बीकानेर। भाकृअनुप-राष्ट्रीय उष्ट्र अनुसंधान केन्द्र (एनआरसीसी), बीकानेर में संस्थागत पशु नैतिकता समिति (IAEC) की चर्तुथ बैठक आयोजित की गई। समिति कक्ष में आयोजित इस बैठक का उद्देश्य अनुसंधान में पशुओं के प्रति मानवीय व्यवहार सुनिश्चित करने तथा निर्धारित नियामक दिशा-निर्देशों के अनुरूप पशु प्रयोगों के संचालन को बढ़ावा देना रहा। समिति ने इस दौरान पशु आवास सुविधा का निरीक्षण भी किया तथा संतोषजनक पाया। समिति को ‘आई लव कैमल मिल्क’ अभियान से भी जोड़ा गया।
केन्द्र के निदेशक डॉ. अनिल कुमार पूनिया ने पशु कल्याण के प्रति संवेदनशीलता एवं नैतिक मानकों के अनुपालन के साथ अनुसंधान कार्यों को आगे बढ़ाने की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि अनुसंधान के दौरान पशुओं की सुरक्षा, उचित देखभाल एवं उनके प्रति मानवीय व्यवहार सुनिश्चित करना एक अत्यंत अनिवार्य पहलू है।
बैठक की अध्यक्षता करते हुए केन्द्र के डॉ. राकेश रंजन, प्रधान वैज्ञानिक ने कहा कि अनुसंधान प्रस्तावों की वैज्ञानिक गुणवत्ता, प्रासंगिकता एवं निर्धारित प्रोटोकॉल के अनुरूप समीक्षा संस्थागत पशु नैतिकता समिति की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।
मुख्य नामित सदस्य डॉ. अशोक डांगी ने पशु नैतिकता को ध्यान में रखते हुए अपेक्षित सुधारों की ओर सदन का ध्यान इंगित किया। एक्सटर्नल सदस्य डॉ. अनिल भानुदास गायकवाड़ ने चर्चा के दौरान पशु नैतिकता संबद्ध अपेक्षित पहलुओं पर अपने विचार रखें। डॉ. अशोक पुरोहित, लिंक नामित सदस्य तथा अन्य विषयों से जुड़े सदस्यों में डॉ. वेद प्रकाश एवं डॉ. बसंती ज्योत्सना उपस्थित रहे।
एनआरसीसी की ओर से समिति के सदस्य सचिव डॉ. श्याम सुंदर चौधरी ने बताया कि बैठक में ऊँटों एवं अन्य प्रयोगशाला पशुओं से संबंधित अनुसंधान प्रस्तावों की वैज्ञानिक उपयुक्तता, पशु कल्याण तथा निर्धारित नैतिक दिशा-निर्देशों के अनुरूप अनुसंधान कार्यों के संचालन से जुड़े पहलुओं पर विस्तृत विचार-विमर्श किया गया। विचार-विमर्श के उपरांत प्रस्तुत प्रस्तावों के संबंध में आवश्यक संस्तुतियाँ एवं निर्णय लिए गए।

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