प्रसूताओं की किडनी फेल मामले में डॉक्टर्स को क्लीन चिट!:जांच टीम ने इलाज में लापरवाही नहीं मानी; ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन का रिकॉर्ड लिया

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प्रसूताओं की किडनी फेल मामले में डॉक्टर्स को क्लीन चिट!:जांच टीम ने इलाज में लापरवाही नहीं मानी; ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन का रिकॉर्ड लिया

बीकानेर

बीकानेर के प्रिंस बिजय सिंह मेमोरियल (पीबीएम) सरकारी हॉस्पिटल में 5 प्रसूताओं की किडनी फेल होने के मामले में डॉक्टर्स को क्लीन चिट देने की तैयारी है। जोधपुर से मंगलवार को बीकानेर पहुंची 6 डॉक्टर्स की टीम ने अपनी जांच पूरी कर ली है।

जांच टीम ने इलाज में डॉक्टर्स की लापरवाही नहीं मानी है। टीम ने वार्ड में भर्ती प्रसूताओं से बातचीत की। साथ ही उनको अब तक दिए ट्रीटमेंट के बारे में भी जानकारी ली। इसके अलावा ओटी, आईसीयू और वार्ड का भी निरीक्षण किया।

पीबीएम हॉस्पिटल के सुपरिटेंडेंट डॉ. बीसी घीया ने बताया कि जांच टीम अपनी रिपोर्ट राज्य सरकार को सौपेंगी। टीम के सभी सदस्यों ने पीबीएम हॉस्पिटल में प्रसूताओं के इलाज और डिलीवरी की प्रक्रिया को सही माना है। इसमें कहीं भी लापरवाही सामने नहीं आई है।

जबकि प्रसूताओं को लगाए गए इंजेक्शन की जांच ड्रग कंट्रोलर विभाग कर रहा है, जिसकी रिपोर्ट करीब 5 दिन में आने की संभावना है।

तस्वीर पीबीएम हॉस्पिटल में भर्ती प्रसूताओं के वार्ड की है। सुपरिटेंडेंट का कहना है कि अब महिलाओं की हालत में सुधार है।

तस्वीर पीबीएम हॉस्पिटल में भर्ती प्रसूताओं के वार्ड की है। सुपरिटेंडेंट का कहना है कि अब महिलाओं की हालत में सुधार है।

80 तरह की दवाइयों की नहीं हो रही सप्लाई हॉस्पिटल के सीनियर डॉक्टर्स के अनुसार, पीबीएम हॉस्पिटल सहित बीकानेर जिले के सभी पीएचसी, सीएचसी और सेटेलाइट हॉस्पिटल में मुख्यमंत्री निशुल्क योजना के तहत होने वाली 80 तरह की दवाइयों की सप्लाई नहीं हो पा रही है। इसके कारण जरूरत पड़ने पर ये सभी दवाइयां हॉस्पिटल प्रशासन अपने स्तर पर खरीद रहे हैं। यही हालात ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन में भी सामने आए हैं।

तीन से चार गुना महंगे दामों पर हुई खरीद सीनियर डॉक्टर्स के अनुसार, बीते 6 महीनों में करीब 25 हजार ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन के वॉयल लोकल स्तर पर खरीदे गए। सरकारी खरीद में ये इंजेक्शन चार से पांच रुपए प्रति इंजेक्शन की दर से खरीदे जाते हैं।

जबकि बाजार से इन्हें करीब 18 रुपए में खरीदा गया है, जो सरकारी खरीद की दर से तीन से चार गुना महंगी है। इन इंजेक्शन के वॉयल के बैच की टेस्टिंग को लेकर भी अब जांच की जा रही है और निर्माता कंपनी से पूरी तथ्यात्मक जानकारी मांगी गई है।

पीबीएम हॉस्पिटल के सुपरिटेंडेंट डॉ. बीसी घीया का कहना है कि जांच टीम को हमारे हॉस्पिटल में किसी प्रकार की लापरवाही नहीं मिली है।

पीबीएम हॉस्पिटल के सुपरिटेंडेंट डॉ. बीसी घीया का कहना है कि जांच टीम को हमारे हॉस्पिटल में किसी प्रकार की लापरवाही नहीं मिली है।

