बीकानेर में कौशल, नवाचार एवं करियर मार्गदर्शन का भव्य संगमसीबीएसई रीजनल स्किल एक्सपो एवं गाइडेंस फेस्टिवल में 21 विद्यालयों के विद्यार्थियों ने प्रस्तुत किए नवाचारी मॉडल

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कौशल आधारित शिक्षा, व्यावहारिक ज्ञान और भविष्य के करियर विकल्पों पर विशेषज्ञों ने किया मार्गदर्शन
बीकानेर। विद्यार्थियों की प्रतिभा को मंच प्रदान करने, उनमें नवाचार की भावना विकसित करने तथा भविष्य के करियर विकल्पों के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से श्री जैन पब्लिक स्कूल, बीकानेर में केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई), अजमेर रीजन के तत्वावधान में सत्र 2026-27 के अंतर्गत क्षेत्रीय कौशल प्रदर्शनी एवं मार्गदर्शन महोत्सव (रीजनल स्किल एक्सपो एवं गाइडेंस फेस्टिवल) का भव्य आयोजन किया गया। इस क्षेत्रीय स्तर के आयोजन में लगभग 21 विद्यालयों के विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लेते हुए विभिन्न विषयों पर आधारित कौशल-आधारित परियोजनाओं, नवाचारी मॉडलों एवं रचनात्मक प्रस्तुतियों के माध्यम से अपनी प्रतिभा, वैज्ञानिक सोच और व्यावहारिक दक्षता का परिचय दिया।
कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों को न केवल अपनी रचनात्मक क्षमता प्रदर्शित करने का अवसर मिला, बल्कि उन्होंने विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों से संवाद कर कौशल विकास, तकनीकी नवाचार, रोजगार की संभावनाओं और भविष्य में उपलब्ध करियर विकल्पों के संबंध में महत्त्वपूर्ण जानकारियां भी प्राप्त कीं। विभिन्न विद्यालयों के विद्यार्थियों, शिक्षकों, विषय विशेषज्ञों एवं शिक्षाविदों की सहभागिता से यह आयोजन ज्ञान, अनुभव और विचारों के आदान-प्रदान का प्रभावशाली मंच बना।
दीप प्रज्ज्वलन एवं सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के साथ हुआ शुभारंभ
कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन, मां शारदे की वंदना एवं सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के साथ हुआ। प्रारंभिक कार्यक्रम में शिक्षा, ज्ञान और रचनात्मकता के महत्त्व को रेखांकित करते हुए विद्यार्थियों को अपनी प्रतिभा पहचानने तथा उसे सकारात्मक दिशा में विकसित करने का संदेश दिया गया।
सीबीएसई, नई दिल्ली के कौशल शिक्षा विभाग के संयुक्त निदेशक श्री सतीश पहल ने वर्चुअल माध्यम से कौशल प्रदर्शनी का उद्घाटन किया। उन्होंने अपने संबोधन में कौशल-आधारित शिक्षा की आवश्यकता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वर्तमान समय में विद्यार्थियों के लिए किताबी ज्ञान के साथ व्यावहारिक दक्षताओं का विकास करना भी आवश्यक है। ऐसे आयोजन विद्यार्थियों को अपने विचारों को वास्तविक परियोजनाओं के रूप में प्रस्तुत करने, नई तकनीकों को समझने और रचनात्मक दृष्टिकोण विकसित करने का अवसर प्रदान करते हैं।
उन्होंने विद्यार्थियों को अपनी प्रतिभा, कल्पनाशीलता एवं नवाचार क्षमता का उत्कृष्ट प्रदर्शन करने के लिए प्रेरित किया। साथ ही, कौशल शिक्षा को भविष्य की आवश्यकताओं से जोड़ने तथा विद्यार्थियों को बदलते शैक्षिक एवं व्यावसायिक परिवेश के अनुरूप तैयार करने में ऐसे आयोजनों की भूमिका को महत्त्वपूर्ण बताया।
विशेषज्ञों ने तकनीकी विकास, वैज्ञानिक सोच एवं पर्यावरण संरक्षण पर दिया जोर
