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एनआरसीसी द्वारा ‘प्रिवेंशन ऑफ सेक्सुअल हैरेसमेंट अधिनियम (POSH Act) की अनुपालना’ पर कार्यशाला-सह-जागरूकता कार्यक्रम आयोजित

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बीकानेर, 19 मार्च, 2026 । भाकृअनुप–राष्ट्रीय उष्ट्र अनुसंधान केन्द्र (एनआरसीसी), बीकानेर में आज ‘‘प्रिवेंशन ऑफ सेक्सुअल हैरेसमेंट अधिनियम (POSH Act) की अनुपालना’ विषय पर कार्यशाला-सह-जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया जिसमें केन्‍द्र के वैज्ञानिकों, अधिकारियों, कर्मचारियों आदि ने सक्रिय सहभागिता निभाई।
इस अवसर पर मुख्य वक्ता के रूप में श्रीमती सुमन शर्मा, अधिवक्ता, राजस्थान उच्च न्यायालय, जोधपुर तथा जिला एवं सत्र न्यायालय, बीकानेर ने ‘प्रिवेंशन ऑफ सेक्सुअल हैरेसमेंट अधिनियम’ (POSH Act) पर प्रकाश डालते हुए कहा कि कार्यस्थल पर किसी भी प्रकार का लैंगिक उत्पीड़न दंडनीय अपराध है, जिसमें अनुचित शब्द, संकेत एवं डिजिटल माध्यमों से किया गया व्यवहार भी शामिल है। उन्होंने बताया कि विशाखा दिशा-निर्देशों (1997) के आधार पर वर्ष 2013 में यह अधिनियम लागू किया गया, जिसके अंतर्गत प्रत्येक संस्थान में आंतरिक शिकायत समिति (ICC) का गठन अनिवार्य है तथा पीड़िता 90 दिनों के भीतर शिकायत दर्ज कर सकती है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह अधिनियम किसी विभाग हेतु घर से ऑनलाइन कार्य करने वाली महिलाओं पर भी समान रूप से लागू होता है और इसका उद्देश्य महिलाओं की गरिमा एवं सुरक्षित कार्य वातावरण सुनिश्चित करना है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए केन्द्र के निदेशक डॉ. अनिल कुमार पूनिया ने कहा कि महिलाओं के प्रति सम्मानजनक दृष्टिकोण अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि कार्यस्थल पर भी वही शिष्ट, संवेदनशील एवं गरिमापूर्ण व्यवहार होना चाहिए, जैसा व्यक्ति अपने घर में महिलाओं के साथ करता है। उन्होंने आगे कहा कि जब महिलाएँ निर्भीक होकर व्यापक स्तर पर आगे बढ़ेंगी, तभी आदर्श समाज का निर्माण संभव होगा तथा राष्ट्र भी उनकी क्षमताओं का पूर्ण लाभ उठाते हुए तीव्र गति से प्रगति कर सकेगा। उन्होंने अपने संबोधन में सुरक्षित कार्य वातावरण की महत्ता पर बल देते हुए कहा कि संस्थान में नैतिक मूल्यों और परस्पर सम्मान की संस्कृति को बनाए रखना हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है।
इस अवसर पर केन्द्र के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी श्री अखिल ठुकराल ने कहा कि POSH अधिनियम, 2013 के अंतर्गत 10 या अधिक कर्मचारियों वाले प्रत्येक संस्थान में आंतरिक शिकायत समिति (ICC) का गठन अनिवार्य है तथा यह सभी प्रकार के लैंगिक उत्पीड़न पर लागू होता है। उन्होंने कहा कि महिलाओं के प्रति सम्मानजनक दृष्टिकोण, सकारात्मक सोच एवं जागरूकता के माध्यम से ही सुरक्षित एवं समान कार्यस्थल का निर्माण संभव है।
केन्द्र की महिला प्रकोष्ठ की अध्यक्ष डॉ. बसंती ज्योत्सना ने बताया कि कार्यशाला के बारे में बताया कि कार्यस्थल को अधिक सुरक्षित, समावेशी एवं गरिमापूर्ण बनाने के साथ-साथ अधिनियम की कानूनी बारीकियों, आंतरिक शिकायत समिति (ICC) की कार्यप्रणाली तथा कर्मचारियों के अधिकारों एवं दायित्वों पर विस्तृत चर्चा की गई। कार्यशाला के अंत में प्रश्नोत्तर सत्र आयोजित किया गया, जिसमें प्रतिभागियों की शंकाओं का विशेषज्ञों द्वारा समाधान किया गया।

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