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Transformation of India’s Defence and Internal Security Posture

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भारत की रक्षा एवं आंतरिक सुरक्षा की स्थिति में निर्णायक बदलाव

पिछले ग्यारह वर्षों के दौरान, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सरकार के तहत भारत की रक्षा एवं  आंतरिक सुरक्षा की स्थिति में व्यापक बदलाव आया है। यह बदलाव सुस्पष्ट उद्देश्य, मजबूत प्रतिरोध और आत्मनिर्भरता की दिशा में निरंतर प्रयास से लैस है। इस सरकार ने लगातार इस बात पर जोर दिया है कि राष्ट्रीय सुरक्षा से कोई भी समझौता नहीं किया जा सकता और इस सुरक्षा को सुनिश्चित करने हेतु भारत अपनी क्षमता को बेहतर करने एवं ठोस तैयारी के प्रति पूरी तरह सजग रहेगा। इसके परिणामस्वरूप बाहरी एवं आंतरिक, दोनों तरह की चुनौतियों के प्रति अधिक आत्मविश्वासपूर्ण, आधुनिक तथा सक्रिय दृष्टिकोण विकसित हुआ है। अतीत के उलट, वर्तमान सरकार के तहत भारत एक वैश्विक शक्ति बन गया है। यह एक ऐसा राष्ट्र बनकर उभरा है, जो विभिन्न मुद्दों पर अपनी राय पूरी मजबूती से रखता है।

रक्षा क्षमता को मजबूती

वर्तमान सरकार के कार्यकाल में भारत का रक्षा व्यय लगातार बढ़ा है, जो 2013-14 के 2.53 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 2025-26 में 6.81 लाख करोड़ रुपये हो गया है। अब ध्यान केवल हथियार हासिल करने पर ही नहीं, बल्कि घरेलू क्षमता के निर्माण पर भी है। वर्ष 2024-25 के दौरान, रक्षा उत्पादन 1.50 लाख करोड़ रुपये के रिकॉर्ड स्तर को छू गया जोकि 2014-15 के उत्पादन स्तर से तीन गुना से भी अधिक है। लड़ाकू विमान, मिसाइल प्रणालियां, तोपखाना प्रणालियां, युद्धपोत, नौसैनिक पोत, विमानवाहक पोत तथा और भी बहुत कुछ अब भारत में बन रहे हैं। यह इस बात को दर्शाता है कि कैसे आत्मनिर्भरता और प्रतिरोध हमारी राष्ट्रीय सुरक्षा के मूल आधार बन गए हैं। पिछले एक दशक में रक्षा निर्यात चौंतीस गुना बढ़कर 2024-25 में 23,622 करोड़ रुपये का हो गया। भारतीय उपकरण अब संयुक्त राज्य अमेरिका, फ्रांस और आर्मेनिया सहित 100 से अधिक देशों को निर्यात किए जाते हैं।

यह सफलता सुधार और नवाचार, दोनों का नतीजा है। नियमों को सुव्यवस्थित करके, निजी क्षेत्र को अवसर प्रदान करके और स्वदेशीकरण को प्राथमिकता देकर, सरकार ने यह सुनिश्चित किया है कि भारत अब केवल रक्षा से जुड़े उत्पादों का एक बड़ा आयातक ही नहीं, बल्कि एक उभरता हुआ निर्यातक भी बने। यह सरकार की इस मंशा को भी स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि भारत अपनी सुरक्षा के लिए कभी किसी अन्य देश पर निर्भर नहीं रहेगा।रक्षा संबंधी  अधिग्रहण और स्वदेशीकरण से जुड़े सुधारों के जरिए आत्मनिर्भरता

पिछले एक दशक से भारत की रक्षा नीति आत्मनिर्भरता के सिद्धांत से प्रेरित रही है। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व वाली सरकार ने आयात पर निर्भरता कम करने, स्वदेशी उत्पादन को बढ़ावा देने और वैश्विक स्तर पर रक्षा से जुड़ा एक प्रतिस्पर्धी इकोसिस्टम बनाने के उद्देश्य से  संरचनात्मक सुधारों को आगे बढ़ाया है। ये सुधार खरीद, अनुसंधान, उद्योग जगत की भागीदारी और विदेशी निवेश से जुड़े हैं।

रक्षा अधिग्रहण प्रक्रिया (डीएपी) 2020 और भारतीय-आईडीडीएम

रक्षा अधिग्रहण प्रक्रिया 2020, जिसे डीपीपी 2016 से संशोधित किया गया है, पूरी तरह से प्रधानमंत्री मोदी द्वारा शुरू किए गए आत्मनिर्भर भारत अभियान के अनुरूप है। यह प्रक्रिया अधिग्रहणों के लिए खरीद (भारतीय – स्वदेशी रूप से डिजाइनविकसित और निर्मित) श्रेणी को प्राथमिकता देती है, जिससे स्थानीय डिजाइन, विकास और उत्पादन पर अधिकतम निर्भरता सुनिश्चित होती है। यह बदलाव भारतीय-आईडीडीएम परियोजनाओं को खरीद संबंधी पिरामिड में सबसे ऊपर रखता है।

सरलीकृत ‘मेक’ प्रक्रिया

रक्षा प्लेटफार्मों/प्रणालियों के डिजाइन, विकास और उत्पादन में भारतीय उद्योगों की भागीदारी को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से मेक प्रक्रिया को सुव्यवस्थित किया गया। मेक श्रेणियों के अंतर्गत, 100 करोड़ रुपये प्रति वर्ष तक की खरीद वाली परियोजनाओं को सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) के लिए निर्धारित किया गया है।

• मेक-I: सरकार विकास लागत के 70 प्रतिशत हिस्से या प्रति विकास एजेंसी (डीए) अधिकतम 250 करोड़ रुपये तक की राशि को वित्त पोषित करती है।

• मेक-II: उद्योग द्वारा वित्त पोषित परियोजनाएं, पात्रता में ढील, उद्योग से स्वतः प्रस्तावों की स्वीकृति और सफल प्रोटोटाइप के विकास पर एल1 विकास एजेंसी को ऑर्डर का आश्वासन।

• मेक-III: टीओटी/ विदेशी ओईएम के साथ सहयोग के जरिए भारत में निर्मित।

अब तक सेना, नौसेना, वायु सेना एवं आईडीएस मुख्यालय की 146 परियोजनाओं को विभिन्न ‘मेक’ श्रेणियों के तहत ‘सैद्धांतिक स्वीकृति’ दी जा चुकी है।

एफडीआई से जुड़ी प्रक्रिया का उदारीकरण

पूंजी और उन्नत प्रौद्योगिकी को आकर्षित करने के उद्देश्य से रक्षा क्षेत्र में एफडीआई से जुड़ी प्रक्रिया को उदार बनाया गया:

• नए औद्योगिक लाइसेंसों के लिए स्वतः अनुमोदन के जरिए 74 प्रतिशत की अनुमति।

• उन्नत प्रौद्योगिकी से जुड़े मामलों में सरकारी अनुमोदन के जरिए शत-प्रतिशत तक की अनुमति।  

नवाचार को बढ़ावा: आईडेक्स और टीडीएफ

• वर्ष 2018 में शुरू किया गया रक्षा संबंधी उत्कृष्टता हेतु नवाचार (आईडेक्स), रक्षा से जुड़े नवाचार के लिए अनुदान के साथ स्टार्ट-अप, एमएसएमई और शिक्षा जगत को सहायता प्रदान करता है।