कार्यक्रम में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर), बीकानेर के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. धुरेन्द्र सिंह ने विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत परियोजनाओं का अवलोकन किया और उनकी रचनात्मकता की सराहना की। उन्होंने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) एवं तकनीकी विकास के वर्तमान दौर में विद्यार्थियों के सामने अपनी प्रतिभा और कौशल को निखारने के अनेक अवसर उपलब्ध हैं।
उन्होंने विद्यार्थियों को नई तकनीकों के प्रति जिज्ञासु रहने, समस्याओं के समाधान के लिए वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाने तथा अपने ज्ञान का व्यावहारिक जीवन में उपयोग करने के लिए प्रेरित किया। उनके अनुसार, कौशल-आधारित शिक्षा विद्यार्थियों को केवल जानकारी प्राप्त करने तक सीमित नहीं रखती, बल्कि उन्हें अपने विचारों को प्रयोगों और उपयोगी मॉडलों के माध्यम से अभिव्यक्त करने की क्षमता भी प्रदान करती है।
महाराजा गंगा सिंह विश्वविद्यालय, बीकानेर के पर्यावरण विज्ञान विभाग के संकायाध्यक्ष प्रो. अनिल कुमार छंगाणी ने विद्यार्थियों को वैज्ञानिक सोच विकसित करने तथा पर्यावरण संरक्षण के प्रति जिम्मेदार नागरिक बनने का संदेश दिया। उन्होंने पर्यावरण से जुड़े विषयों को शिक्षा एवं दैनिक जीवन से जोड़ने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने विद्यार्थियों को प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण, सतत विकास और पर्यावरणीय चुनौतियों के प्रति जागरूक रहने के लिए प्रेरित किया।
विशेषज्ञों के मार्गदर्शन से विद्यार्थियों को अपने प्रोजेक्ट्स की उपयोगिता समझने, उनके व्यावहारिक पक्षों पर विचार करने तथा समाज और पर्यावरण से जुड़ी समस्याओं के समाधान के लिए नए दृष्टिकोण अपनाने का अवसर मिला।
करियर मार्गदर्शन सत्र में विद्यार्थियों को मिली भविष्य की राह चुनने की प्रेरणा
कार्यक्रम का एक प्रमुख आकर्षण करियर मार्गदर्शन सत्र रहा, जिसमें विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों ने विद्यार्थियों को उनकी रुचि, योग्यता और कौशल के अनुरूप भविष्य के विकल्प चुनने के संबंध में मार्गदर्शन दिया।
लाइफोलॉजी फाउंडेशन, त्रिवेंद्रम के उपाध्यक्ष श्री राहुल नायर ने वर्चुअल माध्यम से विद्यार्थियों को सार्थक करियर के विषय में मार्गदर्शन प्रदान किया। उन्होंने करियर चयन के दौरान व्यक्तिगत रुचि, क्षमताओं और भविष्य के लक्ष्यों को समझने के महत्त्व को रेखांकित किया। इस सत्र के माध्यम से विद्यार्थियों को अपने भविष्य की योजना बनाने तथा उपलब्ध अवसरों के संबंध में व्यापक दृष्टिकोण विकसित करने की प्रेरणा मिली।
वहीं, मीडिया एवं मनोरंजन कौशल परिषद (एमईएससी) के अकादमिक प्रमुख श्री अभिषेक सोनी ने मीडिया एवं मनोरंजन उद्योग में उपलब्ध विभिन्न करियर अवसरों की जानकारी दी। उन्होंने विद्यार्थियों को इस क्षेत्र में विकसित हो रही नई संभावनाओं से परिचित कराते हुए अपनी रुचि और योग्यता के अनुसार उपयुक्त क्षेत्र का चयन करने के लिए प्रेरित किया।
करियर मार्गदर्शन सत्र ने विद्यार्थियों को पारंपरिक करियर विकल्पों से आगे बढ़कर नए और उभरते क्षेत्रों के बारे में जानने का अवसर प्रदान किया। विशेषज्ञों ने विद्यार्थियों को अपनी क्षमताओं को पहचानने, कौशल विकसित करने और भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप स्वयं को तैयार करने की दिशा में प्रेरित किया।
विविध विषयों पर विद्यार्थियों ने प्रस्तुत किए नवाचारी मॉडल
