति थी। ऐसे में 18 जनवरी को सफाई कर्मचारी भर्ती को लेकर फिर से रिव्यू होगा। रिव्यू के बाद ही नए 23 हजार पदों पर किस आधार पर सफाई कर्मचारियों की भर्ती होगी। इसका फैसला किया जाएगा। इसके साथ ही वाल्मीकि समाज को किस तरह की वरीयता दी जाएगी। इसका फैसला भी इस बैठक में ही किया जाएगा।
बता दें कि झाबर सिंह खर्रा स्वच्छता अभियान के तहत सोमवार को हवामहल स्थित नहर की गणेश जी मंदिर की सफाई करने पहुंचे थे। इस दौरान खर्रा ने जयपुर की बिगड़ी सफाई व्यवस्था को लेकर नाराजगी जाहिर की। उन्होंने कहा- राजधानी होने के बावजूद जयपुर में सफाई व्यवस्था चक्रवर्ती नहीं है। इसे और बेहतर करने के प्रयास होने चाहिए। क्यों कि जयपुर में न सिर्फ भारत बल्कि दुनिया भर से सैलानी पहुंचते हैं। इससे देश की छवि पर इसका सीधा असर पड़ता है।




