अब एसकेआरएयू में भी जल्द नजर आएगी हाइड्रोपोनिक एवं वर्टिकल फार्मिंग

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एसकेआरएयू और बागवानी प्रौद्योगिकी संस्थान के बीच हुआ एमओयू

स्पीड ब्रीडिंग, प्लग वेजिटेबल नर्सरी और टिश्यू कल्चर को भी मिलेगा बढ़ावा

बीकानेर, 31 जुलाई। स्वामी केशवानंद राजस्थान कृषि विश्वविद्यालय और बागवानी प्रौद्योगिकी संस्थान के बीच तकनीकी सहयोग को लेकर एमओयू हुआ। एमओयू पर कृषि विश्वविद्यालय कुलपति डॉ अरुण कुमार और बागवानी प्रौद्योगिकी संस्थान निदेशक डॉ आर.एस.कुरिल समेत संबंधित कृषि वैज्ञानिकों ने हस्ताक्षर किए। कृषि विश्वविद्यालय परिसर स्थित आईएबीएम सभागार में एमओयू पर हस्ताक्षर करने के बाद कुलपति डॉ अरुण कुमार ने कहा कि अब बीकानेर में भी वर्टिकल फॉर्मिंग व हाइड्रोपोनिक तकनीक से खेती संभव होगी। साथ ही बताया कि स्पीड ब्रीडिंग तकनीक, प्लग वेजिटेबल नर्सरी, टिश्यू कल्चर इत्यादि का फायदा किसानों को मिलेगा। खेती की नई वैरायटी विकसित करने में जहां 8-10 साल लग जाते थे। वह स्पीड ब्रीडिंग तकनीक से 4-5 सालों में संभव हो सकेगी। उन्होने कहा कि एमओयू से किसानों की आय बढ़ाने में सहयोग मिलेगा।

बागवानी प्रौद्योगिकी संस्थान निदेशक डॉ आर.एस.कुरिल ने कहा कि संस्थान के पास हॉर्टिकल्चर क्षेत्र में वर्टिकल फॉर्मिंग, हाइड्रोपोनिक, स्पीड ब्रीडिंग,प्लग वेजिटेबल नर्सरी समेत एआई (आर्टिफिशियल इंटेलेजेंस) आधारित बहुत सी नवीन तकनीक है। जिसका फायदा एसकेआरएयू और बीकानेर के किसानों को मिलेगा। बीकानेर में 200-300 एमएम बारिश होती है लिहाजा इस इलाके में हॉर्टिकल्चर के क्षेत्र में बहुत संभावनाएं हैं। उन्होने कहा कि देश में कृषि के क्षेत्र में अच्छा विकास हुआ है लेकिन हॉर्टिक्लचर के क्षेत्र में बहुत कार्य करना बाकि है। भविष्य हॉर्टिक्लचर का ही है। देश में जनसंख्या बढ़ेगी और खेती का इलाका कम हो जाएगा। तब नई तकनीक के जरिए ही हम आगे बढ़ पाएंगे।

हार्टिकल्चर साइंटिस्ट एवं कृषि महाविद्यालय अधिष्ठाता डॉ पी.के.यादव ने धन्यवाद ज्ञापित करते हुए कहा कि अब ये जरूरी नहीं है कि खेती के लिए जमीन हो, शहर के लोग अपने घर में भी नवीन तकनीक के जरिए खेती कर सकेंगे।इससे पूर्व कुलपति सचिवालय में डॉ कुरिल और उनकी टीम ने बागवानी प्रौद्योगिकी संस्थान की नवीन तकनीकों के बारे में प्रजेंटेशन दिया।

एमओयू के समय बागवानी प्रौद्योगिकी संस्थान के अतिरिक्त निदेशक डॉ विजय कॉल, सवीर बायोटेक लिमिटेड के श्री नीरज कुमार, अनुसंधान निदेशक डॉ पी.एस.शेखावत, आईएबीएम निदेशक डॉ आई.पी.सिंह, कृषि महाविद्यालय अधिष्ठाता डॉ पी.के.यादव, छात्र कल्याण निदेशक डॉ वीर सिंह, भू-सदृश्यता एवं राजस्व सर्जन निदेशक डॉ दाता राम, कृषि अनुसंधान केन्द्र के क्षेत्रीय निदेशक डॉ आर.एस.यादव, पीजी अधिष्ठाता डॉ दीपाली धवन समेत सभी डीन डायरेक्टर समेत कृषि वैज्ञानिक, रिचर्स स्टूडेंट्स इत्यादि उपस्थित थे।

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