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जरूरत की खबर- आपका बच्चा साइबर-बुलिंग का शिकार तो नहीं:डिप्रेशन का खतरा, इन 10 लक्षणों से पहचानें, ऐसे लें कानूनी मदद

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जरूरत की खबर- आपका बच्चा साइबर-बुलिंग का शिकार तो नहीं:डिप्रेशन का खतरा, इन 10 लक्षणों से पहचानें, ऐसे लें कानूनी मदद

बच्चे स्कूल जाते हैं, किताबें पढ़ते हैं, खेलते-कूदते हैं, कुछ नया सीखते हैं। पेरेंट्स को यकीन होता है कि उनके करियर की मजबूत नींव तैयार हो रही है। लेकिन एक दिन अचानक खबर आती है कि उनका बच्चा फेल हो गया है। वह स्कूल में साथ के बच्चों के साथ मारपीट भी कर रहा है। या फिर बच्चा घर आने पर डरा-डरा सा रहता है। क्या आपने कभी सोचा है कि इस सबके पीछे वजह साइबर बुलिंग भी हो सकती है।

हाल ही में विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने स्कूली बच्चों के बिहेवियर पर एक स्टडी की है। इस स्टडी के मुताबिक दुनिया भर के 44 देशों में हर छठा बच्चा साइबर बुलिंग का शिकार है। इसका असर उसकी पढ़ाई पर भी पड़ रहा है। बच्चे की मेंटल हेल्थ खराब हो रही है। कई बच्चे डिप्रेशन और एंग्जाइटी से जूझ रहे हैं। साइबर बुलिंग बच्चों में सुसाइड की भी वजह बन रहा है।

इसलिए आज ‘जरूरत की खबर’ में साइबर बुलिंग के बारे में बात करेंगे। साथ ही जानेंगे कि-

  • इसका बच्चों की मेंटल हेल्थ पर क्या असर पड़ रहा है?
  • क्या इसके पीछे कारण मोबाइल का बढ़ता इस्तेमाल है?
  • बच्चे के साथ साइबर बुलिंग होने पर पेरेंट्स को क्या करना चाहिए?
  • पेरेंट्स कहां और कैसे शिकायत कर सकते हैं?

एक्सपर्ट: डॉ. कृष्णा मिश्रा, मनोचिकित्सक, मेंटल हॉस्पिटल (इंदौर)

राहुल मिश्रा, साइबर एक्सपर्ट (यूपी पुलिस)

आगे बढ़ने से पहले WHO की नई स्टडी के बारे में जान लेते हैं-

WHO की स्टडी के मुताबिक बच्चे हर रोज सोशल मीडिया पर औसतन 6 घंटे बिता रहे हैं। इसलिए बच्चों के साइबर बुलिंग का शिकार होने का खतरा बढ़ गया है। इस स्टडी में शामिल 11% स्टूडेंट्स का कहना था कि उन्हें महीने में कम-से-कम दो या तीन बार साइबर बुलिंग का सामना करना पड़ा।

सवाल- साइबर बुलिंग क्या है?

जवाब- साइबर बुलिंग यानी सोशल मीडिया के जरिए किसी को परेशान करना, धमकाना, शर्मिंदा करना या निशाना बनाना। आसान भाषा में कहें तो साइबर बुलिंग ऑनलाइन माध्यमों जैसे सोशल मीडिया, चैटिंग एप्स और सोशल साइट्स के माध्यम से जानबूझकर किया गया वह व्यवहार है, जिससे किसी के सम्मान, अस्मिता को ठेस पहुंचती हो या उसे किसी तरह की सामाजिक या भावनात्मक क्षति होती हो।

सवाल- साइबर बुलिंग बच्चे के लिए कितना खतरनाक है?

जवाब- मनोचिकित्सक डॉ. कृष्णा मिश्रा बताते हैं कि अगर कोई बच्चा लंबे समय तक लगातार साइबर बुलिंग का शिकार हो रहा है, तो वह तनाव और एंग्जाइटी का शिकार हो सकता है। कुछ मामलों में साइबर बुलिंग की वजह से बच्चों ने सुसाइड तक का प्रयास किया है।

‘द जर्नल ऑफ साइकोलॉजिकल रिसर्च ऑन साइबर बुलिंग’ की एक रिपोर्ट बताती है कि सुसाइड करने वाले 10 बच्चों में 5 बच्चे कभी-न-कभी साइबर बुलिंग के शिकार हुए हैं।

नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ की एक स्टडी भी बताती है कि साइबर बुलिंग के शिकार बच्चों में सुसाइड करने के विचार चार गुना बढ़ जाते हैं।

सवाल- कैसे पहचानें कि कोई बच्चा साइबर बुलिंग का शिकार है?

