
भारत में इजराइली जासूसी नेटवर्क की परतें खुलने की जानकारी के बीच पत्रकारों ने खुलासा किया था कि दुनिया भर की सरकारें मीडिया पर शिकंजा कसने के लिए उनकी जासूसी करवा रही हैं ।
इस जासूसी नेटवर्क का इस्तेमाल भारत में भी किया गया। हाल ही में कई वरिष्ठ पत्रकारों ने अपने मोबाइल के हैक होने, हैकर्स द्वारा नंबर डिलीट करने व्हाट्सएप स्टेटस बदलने यहां तक कि मोबाइल नंबर से लिंक सभी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म तक को हाईजैक करने की शिकायतें दर्ज कराई है।
भारत में अब तक लगभग 40 से भी अधिक पत्रकारों पर जासूसी करने की खबरें पुष्ट हो चुकी हैं। जिनमें हिंदुस्तान टाइम्स ,इंडिया टुडे, नेटवर्क 18, द हिंदू, इंडियन एक्सप्रेस सहित अनेक स्वतंत्र पत्रकार शामिल हैं।
उल्लेखनीय है कि इजराइली जासूसी नेटवर्क का स्पाइवेयर पेगासस एसएमएस, व्हाट्सएप ,मैसेज या किसी अन्य माध्यम से टारगेटेड पत्रकार को एक लिंक भेजता है जिस पर क्लिक करने मात्र से फोन के सभी एस एम एस, ईमेल, व्हाट्सएप चैट, कांटेक्ट बुक ,जीपीएस डाटा हर चीज उनकी सेंधमारी में आ जाती है ।
पत्रकार रोहिणी सिंह ने इस पर ट्वीट करते हुए लिखा है कि जय शाह और निखिल मर्चेंट की कहानियों के बाद और पीयूष गोयल के संदिग्ध व्यवहार पर मेरी कहानी पर शोध करते समय मुझे पेगासस स्पाइवेयर के माध्यम से निशाना बनाया गया। मैं सरकार से आग्रह करूंगी कि मेरी बातचीत को पढ़ना बंद कर दें और इसके बजाय मेरी कहानियों को पढ़ें और इसे व्यवस्थित करने का प्रयास करें। यहां यह दीगर है कि रोहिणी सिंह अमित शाह के पुत्र जय शाह के विषय में कई बार विवादास्पद लेखन के कारण भी चर्चा में रही हैं।
इसके साथ ही इंडियन एक्सप्रेस की ऋतिका चोपड़ा ,जो शिक्षा और चुनाव आयोग कवर करती हैं, इंडिया टुडे के संदीप उन्नीथन जो रक्षा और सेना संबंधी रिपोर्टिंग करते हैं, टीवी 18 के मनोज गुप्ता जो इन्वेस्टिगेशन और सुरक्षा मामलों के संपादक हैं , द हिंदू की विजेता सिंह गृह मंत्रालय कवर करती हैं, वरिष्ठ पत्रकार प्रेमशंकर झा का नंबर भी रिकॉर्ड्स में मिला है।
इन लोगों के फोन में पेगासस डालने की कोशिश की गई ऐसे सबूत मिले हैं.
यदि कानून की दृष्टि से देखें तो अलग-अलग देशों में अलग-अलग कानून हैं लेकिन भारत में किसी भी व्यक्ति, निजी या अधिकारी पर निगरानी के लिए स्पाइवेयर से हैकिंग का उपयोग आईटी अधिनियम के तहत अपराध है।
उधर इसपर अपना पक्ष और साफगोई को स्पष्ट करते हुए सरकार ने किसी का नाम लिए बिना मंत्रालय ने कहा है कि , “अवरोधन, निगरानी और डिक्रिप्शन के प्रत्येक मामले को सक्षम प्राधिकारी द्वारा अनुमोदित किया जाता है. इसलिए ऐसी कोई भी गतिविधि किसी भी कंप्यूटर संसाधन से कानून की उचित प्रक्रिया के साथ ही की जाती है।”











Add Comment