• प्रौद्योगिकी विकास कोष (टीडीएफ) रक्षा एवं एयरोस्पेस से जुड़ी उन्नत प्रौद्योगिकियों के निर्माण हेतु एमएसएमई और स्टार्ट-अप को 10 करोड़ रुपये तक का अनुदान प्रदान करता है।

स्वदेशीकरण पोर्टल और सकारात्मक सूचियां

सृजन पोर्टल (2020) उद्योग जगत को पूर्व में आयात की जाने वाली वस्तुओं को स्थानीय स्तर पर विकसित करने में समर्थ बनाता है। अब तक, 46,798 से अधिक वस्तुओं को सूचीबद्ध किया जा चुका है।

डीपीएसयू द्वारा जारी सकारात्मक स्वदेशीकरण सूची में 5,012 वस्तुओं (पांच चरणों में) की पहचान की गई है, जोकि आयात पर चरणबद्ध प्रतिबंध का संकेत देता है।

• पहली सूची: 2,851 वस्तुएं

• दूसरी सूची: 107 वस्तुएं

• तीसरी सूची: 780 वस्तुएं

• चौथी सूची: 928 वस्तुएं

• पाँचवीं सूची: 346 वस्तुएं

ऑफसेट और रणनीतिक साझेदारियां

• ऑफसेट पोर्टल (2019) ने ऑफसेट अनुबंधों में पारदर्शिता बढ़ाई है, जिससे ओईएम को भारतीय उत्पादन में निवेश करने और वैश्विक स्तर पर आपूर्ति हेतु भारत से रक्षा उत्पादों को हासिल करने के लिए प्रोत्साहन मिला है।

• रणनीतिक साझेदारी (एसपी) मॉडल (2017) भारतीय फर्मों को वैश्विक ओईएम के साथ जुड़ने की अनुमति देता है, जिससे भारत में प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और संयुक्त बुनियादी ढांचे का निर्माण संभव हो पाया है।

अंतरराष्ट्रीय रक्षा सहयोग

भारत ने घरेलू मैन्यूफैक्चरिंग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से विभिन्न समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं। विशेषकर, रूस के साथ हुआ 2019 का अंतर-सरकारी समझौता भारत में रूसी-निर्मित प्लेटफार्मों के लिए पुर्जों के संयुक्त उत्पादन को संभव बनाता है, जिससे आयात पर निर्भरता कम होती है और संचालन संबंधी तैयारी बेहतर होती है।

रक्षा क्षेत्र में व्यवसाय करने में आसानी

विभिन्न प्रक्रियाओं को सरल बनाया गया है:

• कई पुर्जों/घटकों के लिए औद्योगिक लाइसेंस की जरूरत को खत्म कर दिया गया है।

• लाइसेंस की वैधता 3 वर्ष से बढ़ाकर 15 वर्ष कर दी गई है (3 वर्ष के विस्तार के साथ)।

• अनुसंधान एवं विकास (आरएंडडी) को उद्योग जगत, स्टार्ट-अप और शिक्षा जगत के लिए खोल दिया गया है और रक्षा क्षेत्र से संबंधित अनुसंधान एवं विकास के बजट का 25 प्रतिशत हिस्सा उनके लिए निर्धारित किया गया है।

तकनीक और एआई का समावेश

रक्षा प्रणालियों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के समावेश को बढ़ावा देने के उद्देश्य से सरकार ने रक्षा एआई परिषद (डीएआईसी) और रक्षा एआई परियोजना एजेंसी (डीएआईपीए) का गठन किया है। प्रत्येक डीपीएसयू ने एआई से संबंधित खाका को अंतिम रूप दिया।  

डीआरडीओ ने अनुसंधान के लिए नौ प्रमुख क्षेत्रों की पहचान की है: प्लेटफार्म, हथियार प्रणालियां, सामरिक प्रणालियां, सेंसर एवं संचार, अंतरिक्ष, साइबर सुरक्षा, एआई एवं रोबोटिक्स, सामग्री एवं  उपकरण, तथा सैनिक सहायता।सीमा पार आतंकवाद के विरुद्ध कार्रवाई

Operation Sindoor: Know what India has achievedभारत ने सीमा पार आतंकवाद के विरुद्ध एक दृढ़ और स्पष्ट दृष्टिकोण अपनाया है। पिछले एक दशक के दौरान की गई कार्रवाई का पैटर्न इसी नीति को दर्शाता है। वर्ष 2016 में उरी हमले के बाद, भारत ने नियंत्रण रेखा के पार सर्जिकल स्ट्राइक की। वर्ष 2019 में पुलवामा हमले के बाद, भारत ने बालाकोट में एक आतंकवादी शिविर पर सटीक हवाई हमले किए।

सबसे हालिया और निर्णायक कार्रवाई मई 2025 में ऑपरेशन सिंदूर के रूप में की गई। पहलगाम में आम नागरिकों की हत्या के जवाब में, भारत ने अपने सशस्त्र बलों को कार्रवाई करने की पूरी आजादी दी। ड्रोन और सटीक हथियारों का उपयोग करते हुए, उन्होंने पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू एवं कश्मीर में नौ आतंकवादी शिविरों पर हमला किया। कुल 100 से अधिक आतंकवादियों का सफाया कर दिया गया, जिनमें आईसी-814 अपहरण और पुलवामा हमले से जुड़े लोग भी शामिल थे। पाकिस्तान ने ड्रोन और मिसाइलों से जवाबी हमले करने की कोशिश की, लेकिन भारतीय ड्रोन-रोधी प्रणालियों ने उन्हें नाकाम कर दिया।

वर्ष 2025 के स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर दिए गए अपने संबोधन में, प्रधानमंत्री मोदी ने ऑपरेशन सिंदूर को “एक नया मानदंड” बताया, जिससे यह स्पष्ट हो गया कि जब भी आतंकवाद भारत के नागरिकों के लिए खतरा बनेगा, तो भारत पूरी ताकत से जवाब देगा।पाकिस्तान के संदर्भ में प्रधानमंत्री मोदी के पांच नए मानदंड

प्रधानमंत्री मोदी ने पाकिस्तान से निपटने को लेकर निरंतर स्पष्ट सीमाएं निर्धारित की हैं। ये पांच लाल रेखाएं अब भारत के दृष्टिकोण को परिभाषित करती हैं:

• आतंकवादी हमलों का करारा जवाब – भारत पर किसी भी हमले का निर्णायक जवाब दिया जाएगा।

• परमाणु ब्लैकमेल को सहन नहीं किया जाएगा – परमाणु हमले की धमकियां भारत को आतंकवादियों के ठिकानों पर हमला करने से नहीं रोक सकेंगी।

• आतंकवादियों और उनके प्रायोजकों के बीच कोई भेद नहीं – दोनों को समान रूप से जवाबदेह ठहराया जाएगा।

• किसी भी वार्ता में पहले आतंकवाद पर चर्चा – यदि पाकिस्तान के साथ कोई बातचीत होती है, तो वह केवल आतंकवाद या पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर पर केन्द्रित होगी।

• संप्रभुता से बिल्कुल कोई समझौता नहीं – “आतंकवाद और वार्ता साथ-साथ नहीं चल सकते, आतंकवाद और व्यापार साथ-साथ नहीं चल सकते, तथा खून और पानी साथ-साथ नहीं बह सकते।”सुदर्शन चक्र मिशन

