बीकानेर नगर सीमा विस्तार: वृंदावन-एनक्लेव, वाटिका-एनक्लेव और सागर-सेतु कॉलोनियों को शामिल करने की मांग तेज
बीकानेर। बीकानेर नगर निगम क्षेत्र की प्रस्तावित सीमा वृद्धि को लेकर नगरवासियों में लगातार चर्चा बनी हुई है। इसी क्रम में वृंदावन-एनक्लेव, वाटिका-एनक्लेव और सागर-सेतु कॉलोनियों के निवासियों ने प्रशासन से अपील की है कि इन कॉलोनियों को भी प्रस्तावित सीमा विस्तार में शामिल किया जाए। स्थानीय निवासियों और सामाजिक संगठनों का कहना है कि यह क्षेत्र पूर्ण रूप से विकसित हैं और इनकी नगरीय सुविधाओं की उपलब्धता को देखते हुए इन्हें नगर निगम क्षेत्र का हिस्सा बनाया जाना चाहिए।
प्रशासनिक सिफारिशों के बावजूद उपेक्षा?
गौरतलब है कि बीकानेर जिला प्रशासन द्वारा वर्ष 2019 में नगर सीमा विस्तार के लिए गठित समिति ने अपनी रिपोर्ट में इन कॉलोनियों को नगरीय सीमा में शामिल करने की अनुशंसा की थी। तत्कालीन जिला कलेक्टर के आदेश संख्या 13533, दिनांक 30 अगस्त 2019 के तहत गठित इस समिति में उपनिदेशक, आर्थिक एवं सांख्यिकी विभाग, तहसीलदार, नगर नियोजन अधिकारी, विकास अधिकारी, पंचायत समिति बीकानेर सहित अन्य प्रशासनिक अधिकारी शामिल थे। समिति द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट में यह स्पष्ट किया गया था कि वृंदावन-एनक्लेव, वाटिका-एनक्लेव और सागर-सेतु को नगर निगम क्षेत्र में शामिल किया जाना न्यायसंगत होगा।
इसके अलावा, ग्राम पंचायत उदासर द्वारा भी 1 अक्टूबर 2019 को भेजे गए पत्र क्रमांक SPL 01 में इन कॉलोनियों को नगर निगम सीमा में शामिल करने की सिफारिश की गई थी। पंचायत समिति बीकानेर के विकास अधिकारी की रिपोर्ट (क्रमांक 587, दिनांक 1 अक्टूबर 2019) में यह स्पष्ट किया गया था कि चूंकि इन कॉलोनियों से प्राप्त राजस्व नगर विकास न्यास (यूआईटी) को जाता है, इसलिए इन्हें नगरीय सीमा में शामिल किया जाना चाहिए।
निवासियों की प्रमुख मांगें
वृंदावन-एनक्लेव, वाटिका-एनक्लेव और सागर-सेतु कॉलोनियों के निवासियों का कहना है कि यह क्षेत्र पिछले 15-20 वर्षों से विकसित हैं और इनमें बिजली, पानी, सड़क, विद्यालय, चिकित्सालय, बी.एड. कॉलेज, पुनर्वास केंद्र और उद्यान जैसी सुविधाएं पहले से ही उपलब्ध हैं। ऐसे में इन्हें नगरीय सीमा में शामिल करने से सरकार पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ भी नहीं पड़ेगा।
स्थानीय निवासियों का यह भी कहना है कि वर्तमान में इस क्षेत्र में लगभग 2500 परिवार रहते हैं, जिनकी कुल जनसंख्या 8,000 से 10,000 के बीच है। इसके अलावा, यहां लगभग 10,000 भूखंड विकसित किए गए हैं, जिनमें आगामी वर्षों में हजारों मकान बनने की संभावना है।
नगर विकास न्यास को मिल रहा है राजस्व, फिर भी उपेक्षा क्यों?
निवासियों का एक प्रमुख तर्क यह भी है कि इन क्षेत्रों में भूमि खरीदने से लेकर भवन निर्माण तक की समस्त स्वीकृतियां नगर विकास न्यास (यूआईटी) जारी करता है। साथ ही, ये कॉलोनियां निकट भविष्य में न्यास को हस्तांतरित होने वाली हैं। इस स्थिति में, इन क्षेत्रों को नगर निगम में शामिल न किया जाना असमानता पूर्ण है।
इन कॉलोनियों के निवासी वर्तमान में नगरीय सीमा में शामिल न होने के कारण निवास प्रमाण पत्र जैसी मूलभूत सुविधाओं से भी वंचित हैं। चूंकि नगर निगम क्षेत्र में शामिल होने के बाद ही कई सरकारी योजनाओं का लाभ लिया जा सकता है, ऐसे में इस क्षेत्र के लोगों को नगरीय क्षेत्र में शामिल न किए जाने से कई प्रकार की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
सामाजिक संगठनों और जनप्रतिनिधियों की भी मांग
स्थानीय सामाजिक संगठनों और जनप्रतिनिधियों ने भी इन क्षेत्रों को नगर सीमा में शामिल करने के पक्ष में आवाज उठाई है। उनका कहना है कि यदि राज्य सरकार भविष्य के 20 वर्षों को ध्यान में रखते हुए नगर सीमा का विस्तार कर रही है, तो इन विकसित क्षेत्रों को नगर निगम से बाहर रखना तर्कसंगत नहीं है।
प्रशासन से शीघ्र निर्णय की अपील
निवासियों और सामाजिक संगठनों ने जिला प्रशासन से अनुरोध किया है कि ग्राम पंचायत की रिपोर्ट और प्रशासनिक सिफारिशों को ध्यान में रखते हुए वृंदावन-एनक्लेव, वाटिका-एनक्लेव और सागर-सेतु कॉलोनियों को नगर निगम क्षेत्र में शामिल किया जाए।
नगर विकास न्यास, नगर निगम और जिला प्रशासन की ओर से इस संबंध में अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन बढ़ते जनदबाव को देखते हुए यह मुद्दा शीघ्र ही नगर निगम और राज्य सरकार के स्तर पर विचाराधीन आ सकता है। अब देखना होगा कि प्रशासन इस मांग को कब और कैसे पूरा करता है।












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