जरूरत की खबर- बच्चों के फेसबुक-इंस्टा पर रखें नजर:नए टूल से उनके मैसेज-चैट की निगरानी, जानें इसके सारे फीचर्स, कैसे करें एक्टिव
सोशल मीडिया पर बच्चों की बढ़ती सक्रियता के साथ उनकी ऑनलाइन सेफ्टी को लेकर पेरेंट्स की चिंताएं भी बढ़ी हैं। इसके लिए मेटा ने इंस्टाग्राम, फेसबुक और मेसेंजर पर ‘पेरेंटल सुपरविजन टूल’ लॉन्च किया है।
इससे पेरेंट्स अपने 13-17 साल के बच्चों की सोशल मीडिया एक्टिविटीज, स्क्रीन टाइम, इंटरेस्ट पर नजर रख सकेंगे। इस टूल से सेंसेटिव कंटेंट को कंट्रोल करने में भी मदद मिलेगी।
‘नेशनल इंस्टीट्यूट्स ऑफ हेल्थ’ के मुताबिक, 13-17 साल के लगभग 95% टीनएजर्स सोशल मीडिया यूज करते हैं। इनमें से करीब दो-तिहाई हर दिन सोशल मीडिया पर एक्टिव रहते हैं। वहीं लगभग 35% किसी-न-किसी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल लगभग हर समय करते हैं।
इसलिए आज ‘जरूरत की खबर’ में ‘पेरेंटल सुपरविजन टूल’ की बात करेंगे। साथ ही जानेंगे कि-
- यह फीचर कैसे काम करता है?
- इसे बच्चे के फोन में कैसे एक्टिव करना है?
- क्या इसके लिए बच्चे का कंसेंट जरूरी होगा?
एक्सपर्ट: रिद्धि दोषी पटेल, चाइल्ड साइकोलॉजिस्ट, मुंबई
सवाल- मेटा का नया फीचर ‘पेरेंटल सुपरविजन टूल’ क्या है?
जवाब- मेटा ने अपने फैमिली सेंटर प्लेटफॉर्म को अपडेट करके पेरेंटल सुपरविजन टूल बनाया है। इससे पेरेंट्स को यह समझने में मदद मिलेगी कि उनके बच्चे इंस्टाग्राम, फेसबुक, मेसेंजर और मेटा AI पर किस तरह का कंटेंट देखते हैं और किन विषयों में रुचि ले रहे हैं।
ग्राफिक में देखिए ‘पेरेंटल सुपरविजन टूल’ के क्या फायदे हैं-
सवाल- यह टूल किस उम्र के बच्चों/टीन्स के लिए है?
जवाब- यह टूल मुख्य रूप से 13-17 साल (टीनएजर्स) की उम्र के बच्चों की ऑनलाइन सेफ्टी के लिए बनाया गया है।
सवाल- यह टूल कैसे काम करेगा?
जवाब- फेसबुक और इंस्टाग्राम में एक टूल होता है, फैमिली सेंटर। इसके जरिए पेरेंट्स अपने बच्चे के मेटा अकाउंट्स पर नजर रख सकते हैं। इसमें ही ‘पेरेंटल सुपरविजन टूल’ ऐड किया गया है।
इसमें पेंरेट्स और 13-17 साल के बच्चों के अकाउंट्स को ऐड करना होगा। इसके बाद पेरेंट्स बच्चों की ऑनलाइन एक्टिविटीज की निगरानी कर सकते हैं।
यह टूल कैसे काम करेगा?
