बीकानेर। आरटीई के अंतर्गत यूनिट कॉस्ट को तर्क संगत बनाते हुए सत्र 2024-25 की यूनिट कॉस्ट तुरंत ही निर्धारित कर भुगतान की प्रक्रिया शुरू करने सहित 7 बिंदुओं के निस्तारण हेतु शासन सचिव (स्कूल शिक्षा) कुणाल कृष्ण एवं वित विभाग के सचिव (फाइनेंस) नवीन जैन को गुरूवार को प्राईवेट एज्यूकेशनल इंस्टीट्यूट्स प्रोसपैरिटी एलायंस (पैपा) के प्रदेश समन्वयक गिरिराज खैरीवाल एवं लोकेश कुमार मोदी ने स्मरण पत्र जयपुर स्थित सचिवालय में दिये। शासन सचिव (स्कूल शिक्षा) कुणाल कृष्ण की अनुपस्थिति में उनके नाम का स्मरण पत्र वरिष्ठ शासन उप सचिव (ग्रुप – 5) बृजरतन प्रजापत को दिया गया। इस स्मरण पत्र की प्रतिलिपि शिक्षा मंत्री मदन दिलावर को भी जरिए ईमेल प्रेषित की गई है। खैरीवाल ने बताया कि उनके द्वारा दिए गए स्मरण पत्र में मांग की गई है कि जब सरकारी स्कूल्स में अध्ययनरत विद्यार्थियों पर प्रति विद्यार्थी 50 हजार रुपये से अधिक का खर्च प्रतिवर्ष हो रहा है तो आरटीई के अंतर्गत प्राईवेट स्कूल्स के लिए केवल 13535 रूपये ही क्यों दिए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि पिछले तीन सत्रों से यूनिट कॉस्ट में किसी भी तरह की वृद्धि नहीं की गई है जबकि गत तीन वर्षों में महंगाई ने नए रिकार्ड बना डाले हैं। पिछले वर्षों में भी पैपा सहित प्राईवेट स्कूल्स के विभिन्न संगठनों द्वारा इस संबंध में अपने अपने तरीके से मांग की गई थी लेकिन सरकार एवं शिक्षा विभाग ने यूनिट कॉस्ट में कोई वृद्धि नहीं की। उन्होंने बताया कि यूनिट कॉस्ट में तर्क संगत वृद्धि हेतु उनके द्वारा अगस्त के अंतिम सप्ताह में शिक्षा निदेशक, प्रारंभिक शिक्षा, बीकानेर को, 10 सितंबर 2024 को जयपुर में शिक्षा सचिवालय में वरिष्ठ शासन उप सचिव गोविंद नारायण दाधीच को तथा 04 अक्टूबर 2024 को बीकानेर स्थित सर्किट हाउस में शिक्षा मंत्री मदन दिलावर को मांग पत्र दिए गए। खैरीवाल ने बताया कि कोटा में 27-28 अक्टूबर 2024 को हुई दो दिवसीय सार्थक संगत में भी इस मुद्दे पर सघन विचार विमर्श हुआ। सार्थक संगत के माध्यम से बनी कोर कमेटी द्वारा भी इस संबंध में निरंतर पत्राचार एवं प्रयास किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री विद्यार्थी योजना में रजिस्टर्ड स्टूडेंट्स के पुनर्भरण हेतु भी इस स्मरण पत्र में पुरजोर मांग की गई है। साथ ही पाठ्यपुस्तकों हेतु दी जाने वाली राशि को भी तर्क संगत बनाने की मांग ज्ञापन में की गई है। उन्होंने बताया कि स्मरण पत्र में आरटीई के अंतर्गत लगाए गए सभी बैरियर्स हटाने, सत्र 2020-21 के अंतर्गत आफलाइन तरीके से शिक्षण कार्य कराने वाले स्कूल्स को बिना शर्त तुरन्त भुगतान करने, आरटीई शुरू होने से लेकर अब तक किसी भी प्रकार की तकनीकी समस्या के कारण पोर्टल पर भौतिक सत्यापन अपलोड नहीं कर सकने वाले स्कूल्स को एक और अवसर देने तथा प्री प्राईमरी कक्षाओं में अध्ययन कर रहे स्टूडेंट्स के लिए भुगतान किए जाने की मांग की गई है। उन्होंने बताया कि इस संबंध में पूर्व में बीसियों बार विभिन्न प्रकार से हम अपना पक्ष प्रस्तुत कर चुके हैं, लेकिन अभी तक किसी भी तरह की राहत नहीं मिल सकी है।











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