अभिजीत दीपके ने दिल्ली के लिए उड़ान भरी; कॉकरोच जनता पार्टी का अब क्या होने वाला है, 9 सवालों में पूरी कहानी
कॉकरोच जनता पार्टी के फाउंडर अभिजीत दीपके अमेरिका से उड़ान भर चुके हैं। उन्होंने X पर लिखा- भारत के लिए निकल गया हूं। मैं अपना भविष्य संविधान के हाथों में छोड़ता हूं। जय भीम।
20 दिन पहले चीफ जस्टिस के बयान से पैदा हुआ एक व्यंगात्मक ऑनलाइन कैंपेन, जिसने कुछ घंटों में बीजेपी से ज्यादा इंस्टाग्राम फॉलोअर्स जुटा लिए। अब इंटरनेट से निकलकर सड़क पर उतरने जा रहा है।
आगे क्या होगा, जमीन पर कुछ कर पाएंगे या सरकार कैम्पेन कुचल देगी; लोगों के मन में उठ रहे 9 जरूरी सवालों के जवाब
सवाल-1: क्या वाकई इंटरनेट से निकल सड़क पर उतरने वाले हैं कॉकरोच?
जवाबः हां। कॉकरोच जनता पार्टी के फाउंडर अभिजीत दीपके ने 1 जून को एक वीडियो में बताया, ‘6 जून की सुबह मैं दिल्ली आ रहा हूं, शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग करने। आप सभी एयरपोर्ट आकर मुझसे मिलें। हम सब मिलकर पार्लियामेंट स्ट्रीट पुलिस स्टेशन जाएंगे और जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन की अनुमति मांगेंगे।’
3 जून को कॉकरोच पार्टी ने दिल्ली में अपनी पहली प्रेस कॉन्फ्रेंस की, जिसमें खोजी पत्रकार सौरव दास, IIT कानपुर से पढ़े और मैनेजमेंट कंसल्टिंग फर्म ‘मैकिन्से एंड कंपनी’ में काम कर चुके आशुतोष रांका, पॉलिटिकल रिसर्चर और फिल्ममेकर विजेता दहिया पार्टी के प्रवक्ता के तौर पर शामिल हुए।
4 जून को अभिजीत ने X पर एक और वीडियो जारी करते हुए समर्थकों को एयरपोर्ट आने से मना किया। दीपके ने कहा, ‘मैं खुद पुलिस स्टेशन आऊंगा और फिर हम सब वहां से जंतर-मंतर के लिए बढ़ेंगे, क्योंकि इतने लोगों के एयरपोर्ट पर इकट्ठा होने से जनता और सुरक्षा बलों को असुविधा होगी।’

कॉकरोच जनता पार्टी ने 6 जून को दिल्ली के जंतर-मंतर पर होने वाले प्रदर्शन के लिए गाइडलाइन जारी की है। फोटो – X
सवाल-2: ये लोग सड़क पर उतरकर चाहते क्या हैं?
जवाबः कॉकरोच पार्टी की सबसे बड़ी मांग है केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा।
दीपके ने X पर जारी वीडियो में कहा, ‘NEET का एग्जाम रद्द होने से 5 स्टूडेंट्स ने सुसाइड किया। CBSE, CUET और SSC जैसे एग्जाम में गड़बड़ी से लाखों बच्चे प्रभावित हुए। इसे लेकर देश के अलग-अलग शहरों में आंदोलन हुए, फिर भी प्रधान ने इस्तीफा नहीं दिया। इस देश में सरकार की जवाबदेही नहीं रह गई है। ऐसा कब तक चलेगा?’
CJP मुख्य प्रवक्ता सौरव दास का भी कहना है कि प्रधान के इस्तीफे के लिए वेबसाइट पर डाली गई पिटीशन का अब तक 8 लाख से ज्यादा लोग समर्थन कर चुके हैं, जो साबित करते हैं कि स्टूडेंट्स का गुस्सा अब बर्दाश्त के बाहर हो चुका है।

कॉकरोच जनता पार्टी के X अकाउंट पर 3 जून को पोस्ट किया गया कार्टून। इसके कैप्शन में लिखा है, ‘आप शिक्षा मंत्री के प्रदर्शन को किस आधार पर आंकेंगे?’
सवाल-3: क्या दिल्ली में प्रोटेस्ट करने की अनुमति मिलेगी?