कौशल प्रदर्शनी में विभिन्न विद्यालयों से आए विद्यार्थियों ने अनेक विषयों पर आधारित परियोजनाएं एवं मॉडल प्रस्तुत कर अपनी रचनात्मकता और व्यावहारिक ज्ञान का प्रदर्शन किया। प्रदर्शनी में उद्यमिता एवं वित्तीय साक्षरता, पर्यावरण एवं सतत विकास, स्वास्थ्य एवं कल्याण, पर्यटन एवं आतिथ्य, मीडिया एवं संचार, कृषि एवं ग्रामीण विकास तथा एनीमेशन, दृश्य प्रभाव, गेमिंग एवं कॉमिक्स जैसे विविध विषय शामिल रहे।
विद्यार्थियों ने अपने प्रोजेक्ट्स के माध्यम से सामाजिक आवश्यकताओं, पर्यावरण संरक्षण, वित्तीय जागरूकता, स्वास्थ्य संबंधी विषयों, कृषि विकास और तकनीकी नवाचार जैसे महत्त्वपूर्ण मुद्दों पर अपनी समझ प्रस्तुत की। विभिन्न विषयों पर आधारित मॉडलों ने यह प्रदर्शित किया कि विद्यार्थी अपने आसपास की समस्याओं को समझते हुए उनके समाधान के लिए रचनात्मक विचारों पर कार्य कर सकते हैं।
प्रदर्शनी में विद्यार्थियों ने अपने-अपने मॉडल के उद्देश्य, कार्यप्रणाली और उपयोगिता के बारे में जानकारी दी। उन्होंने परियोजनाओं के माध्यम से यह समझाने का प्रयास किया कि प्राप्त ज्ञान का उपयोग वास्तविक जीवन की परिस्थितियों में किस प्रकार किया जा सकता है।
उद्यमिता एवं वित्तीय साक्षरता से संबंधित प्रस्तुतियों में आर्थिक समझ और व्यावसायिक सोच के महत्त्व को रेखांकित किया गया। पर्यावरण एवं सतत विकास से जुड़े प्रोजेक्ट्स ने प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और पर्यावरणीय जिम्मेदारी के प्रति जागरूकता का संदेश दिया। स्वास्थ्य एवं कल्याण से संबंधित विषयों ने स्वस्थ जीवनशैली और जन-जागरूकता के महत्त्व को सामने रखा।
इसी प्रकार, पर्यटन एवं आतिथ्य, मीडिया एवं संचार तथा कृषि एवं ग्रामीण विकास से संबंधित परियोजनाओं ने विद्यार्थियों को विभिन्न व्यावसायिक क्षेत्रों की संभावनाओं से परिचित कराया। एनीमेशन, दृश्य प्रभाव, गेमिंग एवं कॉमिक्स जैसे रचनात्मक क्षेत्रों से संबंधित प्रस्तुतियों ने बदलते तकनीकी परिवेश में उभरते कौशल और रोजगार की संभावनाओं की ओर ध्यान आकर्षित किया।
इन परियोजनाओं के माध्यम से विद्यार्थियों ने विषयों की सैद्धांतिक जानकारी के साथ उनके व्यावहारिक पक्षों को भी प्रस्तुत किया। इससे उनकी विषयगत समझ, प्रस्तुतीकरण क्षमता, तार्किक चिंतन और समस्या-समाधान की दक्षता का परिचय मिला।
निर्णायक मंडल ने किया परियोजनाओं का मूल्यांकन
प्रदर्शनी में प्रस्तुत विभिन्न परियोजनाओं का मूल्यांकन निर्णायक मंडल द्वारा किया गया। मूल्यांकन के दौरान परियोजनाओं की उपयोगिता, नवाचार, रचनात्मकता एवं प्रस्तुतीकरण जैसे पहलुओं को ध्यान में रखा गया।
विद्यार्थियों ने अपने मॉडलों के संबंध में निर्णायकों के समक्ष विचार प्रस्तुत किए और परियोजनाओं की विशेषताओं को समझाया। इस प्रक्रिया से उन्हें अपनी प्रस्तुतीकरण क्षमता को बेहतर बनाने, अपने विचारों को तार्किक ढंग से व्यक्त करने और विशेषज्ञों के सुझावों से सीखने का अवसर मिला।
लगभग 21 विद्यालयों के विद्यार्थियों की सहभागिता ने प्रदर्शनी को व्यापक स्वरूप प्रदान किया। अलग-अलग विद्यालयों के विद्यार्थियों के बीच विचारों, अनुभवों और नवाचारी दृष्टिकोणों का आदान-प्रदान हुआ। इस प्रकार आयोजन ने विद्यार्थियों को स्वस्थ प्रतिस्पर्धा के साथ सामूहिक रूप से सीखने और एक-दूसरे की प्रतिभा से प्रेरणा लेने का अवसर प्रदान किया।
विद्यालय प्रबंधन समिति के सदस्यों ने बढ़ाई कार्यक्रम की गरिमा
कार्यक्रम में विद्यालय प्रबंधन समिति के सदस्य श्री जयचंद लाल डागा, श्री चम्पकमल सुराणा, श्री निर्मल पारख, श्री निर्मल धारीवाल, श्री अशोक सुराणा, श्री मयंक सिपानी, श्री महेंद्र पुगालिया, श्री तिलोक कोचर, श्री संदीप चोरड़िया, श्री राकेश कोचर, श्री किशोर बांठिया एवं श्री अजय सेठिया उपस्थित रहे।
