अखिल भारतीय जनवादी महिला समिति (एडवा), राजस्थान की राज्य महासचिव डॉ. सीमा जैन ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे सैकड़ों युवाओं, विद्यार्थियों और वरिष्ठ वामपंथी नेताओं की गिरफ्तारी की कड़े शब्दों में निंदा की है। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक और संवैधानिक अधिकारों का खुला हनन करार दिया।
बयान में कहा गया कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने, एसआईआर प्रक्रिया पर रोक लगाने और चुनाव आयोग की निष्पक्षता बहाल करने की मांग को लेकर युवा एकत्र हुए थे। शांतिपूर्ण विरोध करना नागरिकों का बुनियादी अधिकार है, लेकिन केंद्र सरकार के इशारे पर दिल्ली पुलिस ने शहर भर में बैरिकेडिंग कर आवाज दबाने की दमनकारी कोशिश की।
तमाम पाबंदियों को धता बताते हुए भारत की जनवादी नौजवान सभा डीवाईएफआई,एसएफआई और अन्य संगठनों के बैनर तले युवा जंतर-मंतर पहुंचे। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों के साथ बर्बरता और मारपीट की, जिसमें कई लोग घायल हुए। इस दौरान सीपीआई (एम) महासचिव एम.ए. बेबी, पोलित ब्यूरो सदस्य वृंदा करात, सांसद ए.ए. रहीम, डीवाईएफआई महासचिव हिमाग्नराज भट्टाचार्य, एसएफआई अध्यक्ष आदर्श एम. साजी, महासचिव श्रीजन भट्टाचार्य और आइशी घोष सहित दर्जनों नेताओं को गैर-कानूनी ढंग से हिरासत में ले लिया गया।
एडवा राज्य महासचिव ने कहा कि जंतर-मंतर जैसे तय स्थल पर भी विरोध की अनुमति न देना मौजूदा भाजपा सरकार की असहिष्णुता और तानाशाही मानसिकता का प्रमाण है।
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को तत्काल प्रभाव से पद से हटाया जाए।एसआईआर प्रक्रिया पर तुरंत रोक लगाई जाए।
हिरासत में लिए गए सभी छात्र-युवा नेताओं और कार्यकर्ताओं को अविलंब एवं बिना शर्त रिहा किया जाए।
लोकतंत्र और संवैधानिक संस्थाओं की स्वतंत्रता की रक्षा के लिए यह संघर्ष मजबूती से जारी रहेगा।
डॉ. सीमा जैन
राज्य महासचिव
अखिल भारतीय जनवादी महिला समिति (एडवा), राजस्थान
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