1. सुपरविजन सेटअप
- ‘फैमिली सेंटर’ से बच्चे को इनवाइट भेजा जाएगा।
- इनवाइट एक्सेप्ट करते ही दोनों अकाउंट्स लिंक हो जाएंगे।
2. इंटरेस्ट की जानकारी
- बच्चे की फीड पर किस तरह का कंटेंट आ रहा है, देखा जा सकेगा।
- उसके ऑनलाइन इंटरेस्ट को समझने में मदद मिलेगी।
3. सेफ्टी सेटिंग्स की निगरानी
- प्राइवेसी और कंटेंट कंट्रोल सेटिंग्स पर नजर रखी जा सकेगी।
- सेटिंग में हुए महत्वपूर्ण बदलाव की जानकारी मिलेगी।
4. स्क्रीन-टाइम मैनेजमेंट
- सोशल मीडिया टाइम स्पेंट देखा जा सकेगा।
- टाइम-लिमिट कंट्रोल की जा सकेगी।
5. इंटीग्रेटेड मॉनिटरिंग
- इंस्टाग्राम, फेसबुक और मेसेंजर का सुपरविजन एक ही डैशबोर्ड से होगा।
- सभी मेटा सर्विस का मैनेजमेंट आसान होगा।
सवाल- इस टूल से पेरेंट्स बच्चे की किन एक्टिविटीज पर नजर रख पाएंगे?
जवाब- पेरेंट्स बच्चे की किन एक्टिविटीज पर नजर रख सकेंगे, ग्राफिक में देखिए-
सवाल- पेरेंट्स इस टूल के जरिए क्या कंट्रोल कर पाएंगे? जवाब- पेरेंट्स इस टूल के जरिए बच्चे की कुछ एक्टिविटीज को मॉनिटर और कंट्रोल कर पाएंगे-
- मेटा एप इस्तेमाल के लिए टाइम-लिमिट तय करना।
- देर रात एप इस्तेमाल पर रोक (स्लीप मोड) लगाना।
- प्राइवेसी और सेफ्टी सेटिंग्स को मैनेज करना।
- मैसेज और कॉन्टैक्ट से जुड़ी सेफ्टी सेटिंग्स कंट्रोल करना।
- कुछ फीचर्स के इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगाना।
- सिक्योरिटी सेटिंग्स में बदलाव के लिए मंजूरी/निगरानी रखना।
सवाल- ये टूल फोन में कैसे एक्टिव होगा?
जवाब- इसका पूरा प्रोसेस ग्राफिक में देखिए-
सवाल- क्या इस टूल को बच्चे के फोन में एक्टिव करने के लिए बच्चे का अप्रूवल जरूरी है?
जवाब- यह टूल जिस उम्र के बच्चों के लिए डेवलप किया गया है, वे टीनएजर्स हैं। इस उम्र में बच्चों को डिसीजन मेकिंग की समझ नहीं होती है। इसलिए पेरेंट्स का सुपरविजन जरूरी है। हालांकि, इसके लिए बच्चे का कंसेंट भी जरूरी है। इससे बच्चे और पेरेंट्स के बीच अंडरस्टैंडिंग अच्छी रहती है।
सवाल- क्या इस टूल से बच्चे की प्राइवेसी सुरक्षित रहेगी?
जवाब- मेटा के मुताबिक, यह फीचर सेफ्टी और गाइडेंस के लिए है। इसमें पेरेंट्स बच्चे की एक्टिविटीज, स्क्रीन टाइम और सेफ्टी सेटिंग्स की जानकारी देख सकेंगे, लेकिन निजी मैसेज, पासवर्ड और संवेदनशील डेटा तक उनकी सीधी पहुंच नहीं होगी।
सवाल- पेरेंट्स बच्चे के फोन पर क्या नहीं देख सकेंगे?
जवाब- पेरेंट्स बच्चे के फोन पर ये जानकारी एक्सेस नहीं कर पाएंगे-
- मैसेज, चैट्स
- फोटो, वीडियो या वॉइस नोट्स
- अकाउंट का पासवर्ड
- सर्च हिस्ट्री की जानकारी
- गैलरी, कॉन्टैक्ट्स या फाइल्स
- लोकेशन ट्रैकिंग
सवाल- मेटा ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर ये नया फीचर क्यों जोड़ा है?
