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पारंपरिक गीत मालाओ में गायी जाने वाली कुरजां क्षेत्र के संरक्षण व सवंर्धन की मांग

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बीकानेर ।लूणकरणसर में नमक की झील के स्थान पर बरसों से ( कुरजां) साइबेरियन सारस व मंगोलिया से आने वाले प्रवासी पक्षियों का साल भर में सर्दी के मौसम से करीब छह माह लूणकरणसर में प्रवास पर रहते है इनका कोलाहल देखते ही बनता है । रात्रि में ये पक्षी पूरी रात वी के आकार में उड़ते नजर आते है । हमारी अथिति देवो भव की संस्कृति में स्थानीय लोग भी इनके आगमन की प्रतीक्षा में रहते हैं । इनके स्थान के संरक्षण व संवर्धन के लिए भारतीय जीव जंतु कल्याण बोर्ड के मानद जीव जंतु कल्याण अधिकारी श्रेयांस बैद ने केंद्रीय संस्कृति राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल का धयानकर्षन करते हुए लिखे पत्र में बताया कीनमक की झील होने के कारण व यहाँ जमा पानी पर पूरे दिन इनको देखा जा सकता है । हाल ही में जम्मू कश्मीर से पत्रकारों का दल इन्हें देखने को उत्सुक रहते हैं। इनके विचरण स्थान पर कार्य करने की महती आवश्यकता है इस जगह पर नमक होने के कारण नारियल के वृक्ष लगाए जा सकते है जिसे नमक की आवश्यकता रहती है । वंही पर्यटकों के लिए झील के डवलपमेंट के लिए चार दीवारी , लिली पोंड , पिजन टावर, अत्यधिक जगह होने के कारण अन्य कृत्रिम झील का निर्माण कर बोटिंग जैसी सुविधाएं उप्लब्ध करवाई जा सकती है । नेशनल हाइवे पर होने के कारण आम जन भी इनको निहारता है व उत्सुकता से छाया चित्र लेते है ।आपसे इस क्षेत्र में कुरजां के संरक्षण व संवर्धन के लिए संस्कति मंत्रालय द्वारा आवश्यक योजना तैयार करवाने का अनुरोध किया है ।

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