
BY DEFENCE JOURNALIST SAHIL | T.I.N. NETWORK
खाजूवाला बॉर्डर से संचालित हो रहा था 20 करोड़ की साइबर ठगी का नेटवर्क! बीकानेर पुलिस ने दबोचा कथित मास्टरमाइंड, क्रिप्टोकरेंसी और हवाला के जरिए देशभर में फैला था जाल
गृह मंत्री अमित शाह के दौरे के बाद बॉर्डर बेल्ट में तेज हुई कार्रवाई, साइबर अपराधियों पर बीकानेर पुलिस का बड़ा प्रहार
राजस्थान के सीमावर्ती जिले बीकानेर में साइबर अपराध के खिलाफ चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत पुलिस को एक बड़ी सफलता हाथ लगी है। भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा से सटे खाजूवाला क्षेत्र से संचालित एक कथित साइबर ठगी नेटवर्क का खुलासा करते हुए पुलिस ने 20 करोड़ रुपये से अधिक के संदिग्ध लेन-देन से जुड़े एक आरोपी को गिरफ्तार किया है। इस कार्रवाई को बीकानेर रेंज में साइबर अपराध के खिलाफ अब तक की सबसे महत्वपूर्ण कार्रवाइयों में से एक माना जा रहा है। पुलिस का दावा है कि आरोपी केवल बैंक खातों के जरिए रकम ट्रांसफर करने तक सीमित नहीं था, बल्कि वह साइबर ठगी से प्राप्त धनराशि को क्रिप्टोकरेंसी और हवाला नेटवर्क के माध्यम से देश के विभिन्न हिस्सों में सक्रिय गिरोहों तक पहुंचाने का काम भी कर रहा था।
विशेष बात यह है कि यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है जब हाल ही में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का सीमावर्ती क्षेत्रों पर विशेष फोकस रहा है और सीमा क्षेत्रों में अपराध, तस्करी तथा साइबर नेटवर्क पर नकेल कसने के निर्देश दिए गए हैं। ऐसे में बीकानेर पुलिस की यह कार्रवाई सुरक्षा एजेंसियों के लिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
आईजी ओमप्रकाश और कार्यवाहक एसपी विशाल जांगिड़ के निर्देशन में चला विशेष अभियान
बीकानेर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक (आईजी) ओमप्रकाश के निर्देशन और कार्यवाहक पुलिस अधीक्षक विशाल जांगिड़ की निगरानी में साइबर अपराधियों के खिलाफ एक विशेष अभियान चलाया जा रहा है। इसी अभियान के तहत साइबर पुलिस थाना बीकानेर और खाजूवाला पुलिस की संयुक्त टीम ने लंबे समय से निगरानी और तकनीकी विश्लेषण के बाद इस कार्रवाई को अंजाम दिया।
साइबर थाना प्रभारी शालिनी बजाज के नेतृत्व में गठित टीम ने खाजूवाला थाना क्षेत्र के चक 14 बीडी निवासी 23 वर्षीय विष्णु बिश्नोई को गिरफ्तार किया। पुलिस अधिकारियों के अनुसार आरोपी की गतिविधियों पर काफी समय से नजर रखी जा रही थी और उसके बैंकिंग ट्रांजेक्शन, डिजिटल गतिविधियों तथा विभिन्न राज्यों से प्राप्त शिकायतों का विश्लेषण करने के बाद गिरफ्तारी की कार्रवाई की गई।
20 करोड़ रुपये से अधिक के लेन-देन ने चौंकाई जांच एजेंसियां
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आरोपी विष्णु बिश्नोई और उससे जुड़े बैंक खातों के माध्यम से 20 करोड़ रुपये से अधिक का संदिग्ध लेन-देन किया गया। पुलिस को ऐसे कई बैंक खाते मिले हैं जिनमें साइबर ठगी से जुड़ी रकम जमा हुई और बाद में उसे अलग-अलग माध्यमों से आगे भेजा गया।
