बीकानेर, 19 अगस्त। जैन श्वेताम्बर खरतरगच्छ के आचार्यश्री जिन पीयूष सागर सूरिश्वरजी के सान्निध्य में सोमवार को गंगाशहर मार्ग पर स्थित रेलदादबाड़ी में पूजा व दादा गुरुदेव का इकतीसा का 108 बार सामूहिक पाठ किया गया । ढढ्ढों के चौक की आगम वाटिका में श्री 45 आगम तप के तहत वह्न्दिशा सूत्र की आराधना व जाप किया गया। मंगलवार को तपस्वियों का वरघोड़ा निकलेगा तथा अभिनंदन तथा शाम को तप वंदनावली कार्यक्रम होगा।
आचार्यश्री जिन पीयूष सागर सूरीश्वरजी ने धर्म चर्चा में बताया कि वहिन्दशा सूत्र में भगवान श्री कृष्ण वासुदेव के बड़े भाई बलदेव, निषध, अनिय वह, वहेल, प्रगति, युक्ति, दशरथ, दृढरथ, महाधनु, सप्तधनु व शतधनु का जीवन चरित्र है । पिछले जन्मों में इन सभी ने निर्मल निरतिचार चारित्र का सुन्दर पालन किया। इस भव में भी वैसा ही निर्मल चरित्र का पालन करके 33 सागरोपम की आयुष्य वाले स्वार्थ सिद्ध विमान में एकावतारी के रूप मेंं उत्पन्न हुए तथा आने वाले भव में महाविदेह में जन्म पाकर दीक्षा लेकर आराधना करके आठ कर्मों का क्षय करके सिद्ध होंगे।
श्री सुगनजी महाराज का उपासरा ट्रस्ट व श्री जिनेश्वर युवक परिषद के संयुक्त तत्वावधान में सकलश्री संघ के सहयोग से मंगलवार को सुबह साढ़े आठ बजे रांगड़ी चौक के सुगनजी महाराज के उपासरे से मासखमण के तपस्वी कन्हैयालाल भुगड़ी व सूरत की बबीता बोथरा की शोभायात्रा निकलेगी। शोभायात्रा आदिश्वरजी, श्री चिंतामणि आदि मंदिरों के आगे से होते हुए ढढ्ढा चौक में प्रवचन स्थल पहुंचेगी, जहां दोनों तपस्वियों का अभिनंदन किया जाएगा।
श्री सुगनजी महाराज का उपासरा ट्रस्ट के मंत्री रतन लाल नाहटा, श्री जिनेश्वर युवक परिषद के अध्यक्ष संदीप मुसरफ व मंत्री मनीष नाहटा ने बताया कि आचार्यश्री की निश्रा में मास खमण की तपस्या करने सूरत से बबीता बोथरा बीकानेर आई है। आचार्यश्री के सान्निध्य में एकासना, नियमित आयम्बिल, अट्ठम तप, श्री 45 आगम तप, पंच परमेष्ठी श्रेणी तप, पांच करोड़ नवकार महामंत्र जाप सहित विभिन्न धार्मिक जप,तप, साधना व देव, गुरु व धर्म की भक्ति के अनेक कार्यक्रम में श्रावक-श्राविकाएं उत्साह से भागीदारी निभा रही है।
रेलदादाबाड़ी में पूजा व गुरु इकतीसा का सामूहिक पाठ,तपस्वियों की शोभायात्रा व तप वंदनावली कार्यक्रम आज






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