तात्कालिक कार्रवाइयों से परे, मोदी सरकार दीर्घकालिक खतरों से निपटने की भी तैयारी कर रही है। वर्ष 2025 के स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर दिए गए अपने भाषण में, प्रधानमंत्री मोदी ने एक भविष्योन्मुखी रक्षा कार्यक्रम, सुदर्शन चक्र मिशन की घोषणा की। इस मिशन के तीन लक्ष्य हैं: यह सुनिश्चित करना कि पूरी प्रणाली का अनुसंधान, विकास और निर्माण भारत में ही हो; भविष्यसूचक तकनीकों के जरिए भावी युद्ध के परिदृश्यों का पूर्वानुमान लगाना; और जवाबी कार्रवाई हेतु सटीक व लक्षित प्रणालियों का निर्माण करना। इस मिशन का उद्देश्य 2035 तक सामरिक और नागरिक, दोनों प्रकार की परिसंपत्तियों के लिए एक व्यापक राष्ट्रीय सुरक्षा कवच प्रदान करना है।घरेलू मो र्चे को सुरक्षित बनाना

इस सरकार के कार्यकाल में आंतरिक सुरक्षा के मामले में भी उल्लेखनीय प्रगति हुई है। वामपंथी उग्रवाद (एलडब्ल्यूई), जो कभी एक गंभीर चुनौती हुआ करता था, अब नियंत्रण में है। वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित जिलों की संख्या घटकर बीस से भी कम रह गई है। पिछले एक दशक में 8,000 से अधिक नक्सलियों ने हिंसा का रास्ता छोड़ दिया है। उग्रवादी हिंसा की घटनाएं, जो 2010 में 1,936 थीं, 2024 में घटकर 374 रह गईं। इसी अवधि में नागरिकों और सुरक्षा बलों के हताहत होने की संख्या में 85 प्रतिशत की कमी आई।

ये परिणाम न केवल सुरक्षा अभियानों की सफलता को दर्शाते हैं, बल्कि उन क्षेत्रों में विकास एवं शासन पर ध्यान केन्द्रित करने पर दिए गए जोर को भी दर्शाते हैं जो कभी विकास से कटे हुए थे। सड़कों, संचार व्यवस्था व स्कूलों के विकास और कल्याणकारी उपायों ने चरमपंथियों  की जमीन खिसका दी है। रक्षा क्षेत्र  से परे आत्मनिर्भरता

आत्मनिर्भरता की दिशा में भारत का सफर रक्षा क्षेत्र से आगे बढ़कर खाद्य, स्वास्थ्य, ऊर्जा, प्रौद्योगिकी और वित्तीय समावेशन तक जा पहुंचा है। प्रधानमंत्री मोदी ने इस बात पर जोर दिया है कि राष्ट्रीय सुरक्षा में अब ये महत्वपूर्ण क्षेत्र भी शामिल हैं ताकि यह सुनिश्चित हो कि देश वैश्विक चुनौतियों का सामना करने में सक्षम बना रहे और 2030 तक दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़े।

वित्तीय समावेशन

• मार्च 2025 के लिए आरबीआई का वित्तीय समावेशन सूचकांक (एफआई-इंडेक्स): 67.02021 से 24.3 प्रतिशत की वृद्धि

• संयुक्त राष्ट्र के 17 सतत विकास लक्ष्यों में से 7 के एक प्रमुख प्रवर्तक के रूप में मान्यता प्राप्त

• ग्लोबल फाइंडेक्स 2025 (विश्व बैंक): 2011 से भारत में खाता स्वामित्व 89 प्रतिशत है, और सक्रिय उपयोग में वृद्धि हो रही है

  • प्रधानमंत्री जन धन योजना (पीएमजेडीवाई):
o लाभार्थी: 56.04 करोड़ (14.08.2025 तक)
o शेष: 2.64 लाख करोड़ रुपये 
o महिलाएं: कुल खाताधारकों का लगभग 55 प्रतिशत 

खाद्य सुरक्षा और किसान कल्याण

खाद्यान्न उत्पादन: 246.42 एमटी (2013-14) → 353.96 एमटी (2024-25, तीसरा अग्रिम अनुमान)
पीएम-किसान (2019 में शुरू): किसानों को 3 किस्तों में 6,000 रुपये प्रतिवर्ष
 o अगस्त 2025 तक कुल वितरित: 20 किस्तों में 3.90 लाख करोड़ रुपये
पीएम गरीब कल्याण अन्न योजना: 81 करोड़ लोग मुफ्त खाद्यान्न प्राप्त कर रहे हैं

नीली क्रांति (मत्स्य पालन)

• मछली उत्पादन: 96 लाख टन (2013-14) → 195 लाख टन (2024-25)104 प्रतिशत की वृद्धि
• अंतर्देशीय मत्स्य पालन: 61 लाख टन → 147.37 लाख टन (↑142%)
केन्द्रीय बजट 2025-26: मत्स्य पालन के लिए 2,703.67 करोड़ रुपये का आवंटन, अब तक का सर्वाधिक, 2024-25 से 3.3 प्रतिशत अधिक

डेयरी क्षेत्र

• भारत दूध उत्पादन में विश्व में प्रथम स्थान पर है, जो वैश्विक उत्पादन में 25 प्रतिशत का योगदान देता है
• दूध उत्पादन: 146.30 एमटी  (2014-15) → 239.30 एमटी (2023-24) → ↑63.57 प्रतिशत 
• औसत वार्षिक वृद्धि: 5.7 प्रतिशत (वैश्विक औसत 2 प्रतिशत की तुलना में)

प्रौद्योगिकी और नवाचार

भारत सेमीकंडक्टर मिशन (आईएसएम): 76,000 करोड़ रुपये के परिव्यय के साथ 2021 में शुरुआत 
• 2023–25: 1.60 लाख करोड़ रुपये के निवेश के साथ 6 राज्यों में 10 परियोजनाओं को मंजूरी दी गई
• 2025: भारत ने नोएडा और बेंगलुरु में पहले 3-नैनोमीटर चिप डिजाइन केन्द्रों का उद्घाटन किया। वैश्विक निवेशक शिखर सम्मेलन 2025 में, यह घोषणा की गई कि भारत की पहली स्वदेशी सेमीकंडक्टर चिप इस वर्ष उत्पादन के लिए तैयार हो जाएगी।

निष्कर्ष

मोदी सरकार के तहत भारत की रक्षा एवं आंतरिक सुरक्षा की स्थिति में मजबूती व स्पष्टता आई है और आत्मनिर्भरता की दिशा में एक निर्णायक बदलाव आया है। रक्षा क्षेत्र में रिकॉर्ड निवेश, स्वदेशी उत्पादन में तेज वृद्धि, साहसिक सुधारों और उभरती प्रौद्योगिकियों के समावेश के साथ, भारत रक्षा उपकरणों के एक प्रमुख आयातक से हटकर एक उभरते वैश्विक निर्यातक के रूप में सामने आ रहा है। आतंकवाद के विरुद्ध सख्त रवैया, पाकिस्तान के मामले में नए मानदंडों की स्पष्ट अभिव्यक्ति और सुदर्शन चक्र मिशन जैसी भविष्योन्मुखी पहल एक दूरदर्शी सुरक्षा सिद्धांत को रेखांकित करती हैं।