जांच एजेंसियों के अनुसार यह रकम किसी एक राज्य या एक प्रकार की ठगी से संबंधित नहीं थी, बल्कि देश के विभिन्न हिस्सों में हुई साइबर ठगी की घटनाओं से जुड़ी धनराशि होने की आशंका है। यही कारण है कि मामले को केवल स्थानीय अपराध नहीं बल्कि अंतरराज्यीय साइबर अपराध नेटवर्क के रूप में देखा जा रहा है।
देशभर में दर्ज हैं 25 साइबर ठगी की शिकायतें
पुलिस जांच के दौरान यह तथ्य भी सामने आया कि आरोपी के खिलाफ देश के विभिन्न राज्यों में साइबर ठगी से संबंधित लगभग 25 शिकायतें दर्ज हैं। इन शिकायतों में ऑनलाइन फ्रॉड, निवेश के नाम पर ठगी, डिजिटल भुगतान धोखाधड़ी और अन्य साइबर अपराध शामिल बताए जा रहे हैं।
हालांकि जांच अभी प्रारंभिक चरण में है, लेकिन पुलिस का मानना है कि शिकायतों की संख्या और लेन-देन की राशि को देखते हुए यह नेटवर्क काफी बड़ा हो सकता है। कई राज्यों की पुलिस और साइबर सेल भी अब इस मामले में जानकारी साझा कर सकती हैं ताकि पूरे नेटवर्क का खुलासा किया जा सके।
बैंक खातों को बनाया साइबर ठगी की रकम का ट्रांजिट पॉइंट
पुलिस अधिकारियों के अनुसार आरोपी की भूमिका साइबर अपराधियों और अंतिम लाभार्थियों के बीच एक महत्वपूर्ण कड़ी की थी। ठगी से प्राप्त रकम सबसे पहले विभिन्न बैंक खातों में जमा करवाई जाती थी। इनमें आरोपी के अपने खाते भी शामिल थे और अन्य लोगों के खाते भी, जिन्हें कथित रूप से इस नेटवर्क में उपयोग किया जा रहा था।
इन खातों को साइबर अपराध की दुनिया में “म्यूल अकाउंट” कहा जाता है। ऐसे खाते वास्तविक ठगों और अंतिम धन प्राप्तकर्ताओं के बीच एक परत का काम करते हैं ताकि जांच एजेंसियों को असली अपराधियों तक पहुंचने में कठिनाई हो। पुलिस का दावा है कि इस मामले में ऐसे बीस से अधिक खातों का इस्तेमाल किया गया।
क्रिप्टोकरेंसी के जरिए गायब कर दी जाती थी ठगी की रकम
जांच में जो सबसे महत्वपूर्ण खुलासा हुआ है, वह साइबर ठगी की रकम को क्रिप्टोकरेंसी में बदलने से जुड़ा है। पुलिस के अनुसार आरोपी बैंक खातों में आई रकम को एक ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के माध्यम से यूएसडीटी (USDT) नामक क्रिप्टोकरेंसी में परिवर्तित करता था।
इसके लिए कथित रूप से बाइनेंस जैसे प्लेटफॉर्म का उपयोग किया जाता था। क्रिप्टोकरेंसी में राशि परिवर्तित होने के बाद उसका स्रोत पता लगाना अपेक्षाकृत कठिन हो जाता है, जिससे अपराधियों को अपनी पहचान छिपाने में मदद मिलती है। पुलिस का आरोप है कि आरोपी इस प्रक्रिया के बदले लगभग 10 प्रतिशत कमीशन प्राप्त करता था।
विशेषज्ञों के अनुसार साइबर अपराध और क्रिप्टोकरेंसी का बढ़ता गठजोड़ जांच एजेंसियों के लिए नई चुनौती बनता जा रहा है, क्योंकि डिजिटल करेंसी के जरिए धन को कुछ ही मिनटों में दुनिया के किसी भी हिस्से में स्थानांतरित किया जा सकता है।
बैंक खाते बंद हुए तो हवाला नेटवर्क का लिया सहारा
पुलिस जांच में एक और महत्वपूर्ण पहलू सामने आया है। अधिकारियों के अनुसार जब साइबर शिकायतों के कारण बैंक खाते फ्रीज या बंद हो जाते थे, तब आरोपी और उसके सहयोगी हवाला नेटवर्क का सहारा लेते थे।
हवाला प्रणाली के जरिए धनराशि को बिना औपचारिक बैंकिंग चैनल के एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाया जाता है। यदि जांच में यह आरोप सही साबित होता है तो मामला केवल साइबर ठगी तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि वित्तीय अपराध, मनी लॉन्ड्रिंग और अवैध अंतरराज्यीय वित्तीय नेटवर्क तक पहुंच सकता है।