समिति के सदस्यों की गरिमामयी उपस्थिति ने कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई। आयोजन के दौरान विद्यार्थियों को प्रोत्साहित करने तथा शिक्षा के क्षेत्र में नवाचार एवं कौशल विकास को बढ़ावा देने के महत्त्व को भी रेखांकित किया गया।
शालाध्यक्ष विजय कुमार कोचर ने जताया सीबीएसई का आभार
विद्यालय के शालाध्यक्ष श्री विजय कुमार कोचर ने स्वागत उद्बोधन में सभी अतिथियों, विशेषज्ञों, शिक्षकों एवं प्रतिभागियों का अभिनंदन किया। उन्होंने सीबीएसई के प्रति विशेष आभार व्यक्त करते हुए कहा कि श्री जैन पब्लिक स्कूल को बीकानेर में इतने व्यापक स्तर पर आयोजित क्षेत्रीय कार्यक्रम की मेजबानी का अवसर मिलना विद्यालय के लिए गौरव और सम्मान का विषय है।
उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन विद्यार्थियों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने, नए कौशल सीखने और भविष्य की संभावनाओं को समझने का महत्त्वपूर्ण अवसर प्रदान करते हैं। कौशल-आधारित शिक्षा विद्यार्थियों को आत्मनिर्भर बनाने और उन्हें व्यावहारिक जीवन की चुनौतियों के लिए तैयार करने में सहायक होती है।
उन्होंने सीबीएसई के मार्गदर्शन एवं सहयोग की सराहना करते हुए कार्यक्रम को सफल बनाने में योगदान देने वाले सभी व्यक्तियों, संस्थाओं और विद्यालय परिवार के सदस्यों के प्रति आभार व्यक्त किया।
प्राचार्या रूपश्री सिपानी ने बताया कौशल-आधारित शिक्षा का महत्त्व
विद्यालय की प्राचार्या श्रीमती रूपश्री सिपानी ने सीबीएसई के कौशल निदेशक श्री विश्वजीत साहा, अजमेर क्षेत्र के क्षेत्रीय अधिकारी डॉ. श्याम कपूर तथा मुख्य अतिथि श्री सतीश पहल सहित सभी अतिथियों एवं विशेषज्ञों का अभिनंदन किया।
उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अंतर्गत कौशल-आधारित एवं अनुभवात्मक शिक्षा के महत्त्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वर्तमान शैक्षिक परिवेश में विद्यार्थियों का सर्वांगीण विकास केवल किताबी ज्ञान तक सीमित नहीं रहना चाहिए। विद्यार्थियों में व्यावहारिक दक्षता, रचनात्मकता, तार्किक चिंतन और समस्या-समाधान की क्षमता विकसित करना भी आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को सीखने की प्रक्रिया में सक्रिय भागीदारी के अवसर मिलने चाहिए, ताकि वे अपने ज्ञान को व्यवहार में लागू कर सकें और अपनी रुचियों एवं क्षमताओं को पहचान सकें।
प्राचार्या ने बताया कि सीबीएसई के दिशा-निर्देशों के अनुरूप विद्यालय में समय-समय पर विभिन्न शैक्षिक, सह-शैक्षिक एवं कौशल-आधारित गतिविधियों का आयोजन किया जाता है। इन गतिविधियों के माध्यम से विद्यार्थियों को नए विषयों को समझने, अपनी प्रतिभा निखारने और भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप स्वयं को तैयार करने के अवसर प्राप्त होते हैं।
उन्होंने कहा कि क्षेत्रीय कौशल प्रदर्शनी एवं मार्गदर्शन महोत्सव विद्यार्थियों को अपनी रचनात्मकता प्रदर्शित करने के साथ-साथ विशेषज्ञों से सीखने और विभिन्न क्षेत्रों में उपलब्ध संभावनाओं को समझने का अवसर प्रदान करता है।
विद्यालय की मुख्य कार्यकारी अधिकारी श्रीमती सीमा जैन ने कौशल महोत्सव के सफल आयोजन पर विद्यालय परिवार को हार्दिक बधाई दी। उन्होंने भविष्य में भी ऐसे ज्ञानवर्धक एवं विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास में सहायक आयोजनों के लिए शुभकामनाएं प्रेषित कीं।
