उज्बेकिस्तान में भारतीय बिजनेसमैन को 20 साल की सजा:कफ सिरप से 68 बच्चों की मौत का केस, WHO ने अलर्ट जारी किया था

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उज्बेकिस्तान में भारतीय बिजनेसमैन को 20 साल की सजा:कफ सिरप से 68 बच्चों की मौत का केस, WHO ने अलर्ट जारी किया था

राघवेंद्र प्रताप की अगस्त 2023 की ये तस्वीर उज्बेकिस्तान कोर्ट में सुनवाई के दौरान की है। - Dainik Bhaskar

राघवेंद्र प्रताप की अगस्त 2023 की ये तस्वीर उज्बेकिस्तान कोर्ट में सुनवाई के दौरान की है।

उज्बेकिस्तान की सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को इंडियन कफ सिरप पीने से 68 बच्चों की हुई मौत मामले में 21 लोगों को सजा सुनाई है। रिपोर्ट के मुताबिक, सभी को 20 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई गई है। इसमें भारतीय बिजनेसमैन राघवेंद्र प्रताप भी शामिल हैं। उन्हें भ्रष्टाचार, धोखाधड़ी और जालसाजी का दोषी पाया गया है।

दरअसल, उज्बेकिस्तान में 2022 और 2023 के बीच कम से कम 86 बच्चों को जहरीला कफ सिरप पिलाया गया था। इससे 68 बच्चों की मौत हो गई थी।

राघवेंद्र पर कई धाराओं में मामला दर्ज था
मृतकों के परिजनों की शिकायत पर उज्बेकिस्तान पुलिस ने केस दर्ज कर कोर्ट में चार्जशीट दायर की थी। इसमें उज्बेकिस्तान में डॉक-1 मैक्स सिरप बेचने वाली कंपनी के डायरेक्टर राघवेंद्र प्रताप को भी आरोपी बनाया गया था। उन पर लापरवाही, धोखाधड़ी समेत अन्य संगीन धाराओं में मामला दर्ज किया गया था।

गाम्बिया में भी कफ सिरप से 70 बच्चों की मौतें हुई थीं। (फाइल फोटो)

गाम्बिया में भी कफ सिरप से 70 बच्चों की मौतें हुई थीं। (फाइल फोटो)

WHO ने सिरप को लेकर अलर्ट जारी किया था
जनवरी 2023 में वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन (WHO) ने कहा था कि भारत के मैरियन बायोटेक द्वारा बनाए गए दो खांसी के सिरप बच्चों को नहीं पिलाया जाना चाहिए। सिरप के नाम एम्बरोनॉल सिरप और डीओके-1 मैक्स हैं। इन दोनों सिरप को नोएडा स्थित कंपनी मैरियन बायोटेक बनाती है।

WHO ने कहा था कि जांच में पाया गया है कि दोनों सिरप अच्छी क्वालिटी के नहीं हैं। इनमें दूषित पदार्थों के रूप में डायथिलीन ग्लाइकोल या एथिलीन ग्लाइकोल की सही मात्रा शामिल नहीं है।

WHO ने इन चार सिरप को लेकर अलर्ट जारी किया था। ये भारत में नहीं बिकते हैं। कंपनी इन्हें केवल निर्यात करती है।

WHO ने इन चार सिरप को लेकर अलर्ट जारी किया था। ये भारत में नहीं बिकते हैं। कंपनी इन्हें केवल निर्यात करती है।

मैरियन बायोटेक के प्रोडक्शन का लाइसेंस रद्द
मामले सामने आने के बाद भारत सरकार ने मार्च 2023 में कफ सिरप बनाने वाली कंपनी मैरियन बायोटेक का प्रोडक्शन लाइसेंस रद्द कर दिया था। इसी दौरान भारत से इंपोर्ट किए गए एक अन्य कफ सिरप के इस्तेमाल के बाद गाम्बिया में 70 बच्चों की मौत हो गई थी। सभी बच्चों के गुर्दे फेल हो गए थे।

गाम्बिया ने भारत के 4 कफ सिरप को 70 बच्चों की मौतों का जिम्मेदार बताया था
गाम्बिया भी अपने यहां हुई 70 बच्चों की मौतों का जिम्मेदार भारत में बने 4 कफ सिरप को ठहरा चुका है। WHO ने भी इन कफ सिरप के इस्तेमाल पर अलर्ट जारी किया था। हालांकि, भारत ने कहा था कि हमने कफ सिरप की जांच की थी। इनकी क्वालिटी सही पाई गई। इसके बाद गाम्बिया सरकार ने एक बयान जारी कर कहा था कि उनके देश में हुई बच्चों की मौतों से भारतीय सिरप का कोई संबंध नहीं है।

गाम्बिया में कफ सिरप से एक मां ने अपने 20 महीने के बच्चे को खो दिया था।

गाम्बिया में कफ सिरप से एक मां ने अपने 20 महीने के बच्चे को खो दिया था।

क्या एथिलीन ग्लाइकॉल जानलेवा है?
WHO के मुताबिक ethylene glycol कार्बन कंपाउंड है। इसमें न गंध होती है और न ही रंग। ये मीठा होता है। बच्चों के सिरप में सिर्फ इसलिए मिलाया जाता है, ताकि वो आसानी से दवा पी सकें। इसकी मात्रा के असंतुलन से ये जानलेवा हो सकता है। कई देशों में यह प्रतिबंधित है।

50 परसेंट से अधिक जेनरिक दवाइयां भारत से
दुनिया में जेनरिक दवाइयों की जितनी जरूरत होती है, उसका 50 परसेंट से अधिक भारत से भेजा जाता है। वहीं अमेरिका में लगभग 40 प्रतिशत जेनरिक दवाओं की और ब्रिटेन में लगभग 25 प्रतिशत दवाओं की आपूर्ति की जाती है। पूरी दुनिया में भारत फार्मास्यूटिकल प्रोडक्शन के मामले में तीसरे स्थान पर है।

भारत की दवा इंडस्टी में 3,000 दवा कंपनियां और लगभग 10,500 मैन्युफैक्चरिंग यूनिट शामिल हैं। वर्तमान में एड्स से निपटने के लिए विश्वस्तर पर उपयोग की जाने वाली 80 प्रतिशत से अधिक एंटीरेट्रोवाइरल दवाओं की आपूर्ति भारतीय दवा फर्मों द्वारा की जाती है।

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