जवाबः अनुमति मिलने की उम्मीद कम है।
संविधान के आर्टिकल 19 के तहत, ‘सभी नागरिकों को शांतिपूर्ण और बिना किसी हथियार के इकट्ठा होने का अधिकार है।’ दिल्ली का जंतर-मंतर प्रदर्शन की नियत जगह है। हालांकि कानूनी अव्यवस्था न हो, इसके लिए पुलिस से 7 दिन पहले लिखित परमिशन लेनी पड़ती है।
दिल्ली पुलिस की गाइडलाइंस के मुताबिक, जंतर-मंतर पर प्रोटेस्ट सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे के बीच ही होना चाहिए। अस्थायी तंबू नहीं लगाए जा सकते। एक दिन में 1,000 से ज्यादा लोग हिस्सा नहीं ले सकते।’
जबकि CJP की तरफ से अभिजीत 6 जून को प्रोटेस्ट के दिन ही पुलिस से इसकी अनुमति लेने जाएंगे। प्रोटेस्ट में काफी भीड़ होने का अनुमान है।
प्रवक्ता विजेता दहिया ने परमिशन न लेने को पार्टी की स्ट्रैटेजी का हिस्सा बताया। उन्होंने कहा, ‘इस शांतिपूर्ण प्रोटेस्ट के पीछे लोगों की भावनाएं हैं। लोग अभिजीत के साथ जुड़े हैं। इसीलिए हमने तय किया कि अभिजीत खुद पुलिस से मिलकर परमिशन मांगेंगे। हमें उम्मीद है कि प्रशासन हमें अनुमति देगा।’
अगर अभिजीत और उनके साथ जुटे लोग बिना परमिशन प्रोटेस्ट कोशिश करते हैं, तो उन्हें हिरासत में लिया जा सकता है। अगर प्रशासन को अव्यवस्था फैलने के संकेत मिलते हैं, तो वो प्रोटेस्ट वाली जगह पर BNSS की धारा 163 लागू कर सकता है। पुरानी CrPC में इसे धारा 144 कहते थे।
इसके तहत पुलिस 5 या लोगों को इकठ्ठा होने पर रोक लगा सकती है। ये रोक 60 दिन तक लागू रह सकती है।
सुप्रीम कोर्ट ने एक मामले में कहा था कि बड़े विरोध प्रदर्शनों में खुफिया इनपुट्स के आधार पर भी इस तरह के आदेश दे सकती है और इसमें कुछ भी गैरकानूनी नहीं है।
सवाल-4: क्या राजनीतिक पार्टी बनाने का भी इरादा है, उसके लिए क्या-क्या करना होगा?
जवाबः अभिजीत ने शुरुआत में कहा था कि उनका कोई राजनीतिक पार्टी बनाने का इरादा नहीं है। हालांकि अब जिस तरह जमीन पर प्रदर्शन की तैयारी है, प्रवक्ता नियुक्त किए गए, प्रेस कॉन्फ्रेंस हो रही और जाने-माने लोग जुड़ रहे हैं, उससे राजनीतिक पार्टी के संकेत मिलते हैं।
राजनीतिक पार्टी बनाने के लिए रिप्रेजेंटेशन ऑफ पीपुल एक्ट, 1951 की धारा 29 (A) के तहत पार्टी बनाने के ऐलान से 30 दिनों के अंदर चुनाव आयोग में आवेदन देना होता है। पार्टी में कम से कम 100 भारतीय मेंबर होने चाहिए। पार्टी का संविधान, संगठन बनाने की प्रक्रिया, पद पाने वाले लोगों के कार्यकाल वगैरह के बारे में भी बताना होता है।
एक पेच ये भी है कि हरियाणा में पानीपत के रहने वाले वकील सुधीर जाखर ने खुद को CJP का राष्ट्रीय संयोजक बताते हुए 25 मई को इसे पार्टी के तौर पर रजिस्टर करने के लिए चुनाव आयोग में अप्लाई किया था।
उन्होंने इसकी वजह बताते हुए कहा था, ‘जब दीपके ने भारत आने से इनकार किया, तो हमें लगा कि कोई और इसका रजिस्ट्रेशन करवाकर दुरुपयोग करता है, इससे पूरा आंदोलन बेकार हो जाएगा। इसलिए हमने खुद इसका निर्णय लिया।’ हालांकि इस पर अभिजीत का कोई बयान नहीं आया है।

3 जून को दिल्ली में CJP ने पहली प्रेस कॉन्फ्रेंस की, जिसे पार्टी के प्रवक्ता फिल्ममेकर विजेता दाहिया, खोजी पत्रकार सौरव दास और IIT कानपुर के पूर्व छात्र आशुतोष रांका ने होस्ट किया।
सवाल-5: राजनीतिक पार्टी बन गई, तो क्या चुनाव निशान ‘कॉकरोच’ मिलेगा?
