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खारा गाँव में औद्योगिक प्रदूषण से स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा, ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से की सख्त कार्रवाई की मांग

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बीकानेर जिले की ग्राम पंचायत खारा के ग्रामीण पिछले कई वर्षों से औद्योगिक क्षेत्र में बढ़ते प्रदूषण के कारण गंभीर समस्याओं का सामना कर रहे हैं। हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि अब ग्रामीणों के स्वास्थ्य पर इसका सीधा असर पड़ने लगा है। ग्राम पंचायत खारा की ओर से जिला कलेक्टर को एक विस्तृत ज्ञापन भेजकर पर्यावरणीय सुरक्षा और प्रदूषण पर सख्त कार्रवाई की मांग की गई है।

जीवन और स्वास्थ्य का अधिकार हो रहा है प्रभावित

ग्रामीणों का कहना है कि संविधान के अनुच्छेद 21 के अनुसार, प्रत्येक नागरिक को जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार है। इसके तहत, प्रत्येक व्यक्ति का यह अधिकार है कि वह स्वच्छ और स्वस्थ वातावरण में जीवन यापन कर सके। लेकिन खारा गाँव के ग्रामीणों के लिए यह अधिकार अब खतरे में पड़ गया है, क्योंकि उनके क्षेत्र में औद्योगिक संयंत्रों से निकलने वाले धुएं और रासायनिक तत्वों के कारण वायु प्रदूषण तेजी से बढ़ रहा है।

ग्रामीणों का आरोप है कि सरकार और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से बार-बार शिकायत करने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। ग्रामीणों के अनुसार, “वायु-प्रदूषण (निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम, 1981” और “पर्यावरण प्रदूषण अधिनियम, 1986” जैसे कानूनों का भी यहां पालन नहीं हो रहा है।

प्रदूषण की जांच के लिए स्थायी उपकरण लगाने की मांग

ज्ञापन में ग्राम पंचायत ने मांग की है कि गांव के नजदीक ही औद्योगिक संयंत्रों द्वारा उत्सर्जित प्रदूषण की जांच के लिए एक स्थायी गुणवत्ता मापक यंत्र लगाया जाए। उन्होंने सुझाव दिया है कि यह उपकरण राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, खारा में स्थापित किया जा सकता है, जिससे कि वास्तविक प्रदूषण की स्थिति का पता लगाया जा सके। इसके साथ ही, ग्रामीणों ने यह भी प्रस्तावित किया है कि जांच प्रक्रिया में गांव के प्रतिनिधि मंडल को शामिल किया जाए ताकि निष्पक्ष जांच हो सके।

उल्लंघन करने वाले संयंत्रों पर हो सख्त कार्रवाई

ग्रामीणों ने मांग की है कि जो संयंत्र वायु-प्रदूषण और पर्यावरण संबंधी नियमों का उल्लंघन कर रहे हैं, उन पर कठोर कार्रवाई की जाए। उन्होंने जिला कलेक्टर से अनुरोध किया है कि ऐसे संयंत्रों के खिलाफ केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को अवगत कराया जाए, ताकि उचित कानूनी कदम उठाए जा सकें। ग्रामीणों का कहना है कि सिर्फ संयंत्र लगाने से ही औद्योगिकीकरण नहीं होता, बल्कि यह भी जरूरी है कि पर्यावरण के संरक्षण का पूरा ध्यान रखा जाए।

स्वास्थ्य सेवाओं की मांग

औद्योगिक प्रदूषण के कारण प्रभावित हो रहे ग्रामीणों के लिए विशेष स्वास्थ्य जांच शिविर लगाने की मांग भी ज्ञापन में की गई है। ग्रामीणों ने कहा कि वायु-प्रदूषण के कारण वे गंभीर बीमारियों का सामना कर रहे हैं, इसलिए प्रशासन को विशेष चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध करवानी चाहिए ताकि समय पर इलाज हो सके।

ग्रामीणों ने दी आंदोलन की चेतावनी

ज्ञापन के अंत में ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन ने इस गंभीर समस्या पर ध्यान नहीं दिया तो वे आंदोलन का रास्ता अपनाने को मजबूर हो जाएंगे। उन्होंने यह भी कहा कि यदि पत्राचार की अनदेखी की गई तो इसका परिणाम प्रशासन और सरकार को भुगतना पड़ेगा।

ग्रामीणों की इस मांग ने क्षेत्र में एक नई बहस को जन्म दे दिया है। अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन ग्रामीणों की इन मांगों पर क्या कदम उठाता है और खारा ग्राम पंचायत के प्रदूषण मुक्त भविष्य के लिए क्या ठोस उपाय करता है। ज्ञापन की प्रति क्षेत्रीय प्रबंधक प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, बीकानेर के क्षेत्रीय प्रबंधक राजकुमार जी को सौंपी गई है

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