साथ ही आंतरिक स्थिरता, खाद्य एवं ऊर्जा सुरक्षा, वित्तीय समावेशन और प्रौद्योगिकीय नवाचार में हुई प्रगति इस बात को दर्शाती है कि आत्मनिर्भरता केवल रक्षा तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यह सुदृढ़ और आत्मविश्वास से भरे एक ऐसे भारत की नींव रखती है, जो वैश्विक स्तर पर अग्रणी बनने की अपनी राह में आने वाली पारंपरिक व गैर-पारंपरिक, दोनों किस्म की चुनौतियों का डटकर सामना करने के लिए तैयार है।

यह क्रांतिकारी बदलाव आने वाले वर्षों में देश को हर दृष्टि से विकसित भारत बनाने के सरकार के दृढ़ संकल्प को दर्शाता है। यह इस बात की भी पुष्टि करता है कि यह सरकार केवल बयानबाजी में ही विश्वास नहीं रखती, बल्कि उसने वास्तव में भारत को विकसित बनाने के लिए हर जरूरी काम किया है और कर रही है।

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Transformation of India’s Defence and Internal Security Posture

Introduction

In the last eleven years, India’s defence and internal security posture under the government of PM Narendra Modi has undergone a profound transformation. The shift has been marked by greater clarity of purpose, stronger deterrence, and a sustained drive for self-reliance. This government has consistently underlined that national security is non-negotiable, and to ensure this security India will build her own capacity and preparedness. This has resulted in a more confident, modern, and proactive approach to challenges both external and internal. Unlike in the past, India under the present Government has become a global force to reckon with, a nation that speaks on issues from a position of strength.

Strengthening Defence Capacity

India’s defence expenditure has steadily increased under the present Government, rising from ₹2.53 lakh crore in 2013–14 to ₹6.81 lakh crore in 2025–26. The focus is no longer only on acquiring weapons but also on building domestic capacity. In 2024–25, defence production touched a record ₹1.50 lakh crore, more than triple the 2014–15 level. Fighter jets, missile systems, artillery systems, warships, naval vessels, aircraft carriers and a lot more are now being made in India, underlining how strongly self-reliance and deterrence have become the cornerstone of national security. Defence exports grew thirty-four times over the last decade, reaching ₹23,622 crore in 2024–25. Indian equipment is now exported to over 100 nations, including the United States, France, and Armenia.

This success is a result of both reform and innovation. By streamlining regulations, opening up opportunities for private players, and prioritising indigenisation, the government has ensured that India is no longer only a large defence importer but also a rising exporter. It also clearly demonstrates the intent of the government that India will never be dependent on any other country for her security.

Self-Reliance through Defence Acquisition & Indigenisation Reforms

India’s defence policy in the last decade has been guided by the principle of Atmanirbharta. Prime Minister Modi led government has pushed through structural reforms to reduce import dependence, boost indigenous production, and build a globally competitive defence ecosystem. The reforms span procurement, research, industry participation, and foreign investment.

Defence Acquisition Procedure (DAP) 2020 and Indian-IDDM

The Defence Acquisition Procedure 2020, revised from DPP 2016, aligned fully with the Aatmanirbhar Bharat Abhiyan spearheaded by PM Modi. It prioritises the Buy (Indian – Indigenously Designed, Developed and Manufactured) category for acquisitions, ensuring maximum reliance on local design, development, and manufacturing. This shift places Indian-IDDM projects at the top of the procurement pyramid.

Simplified ‘Make’ Procedure

The Make procedure was streamlined to encourage Indian industry to participate in design, development & manufacturing of Defence platforms/systems. Projects under the Make categories, with procurement upto Rs 100 Cr/year are earmarked for MSMEs.

  • Make-I: Government funds up to 70% of development costs or maximum Rs. 250 Cr per Development Agency (DA)
  • Make-II: Industry-funded projects with relaxed eligibility, acceptance of suo-moto proposals from industry and assurance of orders to L1 Development Agency on successful prototype development.
  • Make-III: Manufactured in India through ToT/collaboration with foreign OEMs.

So far, 146 projects of Army, Navy, Air Force & HQ IDS have been accorded ‘Approval in Principle’ under various ‘Make’ categories.

Liberalised FDI

To attract capital and advanced technology, FDI in defence was liberalised:

  • 74% permitted via automatic route for new industrial licences.
  • Up to 100% allowed through government approval in cases involving advanced technology.

Innovation Push: iDEX and TDF

  • Innovations for Defence Excellence (iDEX), launched in 2018, supports start-ups, MSMEs, and academia with grants for defence innovation.
  • Technology Development Fund (TDF) provides grants up to ₹10 crore for MSMEs and start-ups to build advanced defence and aerospace technologies.

Indigenisation Portals and Positive Lists

The SRIJAN Portal (2020) enables industry to locally develop items earlier imported. To date, over 46,798 items have been listed.

Positive Indigenisation Lists by DPSUs have identified 5,012 items (across five tranches), signalling a phased ban on imports.

  • First List: 2,851 items
  • Second List: 107 items
  • Third List: 780 items
  • Fourth List: 928 items
  • Fifth List: 346 items

Offsets and Strategic Partnerships

  • The Offset Portal (2019) has enhanced transparency in offset contracts, encouraging OEMs to invest in Indian manufacturing and sourcing defence products from India for global supplies.
  • The Strategic Partnership (SP) Model (2017) allows Indian firms to tie up with global OEMs, enabling technology transfer and joint infrastructure creation in India.

International Defence Cooperation

India has signed multiple agreements to support domestic manufacturing. Notably, the 2019 Inter-Governmental Agreement with Russia enables joint production of spares for Russian-origin platforms in India, reducing dependence on imports and improving operational readiness.

Ease of Doing Business in Defence

Procedures have been simplified:

  • Industrial licence requirements for many parts/components have been removed.
  • Licence validity extended from 3 to 15 years (with 3-year extension).
  • R&D has been opened to industry, start-ups, and academia, with 25% of the defence R&D budget earmarked for them.

Technology and AI Adoption

The government created the Defence AI Council (DAIC) and Defence AI Project Agency (DAIPA) to promote adoption of artificial intelligence in defence systems. Each DPSU has finalised an AI roadmap.

DRDO has identified nine thrust areas for research: Platforms, Weapon Systems, Strategic Systems, Sensors & Communication, Space, Cyber Security, AI & Robotics, Materials & Devices, and Soldier Support.

Responding to Cross-Border Terror

Operation Sindoor: Know what India has achievedIndia has adopted a firm and clear approach towards cross-border terrorism. The pattern of action over the last decade reflects this policy. After the Uri attack in 2016, India carried out surgical strikes across the Line of Control. Following the Pulwama attack in 2019, India launched precision air strikes on a terrorist camp in Balakot.

The most recent and defining operation came in May 2025 with Operation Sindoor. In response to the killing of civilians in Pahalgam, India gave its armed forces full freedom of action. Using drones and precision munitions, they struck nine terrorist camps in Pakistan and Pakistan-occupied Jammu and Kashmir. More than one hundred terrorists were eliminated, including individuals linked to the IC-814 hijacking and the Pulwama attack. Pakistan attempted retaliatory strikes through drones and missiles, but Indian counter-drone systems neutralised them.

In his Independence Day address of 2025, PM Modi described Operation Sindoor as “a new normal,” making it clear that India will respond with full force whenever terrorism threatens its citizens.

