कुलगुरु प्रो. डॉ. अखिल रंजन गर्ग ने कहा—सांस्कृतिक गतिविधियाँ विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास का सशक्त माध्यम
नृत्य और वेशभूषा प्रतियोगिताओं में विद्यार्थियों ने दिखाई प्रतिभा, पारंपरिक परिधानों में रितिक शर्मा, संदीप और भानु सहित छात्राओं ने हासिल किए पुरस्कार
भारतीय संस्कृति की जीवंत परंपराओं, लोककला की मनमोहक प्रस्तुतियों और युवा ऊर्जा के संगम के बीच इंजीनियरिंग कॉलेज बीकानेर में नवरात्रि के अवसर पर आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रम ‘नवरंग–2026’ उत्साह, उमंग और उल्लास का केंद्र बना। महाविद्यालय के स्टूडेंट्स एक्टिविटी सेंटर (एसएसी) की ओर से आयोजित डांडिया एवं गरबा उत्सव में छात्र-छात्राओं ने पारंपरिक नृत्यों, रंग-बिरंगी वेशभूषा और आकर्षक प्रस्तुतियों के माध्यम से भारतीय सांस्कृतिक विरासत की खूबसूरती को जीवंत कर दिया। कार्यक्रम ने महाविद्यालय परिसर को उत्सव के रंगों से सराबोर करने के साथ विद्यार्थियों को अपनी रचनात्मकता, प्रतिभा और सांस्कृतिक अभिरुचि प्रदर्शित करने का मंच भी प्रदान किया।
विद्यार्थियों के व्यक्तित्व विकास में सांस्कृतिक गतिविधियों की अहम भूमिका : कुलगुरु
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि बीकानेर तकनीकी विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. डॉ. अखिल रंजन गर्ग ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि सांस्कृतिक गतिविधियाँ शिक्षा व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। शिक्षा का उद्देश्य केवल किताबी ज्ञान और अकादमिक उपलब्धियों तक सीमित नहीं है, बल्कि विद्यार्थियों के व्यक्तित्व के विभिन्न आयामों का विकास करना भी है। सांस्कृतिक आयोजन विद्यार्थियों में आत्मविश्वास, रचनात्मकता, नेतृत्व क्षमता, अनुशासन और सामूहिक सहभागिता जैसे गुणों को विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति अपनी विविधता, परंपराओं और लोककलाओं के कारण विशिष्ट पहचान रखती है। गरबा एवं डांडिया जैसे पारंपरिक नृत्य हमारी सांस्कृतिक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का सशक्त माध्यम हैं। ऐसे आयोजनों से विद्यार्थियों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने के साथ भारतीय परंपराओं को समझने और उनके प्रति सम्मान विकसित करने का अवसर मिलता है। उन्होंने कार्यक्रम के सफल आयोजन के लिए स्टूडेंट्स एक्टिविटी सेंटर की पूरी टीम को बधाई देते हुए विद्यार्थियों से शैक्षणिक गतिविधियों के साथ सांस्कृतिक आयोजनों में भी सक्रिय भागीदारी करने का आह्वान किया।
अकादमिक उत्कृष्टता के साथ सांस्कृतिक प्रतिभा को भी मिले अवसर
महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. संजीव जैन ने कहा कि विद्यार्थियों के समग्र विकास के लिए पढ़ाई के साथ सांस्कृतिक, खेलकूद और अन्य सह-पाठ्यक्रम गतिविधियों में भागीदारी आवश्यक है। ऐसी गतिविधियाँ विद्यार्थियों में टीम भावना, सामाजिक समन्वय, सकारात्मक दृष्टिकोण और पारस्परिक सहयोग की भावना को मजबूत करती हैं। उन्होंने कहा कि महाविद्यालय में विद्यार्थियों को अपनी रुचि और प्रतिभा के अनुरूप आगे बढ़ने के अवसर उपलब्ध कराना महत्वपूर्ण है। ‘नवरंग–2026’ जैसे आयोजन विद्यार्थियों को अपनी रचनात्मक क्षमताओं को पहचानने और आत्मविश्वास के साथ प्रस्तुत करने के लिए प्रेरित करते हैं।
