
बीकानेर।बिनानी कन्या महाविद्यालय की शीर्ष संस्था राजस्थानी युवक परिषद, मुंबई के संस्थापक पूर्व अध्यक्ष श्री नरेंद्र मोहन दम्मानी के निधन (28 अगस्त 2021) पर महाविद्यालय परिवार द्वारा शोक संवेदना प्रकट की गई|
उल्लेखनीय है कि श्री दम्माणी जी नारी शिक्षा के पक्षधर थे तथा उनका विश्वास था कि नारी का सशक्तिकरण शिक्षा के माध्यम से ही हो सकता है । यह उन्हीं के अथक प्रयासों का परिणाम था कि राजकीय महारानी सुदर्शना कन्या महाविद्यालय की स्थापना के 45 वर्षों के पश्चात बीकानेर के भीतरी शहर में एक महाविद्यालय की नींव बिनानी कन्या महाविद्यालय के रूप में रखी गई। जिसका परिणाम यह हुआ कि हायर सेकेण्डरी की छात्राएं जो दूरी व सुरक्षा के कारणों से उच्च शिक्षा पाने से वंचित रहती थी अब उनके लिए उच्च शिक्षा की दहलीज पर कदम रखना सहज सुगम्य हो गया । श्री दम्माणी जी ने महाविद्यालय के लिए कोष एकत्रित करते हुए संत श्री मोरारी बापू तथा परम पूज्य श्री रमेश भाई ओझा द्वारा राम कथाएं करवाई तथा एक कथा तो स्वयं के साधनों से करवा कर प्राप्त कोष राशि को महाविद्यालय में दे दिया । वह मुंबई से जब भी बीकानेर प्रवास करते तो तत्परता से महाविद्यालय आते और महाविद्यालय के प्रबंधन व संचालन संबंधी जानकारी लेते तथा जहां तक संभव हो किसी भी कार्य का क्रियान्वयन तत्परता से करते थे। उनके चरित्र की मजबूती का सबसे बड़ा गुण था कि वे सभी को साथ लेकर चलते थे, वे महाविद्यालय में सभी को सहृदयता से सुनते और वाँछनीय मुद्दों पर अपनी सहमति प्रकट करते और उन्हें तुरंत ही क्रियान्वित करते। उनका यह मानना था कि किसी को जीवन भर रोटी खिलाने से ज्यादा जरूरी है कि उसे ऐसा बना दो कि वह अपने स्तर पर अपनी रोटी कमा सके उनके प्रयासों से प्रारंभ हुए महाविद्यालय में छात्राएं प्रोबेशन ऑफीसर, RAS जैसे विभिन्न पद पर पदस्थापित है । श्री दम्माणी जी की प्रबंध कौशल क्षमता को देखते हुए विश्व विख्यात भागवताचार्य मर्मज्ञ पूज्य श्री रमेश भाई ओझा ने उन्हें अपने सान्दीपनि आश्रम का ट्रस्टी भी बनाया।
यह भी एक संयोग है कि उनकी श्रद्धांजलि सभा के अवसर पर महाविद्यालय की कक्षा बीकॉम भाग तृतीय का परिणाम भी शत-प्रतिशत रहा। ऐसे कर्म योगी दृढ़ निश्चयी और भविष्य दृष्टा व्यक्तित्व के प्रति महाविद्यालय द्वारा अपनी कृतज्ञता ज्ञापित की गई। उनके अनेक योगदानों को स्मरण करते हुए उन्हें अपनी भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गई तथा ईश्वर से प्रार्थना की गई कि वह दिवंगत आत्मा को शांति प्रदान करें तथा उनके परिवार को इस दुख को सहन करने के लिए संबल प्रदान करें।








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