जवाब- मेटा ने इन वजहों से फीचर जोड़ा है-
- बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा बढ़ाने के लिए।
- पेरेंट्स को बच्चों की सोशल मीडिया एक्टिविटी समझने में मदद के लिए।
- सेंसिटिव और हार्मफुल कंटेंट से बचाने के लिए।
- स्क्रीन टाइम पर कंट्रोल रखने के लिए।
- अनजान लोगों के संपर्क और साइबरबुलिंग जैसे जोखिम कम करने के लिए।
- पेरेंट्स को बच्चों की डिजिटल हैबिट्स की जानकारी देने के लिए।
- सोशल मीडिया टीन्स के खातिर ज्यादा सुरक्षित बनाने के लिए।
मेटा के नए फीचर से जुड़े जरूरी सवाल-जवाब
सवाल- क्या इस टूल के लिए बच्चे का कंसेंट जरूरी होगा?
जवाब- हां, कई मामलों में सुपरविजन शुरू करने के लिए बच्चे की सहमति जरूरी है। मेटा का उद्देश्य निगरानी और प्राइवेसी के बीच संतुलन बनाना है, इसलिए कंसेंट की प्रक्रिया रखी गई है।
सवाल- क्या बच्चा चाहे तो ‘पेरेंटल कंट्रोल टूल’ को बंद कर सकता है?
जवाब- यह उम्र और सेटिंग्स पर निर्भर करता है। कुछ मामलों में टीनएजर्स सुपरविजन बंद करने की रिक्वेस्ट कर सकते हैं। लेकिन इसके लिए पेरेंट्स का अप्रूवल लेना होगा।
सवाल- क्या भारत में यह फीचर उपलब्ध हो गया है?
जवाब- हां, भारत में भारत में यह फीचर उपलब्ध है।
सवाल- क्या यह फीचर Android और iPhone दोनों में काम करेगा?
जवाब- हां, पेरेंटल सुपरविजन फीचर एंड्रॉयड और आईफोन दोनों पर उपलब्ध मेटा एप्स के साथ काम करता है। इसके लिए एप का अपडेटेड वर्जन जरूरी है।
सवाल- अगर बच्चा अपना अलग अकाउंट बना ले तो क्या होगा?
जवाब- नया अकाउंट पेरेंटल सुपरविजन से अपने-आप नहीं जुड़ेगा। हालांकि मेटा संदिग्ध या एक्स्ट्रा अकाउंट्स की पहचान के लिए एज वेरिफिकेशन करता है।
सवाल- अगर बच्चा अपनी उम्र गलत दर्ज करे तो क्या होगा?
जवाब- मेटा एज वेरिफाई करने के लिए कई टेक्नीक्स इस्तेमाल करता है। गलत उम्र मिलने पर अकाउंट की सेटिंग्स बदली जा सकती हैं या एक्स्ट्रा वेरिफिकेशन मांगा जा सकता है।
सवाल- क्या यह फीचर वॉट्सएप पर भी अवेलेबल है?
जवाब- नहीं, फिलहाल मेटा का पेरेंटल सुपरविजन सिस्टम मुख्य रूप से इंस्टाग्राम, फेसबुक और मेसेंजर पर बेस्ड है।
सवाल- क्या यह फीचर 18 साल से ज्यादा उम्र के यूजर्स पर भी लागू होगा?
जवाब- नहीं, यह फीचर मुख्य रूप से 13-17 वर्ष के किशोरों के लिए बनाया गया है।
सवाल- क्या पेरेंट्स बच्चे के फोन पर टाइम लिमिट तय कर सकते हैं?
जवाब- हां, पेरेंट्स एप इस्तेमाल की टाइम-लिमिट तय कर सकते हैं। इससे बच्चे के सोशल मीडिया उपयोग को कंट्रोल करने और हेल्दी डिजिटल हैबिट्स डेवलप करने में मदद मिलती है।
सवाल- क्या अब स्क्रीन टाइम फीचर और स्ट्रॉन्ग हो जाएगा?
जवाब- हां, नए अपडेट के बाद पेरेंट्स को स्क्रीन टाइम की ज्यादा स्पष्ट जानकारी मिलेगी। कई मेटा एप्स का इस्तेमाल एक ही डैशबोर्ड से ट्रैक और मैनेज किया जा सकेगा।













