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‘‘गांधी जी एक ऐसे संगम के रूप में स्थापित हुए, जिसमें गरम दल और नरम दल दोनों की लकीरें विलीन हो गई- प्रो. विनोद कुमार सिंह

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बीकानेर।राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी जी की 150 वीं जयन्ती वर्ष श्रृृंखला के तहत 152 वीं जयन्ती के उपलक्ष्य में दिनांक 02 अक्टूबर, 2021 को विश्वविद्यालय में ‘‘राष्ट्र निर्माण एवं वर्तमान में गाँधी जी के विचारों की प्रासंगिकता’’ विषय पर वर्चुअल व्याख्यान आयोजित हुआ। सर्वप्रथम राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी व शास्त्री जी के चित्र पर माल्यार्पण के साथ आयोजन का विधिवत शुभारम्भ हुआ। संयोजन करते हुए इतिहास विभाग की डाॅ. मेघना शर्मा ने गांधी व शास्त्री सरीखी विभूतियों के आदर्शो को आत्मसात करने की आवश्यकता को कार्यक्रम के परिचय के साथ व्यक्त करते हुए अतिथियों का परिचय मंच से दिया। सेन्टर के डाॅयरेक्टर एवं कार्यक्रम प्रभारी प्रो. अनिल कुमार छंगाणी द्वारा स्वागत भाषण देते हुए कार्यक्रम की संक्षिप्त रूपरेखा प्रस्तुत की गई।

व्याख्यान में अध्यक्षीय उद्बोधन देते हुए कुलपति प्रो. विनोद कुमार सिंह ने कहा कि महात्मा गाँधी प्रयोगधर्मी चिंतक थे जिनका वजूद सांस्कृतिक चेतना के सूत्र में राष्ट्र को जोड़ने के प्रति समर्पित रहा। गाँधी जी राजनीतिक चरित्र की धारा बदलकर एक ऐसे संगम के रूप में स्थापित हुए, जिसमें गरम दल और नरम दल दोनों की लकीरें विलीन हो गयी। भारतीय क्रांति की अभिव्यक्ति गाँधी जी के विचारों में परिलक्षित होती है। उन्होंने कहा कि गांधी जी एक महान शिक्षाविद् थे, उनका मानना था कि किसी देश की सामाजिक, नैतिक और आर्थिक प्रगति अंततः शिक्षा पर निर्भर करती है। उनकी राय में शिक्षा का सर्वोच्च उद्देश्य आत्म मूल्याकंन है। उनके अनुसार विद्यार्थियों के लिए चरित्र निर्माण सबसे महत्वपूर्ण है और यह उचित शिक्षा से ही संभव है।
मुख्य वक्ता प्रो. सतीश कुमार ने गांधी को बहुआयामी व्यक्तित्व बताते हुए अपने संभाषण में प्लेटफार्म पर फेक दिये जाने वाले गांधी और उसके बाद उठकर खडे़ होने वाले गांधी के अन्तर को स्पष्ट करते हुए उनके स्वतंत्रता आन्दोलन के महानायक तक के सफर को चित्रित करते हुए गांधी जी के जीवन से प्रेरणा लेने का स्मरण करवाया। वक्ता के रूप में प्रबन्ध बोर्ड सदस्य डाॅ. विनोद चन्द्रा ने बताया कि आज गांधी को विचारों एवं व्याख्यानों की परिधि से बाहर निकालकर आचरण में उतारने व व्यवहारिक रूप से उनके सिद्वान्तों की पालना सुनिश्चित करवाने की जरूरत वर्तमान पीढ़ी के उत्थान हेतु आवश्यक है।
व्याख्यान में धन्यवाद ज्ञापन शोध निदेशक डाॅ. रविन्द्र मंगल द्वारा किया गया। कार्यक्रम में प्रो. सुरेश कुमार अग्रवाल, प्रो. राजाराम चोयल, डाॅ. गौतम मेघवंशी, डाॅ. धर्मेश हरवानी, डाॅ. अभिषेक वशिष्ठ, डाॅ. ज्योति लखाणी, डाॅ. प्रभुदान चारण, डाॅ. सीमा शर्मा, श्री अमरेश कुमार सिंह, श्री उमेश शर्मा, श्री निर्मल भार्गव आदि उपस्थित रहे।

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