प्रसूताओं की हालत में सुधार, एक अभी भी गंभीर डॉ. घीया के अनुसार, PBM में भर्ती सभी 5 महिलाओं की स्थिति में धीरे-धीरे सुधार हो रहा है। कुछ महिलाओं को यूरिनल इश्यूज हुए थे, लेकिन अब उनकी तबीयत में सुधार है। सिर्फ प्रीति नाम की मरीज की हालत अभी तक गंभीर है, जिसकी प्रॉपर मॉनिटरिंग की जा रही है और हर ट्रीटमेंट दिया जा रहा है। जांच टीम ने सैंपल भी कलेक्ट किए है, उनकी रिपोर्ट का इंतजार है। हॉस्पिटल प्रशासन की ओर से अभी तक लापरवाही सामने नहीं आई है।

जांच टीम ने कलेक्ट किए सैंपल्स, जयपुर भेजेंगे रिपोर्ट मामले की जांच के लिए जोधपुर से 6 डॉक्टर्स की टीम बीकानेर भेजी गई थी। इनमें माइक्रोबॉयलॉजिस्ट, फिजिशियन, नेफ्रॉलॉजिस्ट, पीएसम और गायनी डॉक्टर शामिल थे। इस टीम ने पोस्ट कोविड आईसीयू में पहुंचकर प्रसूताओं से बातचीत की।

इसके साथ ही अब तक दिए गए इलाज के बारे में जानकारी ली। साथ ही प्रसूताओं को जो इंजेक्शन दिए गए थे, उनकी रिपोर्ट भी हॉस्पिटल मैनेजमेंट से ली है। हालांकि टीम बुधवार को ही जांच पूरी कर जोधपुर लौट गई।

तस्वीर पीबीएम हॉस्पिटल की है, जहां 5 प्रसूताओं की किडनी फेल हो गई।

तस्वीर पीबीएम हॉस्पिटल की है, जहां 5 प्रसूताओं की किडनी फेल हो गई।

अब 3 पॉइंट्स में समझिए… पूरा मामला

  • 5 महिलाओं की किडनी फेल हुई: PBM हॉस्पिटल में सिजेरियन डिलीवरी के बाद एक-एक कर 5 महिलाओं की किडनी फेल हो गई थी। हालात इतने बिगड़े कि प्रसूताओं की कई बार डायलिसिस की गई। सभी को ICU में शिफ्ट किया गया है। इनमें तारा देवी (27), शारदा (26), राहिला (19) और इमरती (20) की हालत में सुधार है, जबकि प्रीति (20) की हालत अभी भी गंभीर है।
  • 2 जांच टीमें बनाई गई: हॉस्पिटल सुपरिटेंडेंट के अनुसार, सिजेरियन डिलीवरी के बाद प्रसूताओं को बाजार से मंगवाए ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन लगाए थे। इसके बाद ही महिलाओं की तबीयत बिगड़ती गई। मामले में राज्य सरकार के स्तर पर 2 जांच कमेटी भी बनाई गई है, जिसमें जोधपुर मेडिकल कॉलेज की टीम पीबीएम हॉस्पिटल में जांच कर बुधवार को लौट गई। वहीं ड्रग कंट्रोलर की कमेटी फिलहाल जांच कर रही है।
  • जांच रिपोर्ट पर सरकार लेगी अंतिम फैसला: मामले में पीबीएम हॉस्पिटल के सुपरिटेंडेंट का दावा है कि डॉक्टर्स व स्टाफ की तरफ से मामले में लापरवाही नहीं बरती गई और प्रसूताओं को प्रोपर इलाज दिया गया। हालांकि अंतिम फैसला दोनों जांच टीमों की फाइनल रिपोर्ट के बाद ही सरकार के स्तर पर अंतिम फैसला आने की संभावना है, जिसमें 4 से 5 दिनों का समय लग सकता है।
मामले को लेकर कांग्रेसी नेताओं ने बुधवार को पीबीएम हॉस्पिटल परिसर में प्रदर्शन किया और हॉस्पिटल अधीक्षक से मुलाकात कर मामले की जांच की मांग की।

मामले को लेकर कांग्रेसी नेताओं ने बुधवार को पीबीएम हॉस्पिटल परिसर में प्रदर्शन किया और हॉस्पिटल अधीक्षक से मुलाकात कर मामले की जांच की मांग की।

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