पारंपरिक वेशभूषा और मनमोहक प्रस्तुतियों ने बांधा समां
कार्यक्रम के दौरान छात्र-छात्राओं ने पारंपरिक गरबा एवं डांडिया नृत्य की आकर्षक प्रस्तुतियाँ दीं। रंग-बिरंगे पारंपरिक परिधान, संगीत की मधुर धुनें, नृत्य की लयबद्धता और विद्यार्थियों का उत्साह आयोजन के प्रमुख आकर्षण रहे। प्रतिभागियों ने अपनी प्रस्तुतियों के माध्यम से भारतीय लोकसंस्कृति की विविधता और सुंदरता को प्रदर्शित किया। कार्यक्रम में विद्यार्थियों की सक्रिय भागीदारी ने सांस्कृतिक सौहार्द, आपसी सहयोग और सामूहिक उत्सव की भावना को मजबूत किया।
‘नवरंग–2026’ केवल मनोरंजन का अवसर नहीं रहा, बल्कि विद्यार्थियों को अपनी कलात्मक अभिव्यक्ति, आत्मविश्वास और मौलिकता प्रदर्शित करने का मंच भी बना। आयोजन के माध्यम से विद्यार्थियों को विभिन्न सांस्कृतिक परंपराओं को समझने और सामूहिक गतिविधियों में सहभागिता के महत्व को अनुभव करने का अवसर मिला।
वेशभूषा प्रतियोगिता में रितिक शर्मा और कनिष्का सहित प्रतिभागियों ने हासिल किए पुरस्कार
कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण नृत्य एवं वेशभूषा प्रतियोगिताएँ रहीं। वेशभूषा प्रतियोगिता में प्रतिभागियों की पारंपरिक पोशाक, रचनात्मकता, प्रस्तुति और सांस्कृतिक अभिव्यक्ति को ध्यान में रखते हुए उत्कृष्ट प्रतिभागियों को सम्मानित किया गया।
बॉयज वर्ग में रितिक शर्मा ने प्रथम, एस. आर. संदीप ने द्वितीय तथा भानु ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। वहीं, गर्ल्स वर्ग में कनिष्का ने प्रथम, भावना ने द्वितीय तथा रजनी कुमारी ने तृतीय स्थान हासिल किया। विजेताओं को उनकी आकर्षक प्रस्तुति और पारंपरिक वेशभूषा के लिए सराहा गया।
नृत्य प्रतियोगिता में भी विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। प्रतिभागियों की लय, ताल, प्रस्तुति और आत्मविश्वास के आधार पर उत्कृष्ट प्रदर्शनों को सम्मानित किया गया। प्रतियोगिताओं ने विद्यार्थियों में स्वस्थ प्रतिस्पर्धा की भावना विकसित करने के साथ उन्हें अपनी प्रतिभा और मौलिकता प्रदर्शित करने का अवसर दिया।
कार्यक्रम के समन्वयक डॉ. श्रद्धा परमार एवं डॉ. अतुल गोस्वामी ने आयोजन की विभिन्न गतिविधियों के समन्वय एवं संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। स्टूडेंट्स एक्टिविटी सेंटर की समन्वयक डॉ. प्रीति नारुका के मार्गदर्शन में कार्यक्रम का सफल आयोजन किया गया। आयोजन को सुव्यवस्थित, आकर्षक और विद्यार्थियों के लिए यादगार बनाने में समन्वयकों एवं आयोजन टीम का योगदान रहा।
‘नवरंग–2026’ ने महाविद्यालय में सांस्कृतिक उत्साह, एकता और आपसी सहयोग का वातावरण निर्मित किया। कार्यक्रम ने यह संदेश दिया कि तकनीकी एवं प्रबंधन शिक्षा के साथ भारतीय संस्कृति, लोककलाओं और रचनात्मक गतिविधियों से जुड़ाव भी विद्यार्थियों के व्यक्तित्व निर्माण का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इस प्रकार के आयोजन युवाओं को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़े रखने और उनकी प्रतिभा को सकारात्मक दिशा देने में अहम भूमिका निभाते हैं।








