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राजस्थानी भाषा को जनभाषा बनाने की जरूरत : मधु आचार्य ‘आशावादी’

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हनुमानगढ़। राजस्थानी भाषा, साहित्य और संस्कृति की प्रतिष्ठित मासिक पत्रिका ‘जागती जोत’ के संपादक, प्रख्यात साहित्यकार और पत्रकार मधु आचार्य ‘आशावादी’ ने कहा है कि राजस्थानी भाषा को सिर्फ बोलचाल की नहीं, बल्कि विचार और अभिव्यक्ति की प्रमुख भाषा बनाना समय की मांग है। वे बुधवार को हनुमानगढ़ जंक्शन स्थित होटल ग्रैंड इन में आयोजित एक स्वागत कार्यक्रम में बोल रहे थे, जहां स्थानीय पत्रकारों और साहित्य प्रेमियों ने उनका अभिनंदन किया।

उन्होंने कहा जागती जोत केवल एक साहित्यिक पत्रिका नहीं, यह राजस्थानी अस्मिता की आवाज है। हमारा प्रयास होगा कि इस मंच के ज़रिए गांव-कस्बों में छिपे रचनाकारों की आवाज़ भी सुनी जाए। राजस्थानी भाषा में साहित्य का समृद्ध भंडार है, जरूरत है उसे युवा पीढ़ी से जोड़ने की।
मधु आचार्य अब तक राजस्थानी और हिंदी में 108 पुस्तकें लिख चुके हैं। वे साहित्य अकादमी, नई दिल्ली के राजस्थानी भाषा परामर्श मंडल के संयोजक रह चुके हैं और उन्हें साहित्य अकादमी पुरस्कार तथा राजस्थानी अकादमी का सूर्यमल मीसण पुरस्कार जैसे प्रतिष्ठित सम्मानों से सम्मानित किया जा चुका है। उन्होंने यह भी बताया कि वे ‘जागती जोत’ के आगामी सभी अंकों का संपादन करेंगे और इसमें नवाचार, लोकवाणी और शोधपरक सामग्री को प्राथमिकता दी जाएगी।
डिस्ट्रिक्ट प्रेस क्लब के अध्यक्ष ललित पारीक ने कहा कि “राजस्थानी भाषा को उसका हक दिलाने के लिए जिस गंभीरता और संकल्प के साथ मधु आचार्य कार्य कर रहे हैं, वह पूरे भाषा-समुदाय के लिए प्रेरणादायी है। ऐसे साहित्यिक व्यक्तित्व का हनुमानगढ़ में आगमन हम सबके लिए गौरव की बात है। जागती जोत के जरिए गांवों की बोली और मन की बात को सम्मान मिलेगा।
इस मौके पर ख्यातनाम पत्रकार धीरेन्द्र शास्त्री, श्रीमती विजय लक्ष्मी, श्रीमती सरस्वती, डिस्ट्रिक्ट प्रेस क्लब के संरक्षक मदन अरोड़ा, दीपक भारद्वाज, बालकृष्ण थरेजा, भवानी तिवाड़ी, विनोद नागलिया सहित अनेक गणमान्य उपस्थित थे।

कैप्शन: हनुमानगढ़, मधु आचार्य ‘आशावादी’ का स्वागत करते साहित्यकार, पत्रकार।

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