Prime Minister Modi’s Five ‘New Normals’ on Pakistan

PM Modi has repeatedly laid down clear boundaries in dealing with Pakistan. These five red lines now define India’s approach:

  • Firm response to terror attacks – Any attack on India will be met with a decisive reply.
  • No tolerance for nuclear blackmail – Nuclear threats will not prevent India from striking terrorist bases.
  • No distinction between terrorists and their sponsors – Both will be held equally accountable.
  • Terrorism first in any talks – Engagement with Pakistan, if it happens, will focus only on terrorism or Pakistan-occupied Kashmir.
  • Zero compromise on sovereignty – “Terror and talks cannot go together, terror and trade cannot go together, and blood and water cannot flow together.”

The Sudarshan Chakra Mission

Beyond immediate responses, the Modi government is preparing for long-term threats. In his 2025 Independence Day speech, PM Modi announced the Sudarshan Chakra Mission, a futuristic defence programme. Its goals are threefold: to ensure the entire system is researched, developed, and manufactured in India; to anticipate future warfare scenarios through predictive technologies; and to create precise, targeted systems for counter-action. By 2035, the aim is to provide a comprehensive national security shield for both strategic and civilian assets.

Securing the Home Front

Internal security has also seen significant gains under this government. Left-Wing Extremism (LWE), once a severe challenge, has been brought under control. The number of affected districts has fallen to fewer than twenty. More than 8,000 Naxalites have abandoned violence in the last decade. Incidents of extremist violence, which stood at 1,936 in 2010, dropped to 374 in 2024. Civilian and security force casualties fell by 85 percent in the same period.

These results reflect not just security operations but also the focus on development and governance in areas once cut off from growth. Roads, communication, schools, and welfare measures have reduced the ground for extremist mobilisation.

Atmanirbharta Beyond Defence

India’s journey of self-reliance has expanded beyond defence into food, health, energy, technology, and financial inclusion. Prime Minister Modi has emphasised that national security now includes these vital sectors, ensuring that the nation remains resilient against global challenges while steadily moving towards becoming the world’s third-largest economy by 2030.

Financial Inclusion

  • RBI’s Financial Inclusion Index (FI-Index) for March 2025: 67.0, up 24.3% since 2021.
  • Recognised as a key enabler for 7 out of 17 UN Sustainable Development Goals.
  • Global Findex 2025 (World Bank): Account ownership in India at 89% since 2011, with rising active usage.
  • Pradhan Mantri Jan Dhan Yojana (PMJDY):
    • Beneficiaries: 56.04 crore (as on 14.08.2025)
    • Balance: 2.64 lakh crore
    • Women: ~55% of account holders

Food Security and Farmer Welfare

  • Foodgrain production: 246.42 MT (2013–14) → 353.96 MT (2024–25, 3rd AE).
  • PM-KISAN (launched 2019): ₹6,000/year to farmers in 3 installments.
    • Total disbursed till Aug 2025: 3.90 lakh crore across 20 installments.
  • PM Garib Kalyan Anna Yojana: 81 crore people receiving free food grains.

Dairy Sector

  • India ranks 1st in world in milk production, contributing 25% of global output.
  • Milk production: 146.30 MT (2014–15) → 239.30 MT (2023–24) → 63.57%.
  • Average annual growth: 5.7% (vs global average of 2%).

Technology & Innovation

  • India Semiconductor Mission (ISM): launched 2021 with 76,000 crore outlay.
  • 2023–25: 10 projects approved across 6 states with 1.60 lakh crore investment.
  • 2025: India inaugurated first 3-nanometer chip design centres in Noida & Bengaluru. At the Global Investors Summit 2025, it was announced that India’s first indigenous semiconductor chip would be ready for production this year.

Blue Revolution (Fisheries)

  • Fish production: 96 lakh tonnes (2013–14) → 195 lakh tonnes (2024–25) → 104% growth.
  • Inland fisheries: 61 lakh tonnes → 147.37 lakh tonnes (↑142%).
  • Union Budget 2025–26: ₹2,703.67 crore allocation to fisheries, highest-ever, up 3.3% from 2024–25.

Conclusion

India’s defence and internal security posture under the Modi government reflects a decisive shift towards strength, clarity, and self-reliance. With record investments in defence, rapid growth in indigenous production, bold reforms, and the adoption of emerging technologies, India has transitioned from being a major importer to a rising global exporter of defence equipment. Firm responses to terrorism, the clear articulation of new normal with Pakistan, and futuristic initiatives like the Sudarshan Chakra Mission underscore a forward-looking security doctrine.

At the same time, progress in internal stability, food and energy security, financial inclusion, and technology innovation demonstrates that Atmanirbharta is not confined to defence alone but forms the foundation of a resilient and confident India prepared to meet both traditional and non-traditional challenges on its path to becoming a global leader.

This tectonic shift reflects the deep resolve of the government to see the country as Viksit Bharat in every sense in the years to come. It also reaffirms that this government does not merely believe in rhetoric but has actually done and is continuing to do what it takes to make India Viksit.

ہندوستان کی دفاعی اور داخلی سلامتی کی پوزیشن میں تبدیلی

تعارف

پچھلے گیارہ سالوں میں ، وزیر اعظم نریندر مودی کی حکومت کے تحت ہندوستان کی دفاعی اور داخلی سلامتی کی حالت میں زبردست تبدیلی آئی ہے ۔  اس تبدیلی کو مقصد کی زیادہ وضاحت ، مضبوط روک تھام  اور خود انحصاری کے لیے ایک مستقل مہم کے طور پر سمجھا گیا ہے ۔ اس حکومت نے مستقل طور پر اس بات پر زور دیا ہے کہ قومی سلامتی پر کوئی سمجھوتہ نہیں کیا جا سکتا اور اس سلامتی کو یقینی بنانے کے لیے ہندوستان اپنی خود  کی صلاحیت اور تیاریوں کو بڑھائے گا ۔  اس کے نتیجے میں بیرونی اور اندرونی دونوں طرح کے چیلنجوں کے لیے زیادہ پراعتماد ، جدید اور فعال نقطہ نظر سامنے آیا ہے ۔  ماضی کے برعکس ، موجودہ حکومت کے تحت ہندوستان ایک عالمی طاقت بن گیا ہے ، ایک ایسا ملک جو طاقت کی پوزیشن سے مسائل پر بات کرتا ہے ۔

دفاعی صلاحیت کو مضبوط کرنا

موجودہ حکومت کے تحت ہندوستان کے دفاعی اخراجات میں مسلسل اضافہ ہوا ہے ، جو 14-2013 میں 2.53 لاکھ کروڑ روپے سے بڑھ کر 26-2025 میں 6.81 لاکھ کروڑ روپے ہو گئے ہیں۔  اب توجہ صرف ہتھیار حاصل کرنے پر نہیں بلکہ گھریلو صلاحیت سازی پر بھی مرکوز ہے ۔  25-2024 میں دفاعی پیداوار ریکارڈ 1.50 لاکھ کروڑ روپے تک پہنچ گئی ، جو 15-2014 کی سطح سے تین گنا زیادہ ہے ۔  لڑاکا طیارے ، میزائل نظام ، توپ خانے کے نظام ، جنگی جہاز ، بحری جہاز ، طیارہ بردار بحری جہاز اور بہت کچھ اب ہندوستان میں بنائے جا رہے ہیں ، جو اس بات کی نشاندہی کرتے ہیں کہ کس طرح مضبوطی سے خود انحصاری اور ڈیٹرنس (روک تھام) قومی سلامتی کا سنگ بنیاد بن چکی ہے۔  دفاعی برآمدات میں گزشتہ دہائی کے دوران چونتیس گنا اضافہ ہوا ، جو 25-2024 میں 23,622 کروڑ روپے تک پہنچ گئی۔  ہندوستانی سازوسامان اب امریکہ ، فرانس اور آرمینیائی سمیت 100 سے زیادہ ممالک کو برآمد کیا جاتا ہے ۔