प्रश्नोत्तरी सत्र में विद्यार्थियों ने विशेषज्ञों से किए सवाल
कार्यक्रम के अंतर्गत प्रश्नोत्तरी एवं संवाद सत्र का आयोजन भी किया गया। इसमें विद्यार्थियों ने विभिन्न विषयों से संबंधित अपनी जिज्ञासाएं प्रस्तुत कीं और विशेषज्ञों से प्रश्न पूछकर उनका समाधान प्राप्त किया।
विशेषज्ञ वक्ताओं ने विद्यार्थियों के प्रश्नों के रोचक एवं ज्ञानवर्धक उत्तर दिए। इस संवादात्मक सत्र ने विद्यार्थियों को विषयों की गहन समझ विकसित करने तथा विशेषज्ञों के अनुभवों से सीखने का अवसर प्रदान किया।
प्रश्नोत्तरी सत्र के माध्यम से विद्यार्थियों को अपनी शंकाओं का समाधान प्राप्त करने के साथ-साथ नए विषयों के प्रति जिज्ञासा विकसित करने की प्रेरणा मिली। विशेषज्ञों के साथ सीधे संवाद ने कार्यक्रम को अधिक सहभागितापूर्ण और ज्ञानवर्धक बनाया।
सचिव माणक कोचर ने किया धन्यवाद ज्ञापन
विद्यालय के सचिव सीए माणक कोचर ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया। उन्होंने कार्यक्रम के सफल आयोजन में सहयोग देने के लिए सीबीएसई, अतिथियों, विशेषज्ञों, विद्यालय प्रबंधन समिति, शिक्षकों, विद्यार्थियों एवं आयोजन से जुड़े सभी लोगों के प्रति आभार व्यक्त किया।
उन्होंने कहा कि सीबीएसई के दिशा-निर्देशन में आयोजित होने वाले विभिन्न शैक्षिक कार्यक्रम एवं गतिविधियां विद्यार्थियों के ज्ञान, कौशल और सर्वांगीण विकास को नई दिशा प्रदान करती हैं। उन्होंने ऐसे आयोजनों को विद्यार्थियों की क्षमताओं को पहचानने तथा उन्हें भविष्य के लिए तैयार करने की दृष्टि से महत्त्वपूर्ण बताया।
विद्यार्थियों एवं शिक्षिका प्रीति पारीक ने किया संचालन
कार्यक्रम का सफल संचालन विद्यार्थियों एवं शिक्षिका श्रीमती प्रीति पारीक द्वारा किया गया। आयोजन के दौरान विद्यालय की ओर से अतिथियों एवं प्रतिभागियों के लिए अल्पाहार और भोजन की समुचित व्यवस्था की गई।
विद्यालय के सुव्यवस्थित प्रबंधन एवं आत्मीय आतिथ्य से प्रभावित अतिथियों और विद्यार्थियों ने आयोजन की सराहना की। प्रतिभागियों ने इसे ज्ञान, अनुभव और प्रेरणा से भरपूर अवसर बताते हुए कहा कि इस प्रकार के आयोजन विद्यार्थियों को अपनी क्षमताओं को पहचानने और नए क्षेत्रों में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करते हैं।
कौशल विकास और करियर जागरूकता की दिशा में महत्त्वपूर्ण पहल
श्री जैन पब्लिक स्कूल, बीकानेर में आयोजित सीबीएसई रीजनल स्किल एक्सपो एवं गाइडेंस फेस्टिवल 2026-27 विद्यार्थियों को कौशल-आधारित शिक्षा, नवाचार एवं करियर मार्गदर्शन से जोड़ने की दिशा में महत्त्वपूर्ण पहल सिद्ध हुआ।
इस आयोजन ने विद्यार्थियों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने, व्यावहारिक ज्ञान का उपयोग करने, नए विचारों से परिचित होने और विभिन्न व्यावसायिक क्षेत्रों की संभावनाओं को समझने का अवसर प्रदान किया। साथ ही, विशेषज्ञों के मार्गदर्शन और संवाद सत्रों ने विद्यार्थियों में आत्मविश्वास, रचनात्मकता, तार्किक चिंतन एवं समस्या-समाधान की क्षमता विकसित करने की आवश्यकता को रेखांकित किया।
लगभग 21 विद्यालयों की सहभागिता से आयोजित इस क्षेत्रीय महोत्सव ने बीकानेर में शैक्षिक गतिविधियों को नई ऊर्जा प्रदान की। यह आयोजन इस बात का सशक्त उदाहरण बना कि कौशल-आधारित एवं अनुभवात्मक शिक्षा के माध्यम से विद्यार्थियों को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करने के साथ-साथ उन्हें नवाचार, आत्मनिर्भरता और रचनात्मक सोच की दिशा में भी आगे बढ़ाया जा सकता है।

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