जवाबः फिलहाल कॉकरोच चुनाव निशान किसी को नहीं मिल सकता।
दरअसल, चुनाव आयोग के इलेक्शन सिंबल रिजर्वेशन एंड अलॉटमेंट ऑर्डर, 1968 के तहत नई रजिस्टर्ड पार्टियों को ‘फ्री सिंबल लिस्ट’ से चुनाव निशान मिलता है। इसमें लैंडलाइन फोन, लैपटॉप, टीवी, ताला-चाबी, फूलगोभी, साबुनदानी और स्टेपलर जैसे 200 से ज्यादा सिंबल हैं।
1991 से चुनाव आयोग ने पक्षी या जानवरों से जुड़े सिंबल देने बंद कर दिए हैं। कॉकरोच को कीट की श्रेणी में रखा जाता है। इसके बारे में कोई जानकारी नहीं है कि इसे आधिकारिक तौर पर जानवरों में रखा जाएगा या नहीं।
CJP ने अपने सिंबल में मोबाइल फोन की स्क्रीन के अंदर एक कोचरोच दिखाया था। अगर वे मोबाइल फोन का सिंबल मांगते हैं, तो भी मुश्किल है, क्योंकि मोबाइल फोन ‘फ्री सिंबल’ की लिस्ट में नहीं है।
सवाल-6: क्या अभिजीत दीपके ही इसके प्रेसिडेंट बनेंगे, उनकी कहानी क्या है?
जवाबः अभी तक CJP का चेहरा अभिजीत दीपके हैं। उनके भारत आने को लेकर हो रही तैयारियां और CJP की प्रेस कॉन्फ्रेंस से ये साफ है कि आगे भी अभिजीत ही मुख्य भूमिका में होंगे।
30 साल के अभिजीत महाराष्ट्र के संभाजी नगर के रहने वाले डिजिटल मीडिया स्ट्रैटेजिस्ट हैं। अभिजीत ने पुणे से पत्रकारिता की पढ़ाई की है। फिलहाल, अमेरिका की बॉस्टन यूनिवर्सिटी में पब्लिक रिलेशंस से मास्टर्स की पढ़ाई कर रहे हैं।
अभिजीत 2020 से 2022 तक आम आदमी पार्टी के सोशल मीडिया स्ट्रैटेजिस्ट रहे हैं। 2020 के दिल्ली विधानसभा चुनावों में अभिजीत AAP के लिए वायरल मीम बेस्ड ऑनलाइन प्रचार का मटेरियल बनाते थे।
अभिजीत AAP के IT सेल के चीफ अंकित लाल को रिपोर्ट करते थे। एक इंटरव्यू में अभिजीत ने बताया कि उन्होंने निजी जिंदगी और आर्थिक स्थिरता के लिए AAP छोड़कर बोस्टन यूनिवर्सिटी में अप्लाई किया था। एडमिशन मिल गया, तो वे अमेरिका शिफ्ट हो गए।
किसान आंदोलन से लेकर महंगाई जैसे राजनीतिक मुद्दों पर अभिजीत X अकाउंट पर केंद्र सरकार और पीएम पर निशाना साधते रहे हैं।

आम आदमी पार्टी के नेता मनीष सिसोदिया के साथ CJP फाउंडर अभीजीत दीपके। ये तस्वीर अभीजीत ने अगस्त 2024 मास्टर्स की पढ़ाई के लिए बॉस्टन जाने से पहले शेयर की थी। फोटो – X
सवाल-7: जेन-जी के अलावा CJP से कौन-से बड़े चेहरे जुड़े, कहीं से फंडिंग भी मिल रही?