یہ کامیابی اصلاحات اور اختراع دونوں کا نتیجہ ہے۔  ضابطوں کو ہموار کرکے ، نجی کھلاڑیوں کے لیے مواقع کھول کر  اور مقامی کاری کو ترجیح دے کر ، حکومت نے اس بات کو یقینی بنایا ہے کہ ہندوستان اب نہ صرف ایک بڑا دفاعی درآمد کنندہ ہے بلکہ ایک بڑھتا ہوا برآمد کنندہ بھی ہے ۔  یہ حکومت کے ارادے کو بھی واضح طور پر ظاہر کرتا ہے کہ ہندوستان اپنی سلامتی کے لیے کبھی کسی دوسرے ملک پر انحصار نہیں کرے گا ۔

دفاعی حصول اور مقامی اصلاحات کے ذریعے خود کفالت

پچھلی دہائی میں ہندوستان کی دفاعی پالیسی آتم نربھرتا کے اصول پر مبنی رہی ہے ۔  وزیر اعظم مودی کی قیادت والی حکومت نے درآمدی انحصار کو کم کرنے ، مقامی پیداوار کو فروغ دینے اور عالمی سطح پر مسابقتی دفاعی ماحولیاتی نظام کی تعمیر کے لیے ساختی اصلاحات کو آگے بڑھایا ہے ۔  ان اصلاحات میں خریداری ، تحقیق ، صنعت کی شرکت اور غیر ملکی سرمایہ کاری شامل ہیں ۔

دفاعی حصول کا طریقہ کار (ڈی اے پی) 2020 اور ہندوستانی- آئی ڈی ڈی ایم

ڈی پی پی 2016 سے نظر ثانی شدہ دفاعی حصول کے طریقہ کار 2020 ، وزیر اعظم مودی کی قیادت میں آتم نربھر بھارت ابھیان کے ساتھ مکمل طور پر ہم آہنگ ہے ۔  یہ حصول کے لیے خرید (ہندوستانی-مقامی طور پر ڈیزائن کردہ ، تیار کردہ اور پیداکردہ) زمرے کو ترجیح دیتا ہے، جس سے مقامی ڈیزائن، ترقی اور مینوفیکچرنگ پر زیادہ سے زیادہ انحصار کو یقینی بنایا جاتا ہے۔  یہ تبدیلی ہندوستانی-آئی ڈی ڈی ایم پروجیکٹوں کو خریداری کے اہرام میں سب سے اوپر رکھتی ہے ۔

آسان ’میک‘ طریقہ کار

میک کے طریقہ کار کو ہندوستانی صنعت کو دفاعی پلیٹ فارمز/سسٹمز کے ڈیزائن ، ترقی اور مینوفیکچرنگ میں حصہ لینے کی ترغیب دینے کے لیے ہموار کیا گیا تھا ۔  میک زمرے کے تحت 100 کروڑ روپے/سال تک کی خریداری والے پروجیکٹ ایم ایس ایم ای کے لیے مختص کیے گئے ہیں ۔

میک-I: حکومت ترقیاتی اخراجات کا 70فیصد یا زیادہ سے زیادہ 250 کروڑ روپےفی ترقیاتی ایجنسی (ڈی اے)فنڈ کرتی ہے۔

میک-II: صنعت کی مالی اعانت سے چلنے والے منصوبے جن میں اہلیت میں نرمی ہو ، صنعت سے از خود تجاویز کی قبولیت اور کامیاب پروٹو ٹائپ ڈیولپمنٹ پر ایل1 ڈیولپمنٹ ایجنسی کو احکامات کی یقین دہانی ۔

میک-III: ٹی او ٹی/غیر ملکی او ای ایم کے ساتھ تعاون کے ذریعے ہندوستان میں تیار کیا گیا ۔

اب تک فوج ، بحریہ ، فضائیہ اور ہیڈکوارٹر آئی ڈی ایس کے 146 پروجیکٹوں کو ’میک‘ کے مختلف زمروں کے تحت ’اصولی منظوری‘ دی جا چکی ہے ۔

آزاد ایف ڈی آئی

سرمایہ اور جدید ٹیکنالوجی کو راغب کرنے کے لیے دفاع میں ایف ڈی آئی کو آزاد کیا گیا:

74فیصد نئے صنعتی لائسنسوں کے لیے خودکار روٹ کے ذریعے اجازت ۔

اعلیٰ درجے کی ٹیکنالوجی سے متعلق معاملات میں حکومت کی منظوری کے ذریعے 100فیصد  تک کی اجازت ہے ۔

انوویشن پش: آئی ڈی ای ایکس اور ٹی ڈی ایف

2018 میں شروع کی گئی انوویشنز فار ڈیفنس ایکسی لینس (آئی ڈی ای ایکس) دفاعی اختراعات کے لیے گرانٹ کے ساتھ اسٹارٹ اپس ، ایم ایس ایم ایز اور اکیڈمیا کی مدد کرتی ہے ۔

ٹیکنالوجی ڈیولپمنٹ فنڈ (ٹی ڈی ایف) جدید دفاعی اور ایرو اسپیس ٹیکنالوجیز کی تعمیر کے لیے ایم ایس ایم ای اور اسٹارٹ اپس کے لیے 10 کروڑ روپے تک کی گرانٹ فراہم کرتا ہے ۔

مقامی پورٹل اور مثبت فہرستیں

سریجن پورٹل (2020) صنعت کو پہلے درآمد شدہ اشیاء کو مقامی طور پر تیار کرنے کے قابل بناتا ہے ۔  اب تک 46,798 سے زیادہ اشیاء درج فہرست کی جا چکی ہیں ۔

ڈی پی ایس یوز کی طرف سے مثبت مقامی فہرستوں میں 5,012 اشیاء (پانچ قسطوں میں) کی نشاندہی کی گئی ہے جو درآمدات پر مرحلہ وار پابندی کا اشارہ ہے ۔

پہلی فہرست: 2,851 اشیاء

دوسری فہرست: 107 اشیاء

تیسری فہرست: 780 اشیاء

چوتھی فہرست: 928 اشیاء

پانچویں فہرست: 346 اشیاء

آفسیٹ اور اسٹریٹجک شراکت داری

آفسیٹ پورٹل (2019) نے آفسیٹ معاہدوں میں شفافیت کو بڑھایا ہے ، او ای ایم کو ہندوستانی مینوفیکچرنگ میں سرمایہ کاری کرنے اور عالمی سپلائی کے لیے ہندوستان سے دفاعی مصنوعات حاصل کرنے کی ترغیب دی ہے ۔