जवाब- डॉ. कृष्णा मिश्रा बताते हैं कि जो बच्चे साइबर बुलिंग का शिकार होते हैं, वह टीचर्स, पेरेंट्स या किसी सगे-संबंधी को कुछ भी बताने से कतराते हैं क्योंकि ज्यादातर बच्चे शर्म या डर महसूस करते हैं। बच्चों को लगता है कि पेरेंट्स फिर उनसे स्मार्टफोन छीन सकते हैं। डर के कारण बच्चे इस दौरान हो रही परेशानियों के बारे में किसी से भी बात करने से बचते हैं।

लेकिन इस स्थिति में बच्चा परेशानियों का अकेले सामना करते हुए मानसिक रूप से बीमार पड़ सकता है या किसी गलत कदम की ओर रुख कर सकता है। ऐसे में हम इन तरीकों से पहचान सकते हैं कि बच्चा साइबर बुलिंग का शिकार तो नहीं है। जैसेकि-

  • इंटरनेट या स्मार्टफोन का इस्तेमाल करने के दौरान या उसके बाद परेशान होना।
  • अपने कमरे में सामान्य से अधिक समय बिताना।
  • परिवार के सदस्यों, दोस्तों से दूरी बनाना।
  • किसी तरह की एक्टिविटी में रुचि न लेना।
  • स्कूल में ग्रुप एक्टिविटी से बचना।
  • बच्चे का ग्रेड कम होना या पढ़ाई में मन न लगना।
  • बच्चे के व्यवहार, नींद या भूख में बदलाव आना।
  • अचानक कंप्यूटर या स्मार्टफोन से दूरी बनाना।
  • कोई मैसेज, नोटिफिकेशन या ईमेल आने पर घबराना।
  • अचानक सोशल साइट्स से दूरी बना लेना या अपना अकाउंट डिलीट कर देना।

सवाल- साइबर बुलिंग होने पर पेरेंट्स बच्चे की किस तरह मदद कर सकते हैं?

जवाब- अगर किसी बच्चे के साथ साइबर बुलिंग हुई है तो पेरेंट्स को बच्चे को डराना या धमकाना नहीं चाहिए, बल्कि उसके पक्ष को सहानुभूति के साथ सुनना चाहिए।

इसके बाद पेरेंट्स इन तरीकों से बच्चे की मदद कर सकते हैं, जैसेकि-

  • अगर आपका बच्चा स्कूल में साइबर बुलिंग का शिकार हुआ है तो स्कूल में प्रिंसिपल या उसके टीचर को बताएं।
  • सबसे पहले बच्चे को यह यकीन दिलाएं कि इसमें उसकी कोई गलती नहीं है। वह खुद को दोष न दे और न आप बच्चे को दोष दें।
  • बच्चे को साइबर बुलिंग होने पर किसी तरह का रिप्लाई न देने की सलाह दें। कई बार रिप्लाई देने से स्थिति और खराब हो जाती है।
  • धमकी भरे मैसेज, गलत कमेंट, फोटो या किसी भी तरह की साइबर बुलिंग का स्क्रीनशॉट रखें। इसे धमकाने वाले के पेरेंट्स, स्कूल या पुलिस में शिकायत के दौरान सबूत के तौर पर इस्तेमाल किया जा सकता है।
  • भविष्य में ऐसी घटना न हो, इसके लिए इस तरह की ID या ईमेल भेजने वाले को ब्लॉक कर दें। ज्यादातर ऐप्स की सेटिंग में यह सुविधा होती है।

सवाल- साइबर बुलिंग होने पर कहां और कैसे करें शिकायत?

जवाब- साइबर एक्सपर्ट राहुत मिश्रा बताते हैं कि साइबर बुलिंग की शिकायत करने से पहले अपने बच्चे को विश्वास में लें। उसे बताएं कि बुलिंग के खिलाफ शिकायत करना हमारा अधिकार है। बच्चे को सहज महसूस कराएं।

आप स्थानीय थाने से लेकर जिले के क्राइम ब्रांच ऑफिस तक में बुलिंग की शिकायत दर्ज कर सकते हैं।

अगर आप साइबर बुलिंग की शिकायत ऑनलाइन करना चाहते हैं तो इन स्टेप्स को फॉलो करें।

स्टेप 1: https://cybercrime.gov.in/ पर जाएं।

स्टेप 2: मेनू पर ‘अन्य साइबर अपराधों की रिपोर्ट करें’ पर क्लिक करें।

स्टेप 3: ‘शिकायत दर्ज करें’ के ऑप्शन पर क्लिक करें।

स्टेप 4: इसके बाद शर्तों को ध्यान से पढ़कर एक्सेप्ट करें।

स्टेप 5: अपना मोबाइल नंबर रजिस्टर करें और अपना और राज्य का नाम भरें।

स्टेप 6: अपने साथ हुए अपराध के बारे में सही जानकारी दें।

ध्यान रहे साइबर बुलिंग की रिपोर्ट गुमनाम रहकर भी की जा सकती है। रिपोर्ट करने के बाद आप अपनी रिपोर्ट को उसी वेबसाइट पर ट्रैक कर सकते हैं।

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