जवाबः 6 जून को CJP के प्रोटेस्ट में कई बड़ी हस्तियां शामिल होंगी…
सोनम वांगचुक, शिक्षाविद: वांगचुक ने 2 जून को X पर वीडियो जारी करके कहा, ‘मैं CJP के आंदोलन से जुड़ने आ रहा हूं। CJP वाले देशप्रेमी लोग हैं, आप भी उनके साथ जुड़ना चाहिए।’

शिक्षाविद सोमन वांगचुक ने 4 जून को वीडियो जारी करते हुए CJP समर्थकों से पुलिसकर्मियों को देने के लिए फूल लाने को कहा। सोर्स – X
प्रकाश राज, फिल्म अभिनेता: अभिनेता प्रकाश राज ने X पर लिखा, ‘मैं शूटिंग के लिए फिलहाल दिल्ली से बहुत दूर हूं, लेकिन फिर भी मैं CJP के आंदोलन में पहुंचे की पूरी कोशिश करूंगा।’
अमित जोगी, जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ अध्यक्ष: छत्तीसगढ़ के पहले CM अजीत जोगी के बेटे और JCC अध्यक्ष अमित जोगी ने कहा, ‘छत्तीसगढ़ में कॉकरोच को झेंगुरा कहते हैं और जंतर-मंतर पर झेंगुरा पहुंच रहा है। हम CJP को समर्थन देने वालीं देश की पहली पार्टी बनेंगे।’
इसके अलावा एक्टर अतुल कुलकर्णी, दिल्ली यूनिवर्सिटी स्टूडेंट यूनियन के पूर्व अध्यक्ष रौनक खत्री, स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया यानी SFI की अध्यक्ष आइशे घोष भी प्रोटेस्ट में शामिल होंगी।
अभी तक CJP की फंडिंग के कोई सोर्स का भी कोई पुख्ता सबूत नहीं है। 3 जून को प्रवक्ता सौरव दास ने कहा, ‘हमें फंडिंग की जरूरत क्यों पड़ेगी? हमारे पीछे जो पार्टी का पोस्टर लगा है, वो 200 रुपए का है, लोग प्रोटेस्ट में अपने खर्चे पर आ सकते हैं। ये नैरेटिव आंदोलन को भटकाने के लिए खड़ा किया जा रहा है।’
CJP की ऑफिशियल वेबसाइट के मुताबिक, ‘पार्टी पूरी तरह कम्युनिटी फंडिंग यानी आंदोलन से जुड़े लोगों से मिले पैसों पर काम करती है। किसी राजनीतिक संगठन या प्राइवेट कंपनी से डोनेशन नहीं लेगी।’
सवाल-8: कॉकरोच पार्टी को लेकर सरकार का रुख क्या है?
जवाबः अभिजीत और उनकी CJP पर आरोप हैं कि उनके पीछे एंटी नेशनल ताकतें और विदेशी फंडिंग है। भारतीय खुफिया एजेंसी IB ने CJP के पहले X हैंडल को ब्लॉक करने का इनपुट दिया था।
इसमें कहा गया, ‘हैंडल का भड़काऊ कॉन्टेंट देश के युवाओं के बीच फैल रहा था। इससे देश की नेशनल सिक्योरिटी को खतरा हो सकता था।’ इसके बाद सरकार ने X को भारत में CJP के हैंडल पर रोक लगाने का निर्देश दिया था।
22 मई को बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने X पर लिखा था, ‘अभिजीत को बोस्टन जाने के लिए किसने पैसा दिया? क्या सोरोस फाउंडेशन उनके रहने-खाने का खर्च उठा रहा है? क्या विपक्षी दल देश को तोड़ने के लिए विदेशी ताकतों से मदद ले रहे हैं?’
ऐसे में सरकार 6 जून के प्रोटेस्ट को नहीं होने देना चाहेगी। प्रशासन नियमों का हवाला दे सकता है। न मानने पर या हिंसा की स्थिति में अभिजीत और साथियों को हिरासत में भी लिया जा सकता है। हालांकि इससे कॉकरोच पार्टी के पक्ष में सहानुभूति की लहर उठने का खतरा है। एक विकल्प ये भी है कि सरकार प्रोटेस्ट होने दे और कॉकरोच पार्टी को एक सटायर मूवमेंट की तरह ही ट्रीट करे, जिससे उन्हें कोई नुकसान नहीं होने वाला।
सवाल-9: क्या ऐसी किसी पार्टी के लिए फिलहाल भारत की राजनीति में जगह है?
जवाबः कॉकरोच पार्टी के उभार की टाइमिंग और मुद्दे इसे मौजूदा राजनीति में प्रासंगिक बनाते हैं।
पॉलिटिक एनालिस्ट योगेंद्र यादव कहते हैं, ‘देश के भीतर एक छटपटाहट है। जब सरकार संस्थाओं पर कब्जा कर लेती है और पूर्णसत्ता स्थापित करती है, तब विद्रोह अनपेक्षित जगहों से पैदा होता है। जैसे- 1971 में इंदिरा गांधी की भारी जीत के बाद 1974 में जयप्रकाश आंदोलन हुआ। 2009 में कांग्रेस की जीत के बाद 2011 में अन्ना आंदोलन और 2019 में पीएम मोदी के दूसरी बार सत्ता में आने के 2 साल बाद किसान आंदोलन हुआ।’
वहीं कांग्रेस सांसद शशि थरूर कहते हैं, ‘युवा निराश है, इसीलिए इससे जुड़ रहा है। उम्मीद है कि इसके पीछे जो लोग हैं, वो इस एनर्जी को मेनस्ट्रीम पॉलिटिक्स में लाने का रास्ता निकाल लेंगे या फिर अपने वोट के जरिए बदलाव की आवाज बनेंगे।’















