बीकानेर में इस मदर्स डे पीएमओ से गुहार, पहचान पत्रों में मां का नाम जोड़ो सरकार

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#NamedAfterMom : बीकानेर के युवा इंटरप्रेन्योर बोथरा की देशभर में मुहिम, मां का नाम चुनने का मिले अधिकार


बीकानेर. यदि प्रधानमंत्री कार्यालय ने बीकानेर के सिद्धार्थ बोथरा की याचिका स्वीकार कर ली तो जल्द ही आधार, पैन और ड्राइविंग लाइसेंस जैसे सरकारी पहचान पत्रों पर पिता की जगह मां का नाम अंकित करवाने का विकल्प खुल जाएगा। मूलत: बीकानेर के मुम्बई निवासरत युवा इंटरप्रेन्योर सिद्धार्थ बोथरा ने इस मदर्स डे के मौके पर ‘नेम्ड आफ्टर मॉम’ मुहिम शुरू की है। होप फॉर बेटर इंडिया फाउंडेशन के फाउंडर बोथरा ने पीएमओ को याचिका भेज सरकारी पहचान दस्तावेजों में मां का नाम चुनने का विकल्प देने की गुहार लगाई है। बोथरा कहते हैं, विडंबना है कि सरकार की ओर से जारी पहचान पत्रों में मिडल नेम और मेडन नेम या सरनेम के रूप में बाय डिफॉल्ट पिता का नाम ही अंकित होता है। राइट टु चूज के जरिए इस पुरुष प्रधान सिस्टम को बदलने की जरूरत है। बच्चे की परवरिश में माता-पिता दोनों का समान योगदान है तो मां को यह समानता का अधिकार क्यों नहीं मिले…। फाउंडेशन ने पीएमओ के साथ राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, राज्यों के मुख्यमंत्रियों, राज्यपालों और सांसदों व विधायकों को भी यह याचिका भेज समर्थन मांगा है। बोथरा आम लोगों से यह याचिका ऑनलाइन साइन करवा रहे हैं। अब तक सैंकड़ों लोग इसे साइन कर चुके हैं।

केंद्रीय मंत्रियों समेत कई सेलिब्रिटीज ने दिया समर्थन
फाउंडेशन से जुड़े लोग इस कैंपेन को लेकर अब तक कई मंत्रियों और जनप्रतिनिधियों से मुलाकात कर चुके हैं। बोथरा के अनुसार, केंद्रीय मंत्री स्मृ़ति ईरानी, फग्गनसिंह कुलस्ते, भाजपा प्रवक्ता और डिजाइनर शाइना एनसी, इंफोसिस फाउंडेशन की अध्यक्ष सुधा मूर्ति, राज्यसभा सदस्य प्रियंका चतुर्वेदी, बीकानेर पूर्व की विधायक सिदि्ध कुमारी, दीया कुमारी, रुकमणी कुमारी और भारती लावेकर के अलावा सोनू निगम और सोनू सूद जैसी कई सेलिब्रिटीज भी इस अभियान से जुड़ चुकी हैं।

मदर्स डे पर सोशल मीडिया हेंडल्स पर बदलेंगे नाम
इस मुहिम से जुड़े लोग 14 मई को मदर्स डे पर अपने तमाम सोशल मीडिया हेंडल पर अपना नाम एडिट कर मिडल नेम के रूप में मां का नाम जोड़ेंगे।

…और कारवां जुड़ता गया
बोथरा ने बताया कि उनके दो बेटे हैं। कुछ दिन पहले उनके नाम के मिडल नेम में पत्नी का नाम जुड़वाने का ख्याल आया। तब पत्नी ने कहा- हम तो जोड़ लेंगे, लेकिन बादमें तमाम सरकारी दस्तावेजों में दिक्कत आएगी। क्योंकि सभी जगह बाय डिफॉल्ट पिता का नाम ही सिस्टम पिक करता है। इसको लेकर दोस्तों से चर्चा की और यह मुहिम शुरू की।

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