जम्मू वायु सेना स्टेशन पर हमले के पीछे लश्कर, टीआरएफ, प्रत्येक ड्रोन में 1.5 किलो आरडीएक्स ले जाया गया
जम्मू (जम्मू और कश्मीर) जम्मू वायु सेना स्टेशन पर हमले के मामले की जांच से पता चला है कि विस्फोट को अंजाम देने वाले ड्रोन में लगभग 1.5 किलोग्राम आरडीएक्स था। सूत्रों के अनुसार लश्कर-ए -तैयबा (एलईटी) या द रेसिस्टेंस फ्रंट (टीआरएफ) ड्रोन हमले के पीछे हो सकता है।
सूत्रों की माने तो ड्रोन जीपीएस के माध्यम से संचालित होते थे और उनके संचालकों द्वारा मैन्युअल रूप से नियंत्रित किए जाते थे।
राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) जम्मू वायु सेना स्टेशन पर हमले के मामले की जांच कर रही है।
उल्लेखनीय है कि यह मामला 27 जून को वायु सेना स्टेशन, सतवारी परिसर, जम्मू के परिसर के अंदर हुए एक विस्फोट और उसके बाद के एक विस्फोट से संबंधित है, जो एक सुनियोजित साजिश में ड्रोन द्वारा किए गए लगभग छह मिनट के बाद हुआ, जिसमें दो लोग घायल हो गए। इसमें वायु सेना कर्मियों और कार्यालय भवनों को क्षतिग्रस्त कर दिया।
राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड (एनएसजी) की एक विशेष बम निरोधक टीम विस्फोट की प्रकृति की जांच कर रही है।
इस बीच, भारतीय वायु सेना (IAF) यह सुनिश्चित करने के लिए हर संभव उपाय कर रही है कि इस तरह की घटना अन्य स्थानों पर न दोहराई जाए और सभी स्टेशनों पर हाई अलर्ट जारी कर दिया गया है।
जम्मू वायु सेना स्टेशन के तकनीकी क्षेत्र में रविवार तड़के दो कम तीव्रता वाले विस्फोटों की सूचना मिली।
एक विस्फोट में एक इमारत की छत को मामूली नुकसान पहुंचा जबकि दूसरा एक खुले क्षेत्र में विस्फोट हुआ।
वायुसेना ने कहा कि किसी भी उपकरण को कोई नुकसान नहीं हुआ है।










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