गो तस्करी में आरोपी को 3 साल की सजा:13 साल पुराने मामले में आया फैसला, काफी सालों से फरार था आरोपी, एक अभी भी फरार

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गो तस्करी में आरोपी को 3 साल की सजा:13 साल पुराने मामले में आया फैसला, काफी सालों से फरार था आरोपी, एक अभी भी फरार

चित्तौड़गढ़

गौ तस्करी के 13 साल पुराने मामले में अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश क्रमांक-2 के न्यायाधीश ने एक आरोपी को 3 साल की सजा सुनाई। साथ ही 20 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया है। आरोपी अपने अन्य साथियों के साथ मिलकर 40 गायों और 5 बछड़ों को एमपी के कत्लखाने लेकर जा रहे थे। आरोपी कई सालों से फरार था। मामले में दो आरोपियों को पहले सजा हो चुकी है। जबकि एक आरोपी अभी भी फरार है।

13 साल पहले पकड़े गए थे चार आरोपी

लोक अभियोजक अब्दुल सत्तार खान ने बताया कि 20 अप्रैल 2011 को शंभूपुरा थाने के एएसआई गोपाल लाल ने रिपोर्ट दी थी। पुलिस को सूचना मिली थी कि चित्तौड़गढ़ की तरफ से एक ट्रक आने वाली है। जिसमें गोवंश भरे हुए हैं। उनको गोवंशों को कत्ल खाने ले जाया जा रहा है। ट्रक को रुकवाया गया। ट्रक ने ड्राइवर के अलावा तीन व्यक्ति और बैठे थे। ड्राइवर ने अपना नाम रतलाम निवासी शाकिर खान पुत्र बाबू खान बताया। बाकियों ने भी अपना नाम नासिर, अप्पू और इमरान बताया। पीछे ट्रक में दो पोर्शन बनाकर ठूंस ठूंस कर गोवंशों को भर रखा था। गोवंशों के पैर रस्सियों से बांधे हुए थे। सभी को कत्ल खाने ले जाया जा रहा था। ट्रक में 40 गाय और 5 बछड़े थे। एक बछड़े की मौत भी हो चुकी थी। थाने में मामला दर्ज कर सभी आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। सबके खिलाफ कोर्ट में चालान पेश किया गया।

एक आरोपी अभी भी फरार

उन्होंने बताया कि कोर्ट में ट्रायल चलने के दौरान शाकिर को छोड़ अन्य आरोपियों अप्पू और नासिर के खिलाफ साल 2022 में निस्तारण हो गया था। आरोपी शाकिर कई सालों से फरार था, जिसकी जमानत जब्त हो गई थी। वांछित आरोपियों की धड़पकड़ में यह भी पकड़ा गया। इसके बाद ट्रायल किया गया। वहीं, आरोपी इमरान अभी भी फरार है।

16 गवाह और 36 डॉक्यूमेंट पेश किए

ट्रायल के दौरान आरोपी के खिलाफ 16 गवाह और 36 डॉक्यूमेंट पेश किए गए। दोनों पक्षों की बहसबाजी सुनने के बाद न्यायाधीश विनोद कुमार बैरवा ने माना की राजस्थान की सीमा के बाहर मध्य प्रदेश के बूचड़ खानों में गायों को लेकर जाया जा रहा था। जबकि उन्हें पता था कि गोवंश को राजस्थान से बूचड़खाने ले जाना गलत है। शाकिर को दोषी मानते हुए उसे 3 साल की सजा सुनाई गई। साथ ही 20 हजार रुपए का जुर्माना लगाया गया।

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