اسٹریٹجک پارٹنرشپ (ایس پی) ماڈل (2017) ہندوستانی فرموں کو عالمی او ای ایم کے ساتھ معاہدہ کرنے کی اجازت دیتا ہے ، جس سے ہندوستان میں ٹیکنالوجی کی منتقلی اور مشترکہ بنیادی ڈھانچے کی تخلیق ممکن ہوتی ہے ۔

بین الاقوامی دفاعی تعاون

ہندوستان نے گھریلو مینوفیکچرنگ کی حمایت کے لیے متعدد معاہدوں پر دستخط کیے ہیں ۔  قابل ذکر بات یہ ہے کہ روس کے ساتھ 2019 کا بین حکومتی معاہدہ ہندوستان میں روسی نژاد پلیٹ فارمز کے لیے پرزوں کی مشترکہ پیداوار کے قابل بناتا ہے ، جس سے درآمدات پر انحصار کم ہوتا ہے اور آپریشنل تیاری میں بہتری آتی ہے ۔

دفاع میں کاروبار کرنے میں آسانی

طریقہ کار کو آسان بنایا گیا ہے:

بہت سے پرزوں/اجزاء کے لیے صنعتی لائسنس کی ضروریات کو ختم کر دیا گیا ہے ۔

لائسنس کی میعاد 3 سے 15 سال تک بڑھا دی گئی (3 سال کی توسیع کے ساتھ)

تحقیق و ترقی کو صنعت ، اسٹارٹ اپس اور تعلیمی اداروں کے لیے کھول دیا گیا ہے ، جس کے لیے دفاعی تحقیق و ترقی کے بجٹ کا 25فیصد مختص کیا گیا ہے ۔

ٹیکنالوجی اور اے آئی اپنانا

حکومت نے دفاعی نظاموں میں مصنوعی ذہانت کو اپنانے کو فروغ دینے کے لیے ڈیفنس اے آئی کونسل (ڈی اے آئی سی) اور ڈیفنس اے آئی پروجیکٹ ایجنسی (ڈی اے آئی پی اے) بنائی ۔  ہر ڈی پی ایس یو نے اے آئی روڈ میپ کو حتمی شکل دی ہے ۔

ڈی آر ڈی او نے تحقیق کے لیے نو اہم شعبوں کی نشاندہی کی ہے: پلیٹ فارم ، ویپن سسٹم ، اسٹریٹجک سسٹم ، سینسرز اینڈ کمیونیکیشن ، اسپیس ، سائبر سیکیورٹی ، اے آئی اینڈ روبوٹکس ، میٹریلز اینڈ ڈیوائسز  اور سولجر سپورٹ ۔

سرحد پار دہشت گردی کا جواب

 بھارت نے سرحد پار دہشت گردی کے تئیں پختہ اور واضح نقطہ نظر اپنایا ہے۔  پچھلی دہائی کے دوران کارروائی  کا طرزاس پالیسی کی عکاسی کرتا ہے ۔  2016 میں اڑی حملے کے بعد، ہندوستان نے لائن آف کنٹرول کے پار سرجیکل اسٹرائیک کیے ۔  2019 میں پلوامہ حملے کے بعد ، ہندوستان نے بالاکوٹ میں ایک دہشت گرد کیمپ پر کامیاب فضائی حملے کیے ۔

تازہ ترین اور واضح آپریشن مئی 2025 میں آپریشن سندور کے ساتھ ہوا ۔  پہلگام میں شہریوں کے قتل کے جواب میں ، ہندوستان نے اپنی مسلح افواج کو کارروائی کی مکمل آزادی دی ۔  مسلح افواج نے ڈرون اور گولہ بارود کا استعمال کرتے ہوئے ، پاکستان اور پاکستان کے زیر قبضہ جموں و کشمیر میں نو دہشت گرد کیمپوں کو نشانہ بنایا ۔  ایک سو سے زیادہ دہشت گردوں کو ختم کر دیا گیا ، جن میں آئی سی-814 ہائی جیکنگ اور پلوامہ حملے سے وابستہ افراد بھی شامل تھے ۔  پاکستان نے ڈرون اور میزائلوں کے ذریعے جوابی حملوں کی کوشش کی ، لیکن ہندوستانی جوابی ڈرون نظام نے انہیں بے اثر کر دیا ۔

2025 کے اپنے یوم آزادی کے خطاب میں ، وزیر اعظم مودی نے آپریشن سندور کو ’’ایک نیا معمول‘‘ قرار دیا ، جس میں یہ واضح کیا گیا کہ جب بھی دہشت گردی اپنے شہریوں کو خطرہ بنائے گی تو ہندوستان پوری طاقت سے جواب دے گا ۔

پاکستان کے بارے میں وزیر اعظم مودی کے پانچ ’نئے معمول‘

وزیر اعظم مودی نے پاکستان کے ساتھ معاملات میں بار بار واضح حدود طے کی ہیں ۔  یہ پانچ سرخ لکیریں اب ہندوستان کے نقطہ نظر کی وضاحت کرتی ہیں:

دہشت گردانہ حملوں کا پختہ جواب-ہندوستان پر کسی بھی حملے کا فیصلہ کن جواب دیا جائے گا ۔

جوہری بلیک میل کے لیے کوئی رواداری نہیں-جوہری دھمکیاں ہندوستان کو دہشت گرد اڈوں پر حملہ کرنے سے نہیں روکیں گی ۔

دہشت گردوں اور ان کے اسپانسرز کے درمیان کوئی فرق نہیں-دونوں کو یکساں طور پر جوابدہ ٹھہرایا جائے گا ۔

کسی بھی مذاکرات میں دہشت گردی سب سے پہلے-پاکستان کے ساتھ بات چیت، اگر ہوتی ہے تو، صرف دہشت گردی یا پاکستان کے زیر قبضہ کشمیر پر مرکوز ہوگی ۔

خودمختاری پر صفر سمجھوتہ-’’دہشت گردی اور مذاکرات ایک ساتھ نہیں چل سکتے ، دہشت گردی اور تجارت ایک ساتھ نہیں چل سکتے  اور خون اور پانی ایک ساتھ نہیں بہہ سکتے ۔‘‘

سدرشن چکر مشن

فوری ردعمل سے بالاتر مودی حکومت طویل مدتی خطرات کے لیے تیاری کر رہی ہے ۔  اپنی 2025 کے یوم آزادی کی تقریر میں ، وزیر اعظم مودی نے سدرشن چکر مشن کا اعلان کیا ، جو ایک مستقبل کا دفاعی پروگرام ہے ۔  اس کے تین مقاصد ہیں: اس بات کو یقینی بنانا کہ پورے نظام کی تحقیق ، ترقی اور ہندوستان میں تیار کیا جائے ؛ پیش گوئی کرنے والی ٹیکنالوجیز کے ذریعے مستقبل کے جنگی منظرناموں کا اندازہ لگانا ؛ اور جوابی کارروائی کے لیے عین مطابق ، ٹارگٹڈ سسٹم بنانا ۔  2035 تک ، اس کا مقصد اسٹریٹجک اور شہری اثاثوں دونوں کے لیے ایک جامع قومی سلامتی کی ڈھال فراہم کرنا ہے ۔