सीआई रमेश सर्वटा और संयुक्त पुलिस टीम की अहम भूमिका
इस पूरे ऑपरेशन में साइबर पुलिस और खाजूवाला पुलिस के बीच उत्कृष्ट समन्वय देखने को मिला। पुलिस सूत्रों के अनुसार कार्रवाई में सीआई रमेश सर्वटा की विशेष भूमिका रही। वहीं खाजूवाला थानाधिकारी सुरेंद्र प्रजापत और उनकी टीम ने भी महत्वपूर्ण योगदान दिया।
तकनीकी विश्लेषण, बैंक खातों की जांच, डिजिटल ट्रेल की निगरानी और स्थानीय स्तर पर सूचनाएं जुटाने के बाद संयुक्त टीम ने आरोपी तक पहुंचने में सफलता प्राप्त की। पुलिस अधिकारियों का मानना है कि यह कार्रवाई आगे और बड़े खुलासों का आधार बन सकती है।
कई खाताधारक और सहयोगी जांच के घेरे में
पुलिस अब उन सभी व्यक्तियों की भूमिका की जांच कर रही है जिनके बैंक खातों का उपयोग इस नेटवर्क में किया गया। यह पता लगाया जा रहा है कि खाताधारकों को लेन-देन की जानकारी थी या उनके खाते किसी लालच, कमीशन अथवा धोखे से उपयोग किए गए।
जांच एजेंसियों का मानना है कि साइबर अपराध के इस नेटवर्क में कई स्तरों पर लोग शामिल हो सकते हैं, जिनमें खाते उपलब्ध कराने वाले, रकम ट्रांसफर करने वाले, क्रिप्टोकरेंसी खरीदने वाले और अंतिम लाभार्थी शामिल हैं।
बॉर्डर क्षेत्र में साइबर अपराध की नई चुनौती
खाजूवाला जैसे सीमावर्ती क्षेत्रों में साइबर अपराध नेटवर्क का सक्रिय होना सुरक्षा एजेंसियों के लिए चिंता का विषय माना जा रहा है। पहले सीमा क्षेत्रों में तस्करी, नकली मुद्रा और अन्य पारंपरिक अपराधों पर अधिक ध्यान दिया जाता था, लेकिन अब डिजिटल युग में साइबर अपराधियों ने भी दूरदराज और सीमावर्ती क्षेत्रों को अपने संचालन के लिए उपयोग करना शुरू कर दिया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि सीमावर्ती क्षेत्रों में इंटरनेट और डिजिटल बैंकिंग के बढ़ते उपयोग के साथ साइबर अपराध के नए स्वरूप सामने आ रहे हैं, जिनसे निपटने के लिए स्थानीय पुलिस और केंद्रीय एजेंसियों के बीच मजबूत समन्वय आवश्यक होगा।
जांच के साथ हो सकते हैं और बड़े खुलासे
फिलहाल विष्णु बिश्नोई से गहन पूछताछ जारी है। पुलिस को उम्मीद है कि पूछताछ के दौरान साइबर ठगी गिरोह के अन्य सदस्यों, उनके वित्तीय नेटवर्क, क्रिप्टोकरेंसी लेन-देन और हवाला चैनलों से जुड़े कई महत्वपूर्ण राज सामने आ सकते हैं।
बीकानेर पुलिस का मानना है कि यह मामला केवल एक व्यक्ति की गिरफ्तारी तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके तार देशभर में फैले एक बड़े साइबर अपराध नेटवर्क से जुड़े हो सकते हैं। आने वाले दिनों में इस जांच से जुड़े नए खुलासे न केवल राजस्थान बल्कि देशभर की साइबर अपराध जांच एजेंसियों के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं।
बीकानेर पुलिस की इस कार्रवाई ने एक बार फिर यह संदेश दिया है कि साइबर अपराध चाहे डिजिटल दुनिया में हो या सीमा क्षेत्र की जमीन पर, कानून के हाथ अब लगातार उन नेटवर्क तक पहुंच रहे हैं जो करोड़ों रुपये की ठगी कर आम लोगों की मेहनत की कमाई को निशाना बना रहे हैं।













