जयपुर, 9 जुलाई। पशुपालन विभाग की शासन सचिव डॉ. आरूषी मलिक ने बताया कि राज्य में 213 राजस्थान पशु चिकित्सा रिलीफ सोसायटियों के गठन के पंजीकृत प्रमाण पत्र जारी किये जा चुके हैं। डॉ. मलिक शुक्रवार को गूगल मीट के जरिये बैठक लेते हुए प्रदेश के सभी अतिरिक्त निदेशक एवं संयुक्त निदशकों को निर्देशित कर रही थीं।
शासन सचिव डॉ. मलिक ने कहा कि राज्य में 2 हजार 728 सोसायटी का गठन किया जाना है, जिसमें अब तक 2 हजार 195 के बीएनआर नम्बर जारी हो चुके हैं, जबकि सहकारिता विभाग की ओर से 213 सोसायटी के पंजीकृत प्रमाण पत्र जारी किये जा चुके हैं। उन्होंने ऑनलाइन आवेदन सबमिट होने वाली सोसायटियों के प्रमाण पत्र शीघ्र जारी करने के सम्बन्ध में सहकारिता विभाग को पत्र लिखने के निर्देश दिये। उन्होंने इस कार्य में अव्वल रहे अलवर एवं भरतपुर जिले की सराहना करते हुए कम प्रगति वाले जिलों को बुधवार तक बीआरएन नम्बर प्राप्त करने के निर्देश दिये।
डॉ. आरूषी मलिक ने बताया कि उप निदेशक से संयुक्त निदेशक के पद पर पदोन्नति के लिए विभागीय स्तर पर प्रश्नावली तैयार कर तिथि निर्धारण के लिए राजस्थान लोक सेवा आयोग अजमेर को लिखा जा चुका है। उन्होंने इस सम्बन्ध में एसीआर पूर्ण कर भिजवाने के निर्देश दिये। उन्होंने पशुगणना-2019 में हुए व्यय के सम्बन्ध में उपयोगिता प्रमाण पत्र शीघ्र भिजवाने के निर्देश दिये। उन्होंने पशुधन सहायकों एवं पशु चिकित्सा सहायकों की पदोन्नति के लिए एसीआर पूर्ण कर भिजवाने के भी निर्देश दिये, ताकि यथाशीघ्र पदोन्नति समिति की बैठक की जा सके। डॉ. मलिक ने अनुकम्पात्मक नियुक्ति के लम्बित समस्त प्रकरणों पर यथाशीघ्र कार्यवाही करने के निर्देश दिये ।
शासन सचिव ने बताया कि सात जिलों में खराब तरल नत्रजन जारों का निस्तारण किया जा चुका है जबकि 12 जिलों में निस्तारण के लिए निदेशालय स्तर से स्वीकृत जारी की जा चुकी है। उन्होंने खराब तरल नत्रजन जारों एवं खराब टैंकरों का निस्तारण 31 अगस्त तक पूर्ण करने तथा अन्य खराब पड़े सामान के निस्तारण के निर्देश दिये।
डॉ. मलिक ने कृत्रिम गर्भाधान कार्य को गति प्रदान करते हुए तय समय सीमा में इनाफ पोर्टल पर इंद्राज करने के निर्देश दिए। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय कृत्रिम गर्भाधान कार्यक्रम के तहत तीसरा चरण 1 अगस्त से शुरू होने जा रहा है। उन्होंने एनएडीसीपी योजनान्तर्गत इनाफ पोर्टल पर प्रविष्ठियों के लिए 31 अगस्त तक बढ़ायी गई समय सीमा को ध्यान में रखते हुए कार्य पूर्ण करने के निर्देश दिये।
डॉ. आरूषी मलिक ने बताया कि कोरोना संक्रमण काल के दौरान जैविक इकाई द्वारा टीकों का उत्पादन बाधित हुआ है, विभागीय स्तर पर किये गये प्रयासों से वर्तमान में टीकों के उत्पादन में गति आयी है। उन्होंने सम्भाग स्तरीय अधिकारियों को निर्देश देते हुए कहा कि अधीनस्थ जिलों में आवश्यक टीकों की उपलब्धता को सुनिश्चित कर लें तथा किसी जिले में वैक्सीन आधिक्य में उपलब्ध होने की स्थिति में अन्य जिलों में हस्तांतरित कर उपयोग में लिया जाना सुनिश्चित कराएं।बैठक में पशुपालन विभाग के निदेशक डॉ. वीरेन्द्र सिंह, अतिरिक्त निदेशक डॉ. आनन्द सेजरा सहित वरिष्ठ विभागीय अधिकारी उपस्थित थे।










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