एनआरसीसी में संस्थागत जैव सुरक्षा समिति (IBSC) की दूसरी बैठक संपन्न

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बीकानेर, 14 अक्टूबर, 2026। भाकृअनुप–राष्ट्रीय उष्ट्र अनुसंधान केंद्र (एनआरसीसी), बीकानेर में संस्थागत जैव सुरक्षा समिति (आईबीएससी) की दूसरी बैठक सफलतापूर्वक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता केंद्र के निदेशक तथा आईबीएससी के चेयरमैन डॉ. अनिल कुमार पूनिया की अध्यक्षता में आयोजित की गई। इस बैठक में समिति के आंतरिक व बाह्य विषय के विशेषज्ञ उपस्थित रहे। बैठक के दौरान संस्थान में संचालित एवं प्रस्तावित जैव प्रौद्योगिकी अनुसंधान गतिविधियों, प्रयोगशाला सुविधाओं तथा शोध प्रस्तावों की जैव सुरक्षा संबंधी निर्धारित दिशा-निर्देशों के अनुरूप समीक्षा की गई।
इस अवसर पर निदेशक डॉ. अनिल कुमार पूनिया ने कहा कि आधुनिक पशुपालन एवं ऊँट स्वास्थ्य अनुसंधान में जैव सुरक्षा का विशेष महत्त्व है। उन्होंने वैज्ञानिकों एवं तकनीकी कर्मचारियों से निर्धारित जैव सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन करने का आह्वान किया। उन्होंने सुरक्षित अनुसंधान वातावरण सुनिश्चित करने के लिए नियमित निगरानी, आवश्यक प्रशिक्षण तथा जैव सुरक्षा प्रक्रियाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर बल दिया। जैव सुरक्षा अधिकारी डॉ. ओम प्रकाश सिंह ने निर्धारित जैव सुरक्षा मानकों के अनुपालन तथा सुरक्षित अनुसंधान प्रक्रियाओं को प्रभावी ढंग से लागू करने की आवश्यकता पर बल दिया। वहीं, डीबीटी के नामित सदस्य, डॉ. रमेश कुमार देदर ने जैव सुरक्षा स्तर-1 एवं स्तर-2 (BSL-1 एवं BSL-2) प्रयोगशालाओं तथा शोध प्रस्तावों की निर्धारित मानकों के अनुरूप समीक्षा की।
डॉ. राकेश रंजन, आंतरिक विशेषज्ञ ने जैविक नमूनों एवं संदूषित सामग्रियों के सुरक्षित विसंक्रमण, निपटान और संबंधित जैव सुरक्षा प्रक्रियाओं के समुचित अनुपालन पर जोर दिया। राजुवास के बाह्य विशेषज्ञ डॉ. राम कुमार ने अनुसंधान गतिविधियों एवं प्रयोगशाला सुविधाओं का जैव सुरक्षा दिशा-निर्देशों के परिप्रेक्ष्य में आकलन किया। बैठक में केंद्र के आंतरिक विशेषज्ञ डॉ. बसंती ज्योत्सना ने भी अपने विचार रखें ।
समिति के सदस्य सचिव डॉ. रतन कुमार चौधरी ने बैठक की कार्यवाही का संचालन किया।उन्होंने बताया कि बैठक के दौरान समिति के सदस्यों ने अपने-अपने दायित्वों के अनुरूप जैव सुरक्षा से जुड़े विभिन्न पहलुओं की समीक्षा की तथा समिति ने BSL-1 एवं BSL-2 प्रयोगशालाओं के भौतिक सत्यापन, शोध प्रस्तावों के लिए निर्धारित प्रपत्र तैयार करने तथा छात्रों एवं यंग प्रोफेशनल्स के लिए आयोजित आगामी जैव सुरक्षा अभिमुखीकरण कार्यशाला/ प्रशिक्षण कराने पर जोर दिया।

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