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एनआरसीसी में अनुसूचित जाति उप-योजना तहत एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित

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बीकानेर 20 मार्च, 2026 । भाकृअनुप-राष्‍ट्रीय उष्‍ट्र अनुसंधान केन्‍द्र (एनआरसीसी), बीकानेर द्वारा अनुसूचित जाति उप-योजना के तहत आज ‘ ऊँटों के स्‍वास्‍थ्‍य प्रबंधन एवं उत्‍पादन वृद्धि की वैज्ञानिक तकनीकें’ विषयक एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया जिसमें बीकानेर जिले के आसपास गांवों यथा- मूंडसर, करणीसर, थावरिया, गीगासर, नोखा, करमीसर, बामणिया, जसरासर, सुरधना, लालमदेसर आदि के अनुसूचित जाति के 100 पशुपालकों (महिला/पुरूष) ने भाग लिया तथा इस अवसर पर पशुपालकों को कृषि संसाधन (इनपुट) भी वितरित किए गए।
केन्‍द्र निदेशक डॉ. अनिल कुमार पूनिया ने पशुपालकों के लिए पशु को जीवन यापन का महत्‍वपूर्ण आधार बताते हुए कहा कि वैज्ञानिक पद्धतियों के श्रेष्ठ प्रबंधन से जहां पशु स्‍वास्‍थ्‍य व उत्‍पादन में सुधार लाया जा सकता है, वहीं इससे पशुपालकों की आय में भी महत्‍वपूर्ण बढ़ोत्‍तरी सुनिश्चित की जा सकती है। उन्होंने पशुपालकों को एससीएसपी उप-योजना का भरपूर लाभ उठाने हेतु प्रोत्साहित किया।
इस अवसर पर केन्‍द्र के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. राकेश रंजन ने पशुपालकों को गर्मियों में पशुओं को पर्याप्‍त पानी पिलाने, चीचड़ के प्रकोप में दवाई के सही इस्‍तेमाल करने तथा बीमारियों से बचाव हेतु उचित टीकाकरण आदि संबंधी उपयोगी जानकारी दी। डॉ. वेदप्रकाश, प्रधान वैज्ञानिक ने पशुपालकों को श्रेष्‍ठ नस्‍ल व नर का चयन करने, दूध में गुणवत्‍ता का विशेष ध्‍यान रखने तथा केन्‍द्र द्वारा नस्‍ल आधार पर ऊँटनी को दुधारू पशु के रूप विकसित करने संबंधित पहलुओं पर प्रकाश डाला।
इस दौरान डॉ. बसंती ज्‍योत्‍सना, वरिष्‍ठ वैज्ञानिक ने जलवायु परिवर्तन के बाबजूद ऊँटों की बेहतर अनुकूलनता, पशुओं से स्‍वच्‍छ उत्‍पादन लेने हेतु स्‍वास्‍थ्‍य को प्राथमिकता दिए जाने, संतुलित आहार देने, सकल घरेलु उत्‍पाद को दृष्टिगत रखते हुए इंटीग्रेटेड फार्मिंग को अपनाने आदि पहलुओं पर जोर दिया। डॉ. प्रियंका गौतम, वरिष्‍ठ वैज्ञानिक ने शुष्‍क क्षेत्र में फसल-चक्र के अनुसार फसलों के चयन, मृदा परीक्षण, बीजारोपण का उचित समय, बीज की गुणवत्ता, खरपतवार आदि के प्रति जागरूकता रखने तथा समन्वित कृषि अपनाने की बात कही। डॉ. श्‍याम सुन्‍दर चौधरी, वैज्ञानिक ने पशुओं में स्‍वच्‍छता के महत्‍व, थनैला रोग से बचाव एवं नवजात बच्‍चे की उचित देखभाल एवं खीस के गुणों आदि हेतु जागरूकता की बात कही। डॉ. मितुल बुम्‍बडिया ने केन्‍द्र द्वारा ऊँटनी के दूध का संग्रहण, प्रसंस्‍करण तथा इससे निर्मित दुग्‍ध उत्‍पादों तथा मानव रोगों – मधुमेह, क्षय रोग, ऑटिज्‍म आदि में इसके औषधीय महत्‍व की जानकारी दी। केन्‍द्र के वैज्ञानिक डॉ. एंटोनी जॉनसन ने भी इस अवसर पर अपने विचार व्‍यक्‍त किए।
श्री मनजीत सिंह, नोडल अधिकारी, एससीएसपी ने उप-योजना संबंधी प्रावधानों की जानकारी देते हुए कहा कि यह भारत सरकार की एक महत्वपूर्ण योजना है, जिसका उद्देश्य अनुसूचित जाति के लोगों की आर्थिक और सामाजिक स्थिति को मजबूत बनाना है, अत: पशुपालकों को इसका भरपूर लाभ उठाने चाहिए। कार्यक्रम का संचालन श्री नेमीचन्‍द बारासा, मुख्‍य तकनीकी अधिकारी ने किया तथा इसका समापन ‘वन्‍दे मातरम् गीत’ के साथ किया।

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