ہوم فرنٹ کو محفوظ بنانا

اس حکومت کے تحت داخلی سلامتی نے بھی نمایاں کامیابیاں حاصل کیں ہیں ۔  بائیں بازو کی انتہا پسندی (ایل ڈبلیو ای) کو ایک بار شدید چیلنج ہونے کے بعد قابو میں کر لیا گیا ہے ۔  متاثرہ اضلاع کی تعداد گھٹ کر بیس سے کم ہو گئی ہے ۔  پچھلی دہائی میں 8000 سے زیادہ نکسلیوں نے تشدد ترک کیا ہے ۔  انتہا پسندانہ تشدد کے واقعات ، جو 2010 میں 1,936 تھے ، 2024 میں کم ہو کر 374 رہ گئے۔  اسی عرصے میں شہری اور سیکیورٹی فورسز کی ہلاکتوں میں 85 فیصد کمی واقع ہوئی ۔

یہ نتائج نہ صرف سلامتی کی کارروائیوں کی عکاسی کرتے ہیں بلکہ ان علاقوں میں ترقی اور حکمرانی پر بھی توجہ مرکوز کرتے ہیں جو کبھی ترقی سے منقطع تھے ۔  سڑکوں ، مواصلات ، اسکولوں اور فلاحی اقدامات نے انتہا پسندی کو تحریک دینے والی بنیاد کوکم کر دیا ہے ۔

دفاع سے پرے آتم نربھرتا

ہندوستان کا خود کفالت کا سفر دفاع سے آگے خوراک ، صحت ، توانائی ، ٹیکنالوجی اور مالی شمولیت تک پھیل چکا ہے ۔  وزیر اعظم مودی نے اس بات پر زور دیا ہے کہ قومی سلامتی میں اب یہ اہم شعبے شامل ہیں ، اس بات کو یقینی بناتے ہوئے کہ ملک 2030 تک دنیا کی تیسری سب سے بڑی معیشت بننے کی طرف مسلسل آگے بڑھتے ہوئے عالمی چیلنجوں کے خلاف مستحکم  رہے ۔

مالیاتی شمولیت

مارچ 2025 کے لئے آر بی آئی کا مالیاتی شمولیت انڈیکس (ایف آئی –انڈیکس): 67.0 ، 2021 کے بعد سے 24.3 فیصد بڑھ گیا۔

اقوام متحدہ کے 17 پائیدار ترقیاتی اہداف میں سے 7 کے لیے کلیدی عامل کے طور پر تسلیم کیا گیا ۔

گلوبل فائنڈیکس 2025 (ورلڈ بینک): 2011 کے بعد سے بھارت میں اکاؤنٹ اونرشپ 89فیصد پر ، بڑھتی ہوئی فعال استعمال کے ساتھ۔

پردھان منتری جن دھن یوجنا (پی ایم جے ڈی وائی):

  • مستفیدین: 56.04 کروڑ (14 اگست2025 تک)
  • بیلنس: 2.64 لاکھ کروڑ روپے
  • خواتین: ~55فیصد اکاؤنٹ ہولڈر

غذائی سلامتی اور کسانوں کی فلاح و بہبود

غذائی اجناس کی پیداوار: 246.42 ایم ٹی (14-2013) → 353.96 ایم ٹی (25-2024 ، تیسری اے ای)

پی ایم- کسان (لانچ 2019): کسانوں کو 3 قسطوں میں 6,000 روپےسالانہ ۔

  • اگست 2025 تک کل ادا کی گئی رقم: 20 قسطوں میں 3.90 لاکھ کروڑ روپے ۔

پی ایم غریب کلیان انّ یوجنا: 81 کروڑ لوگوں کو مفت اناج مل رہا ہے ۔

دودھ کا شعبہ

ہندوستان دودھ کی پیداوار میں دنیا میں پہلے نمبر پر ہے ، جس کا عالمی پیداوار میں 25فیصد حصہ ہے ۔

 دودھ کی پیداوار: 146.30 ایم ٹی (15-2014)     239.30 ایم ٹی (24-2023)     ↑63.57  فیصد۔

اوسط سالانہ نمو: 5.7 فیصد (بمقابلہ عالمی اوسط 2فیصد)

ٹیکنالوجی اور اختراع

انڈیا سیمی کنڈکٹر مشن (آئی ایس ایم): نے 76,000 کروڑ روپے کے اخراجات کے ساتھ 2021 کا آغاز کیا ۔

25-2023: 1.60 لاکھ کروڑ روپے کی سرمایہ کاری کے ساتھ 6 ریاستوں میں 10 پروجیکٹوں کی منظوری ۔

2025: ہندوستان نے نوئیڈا اور بنگلورو میں پہلے 3 نینومیٹر چپ ڈیزائن مراکز کا افتتاح کیا ۔  گلوبل انویسٹرز سمٹ 2025 میں یہ اعلان کیا گیا تھا کہ ہندوستان کی پہلی مقامی سیمی کنڈکٹر چپ اس سال پیداوار کے لیے تیار ہو جائے گی ۔

نیلی انقلاب (ماہی پروری)

 مچھلی کی پیداوار: 96 لاکھ ٹن (14-2013)      195 لاکھ ٹن (25-2024)      104فیصد اضافہ ۔

اندرون ملک ماہی پروری: 61 لاکھ ٹن       147.37 لاکھ ٹن (↑142فیصد)

مرکزی بجٹ 26-2025: ماہی پروری کے لیے 2,703.67 کروڑ روپے مختص ، اب تک کی سب سے زیادہ ، 25-2024 سے 3.3 فیصد زیادہ ۔

نتیجہ

مودی حکومت کے تحت ہندوستان کی دفاعی اور داخلی سلامتی کی پوزیشن طاقت ، وضاحت اور خود انحصاری کی طرف فیصلہ کن تبدیلی کی عکاسی کرتی ہے ۔  دفاع میں ریکارڈ سرمایہ کاری ، مقامی پیداوار میں تیزی سے ترقی ، جرات مندانہ اصلاحات اور ابھرتی ہوئی ٹیکنالوجیز کو اپنانے کے ساتھ ، ہندوستان دفاعی سازوسامان کے ایک بڑے درآمد کنندہ سے بڑھتے ہوئے عالمی برآمد کنندہ کی طرف منتقل ہوا ہے۔  دہشت گردی کے خلاف مضبوط ردعمل ، پاکستان کے ساتھ نئے معمول کا واضح اظہار  اور سدرشن چکر مشن جیسے مستقبل کے اقدامات امید افزاسلامتی کے نظریے کی نشاندہی کرتے ہیں ۔

ساتھ ہی ، داخلی استحکام ، خوراک اور توانائی کی سلامتی ، مالی شمولیت  اور ٹیکنالوجی کی اختراع میں پیش رفت یہ ظاہر کرتی ہے کہ آتم نربھرتا صرف دفاع تک ہی محدود نہیں ہے بلکہ یہ ایک مستحکم اور پراعتماد ہندوستان کی بنیادتشکیل کرتا ہے، جو عالمی رہنما بننے کی راہ پر روایتی اور غیر روایتی دونوں طرح کے چیلنجوں کا مقابلہ کرنے کے لیے تیار ہے ۔

یہ زبردست تبدیلی آنے والے برسوں میں ملک کو ہر لحاظ سے وکست بھارت کے طور پر دیکھنے کے حکومت کے گہرے عزم کی عکاسی کرتی ہے ۔  یہ اس بات کی بھی تصدیق کرتی ہے کہ یہ حکومت محض بیان بازی پر یقین نہیں رکھتی بلکہ اس نے ہندوستان کو وکست بنانے کے لیے جو کچھ کرنا چاہیے وہ کیا ہے اور جاری رکھے ہوئے ہے ۔

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