सेना के जवान को पुलिस ने पीटा:ओरण परिक्रमा के दौरान हुआ विवाद; एसपी बोले- महिला पुलिसकर्मी से की थी धक्का-मुक्की

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सेना के जवान को पुलिस ने पीटा:ओरण परिक्रमा के दौरान हुआ विवाद; एसपी बोले- महिला पुलिसकर्मी से की थी धक्का-मुक्की

बीकानेर के देशनोक में भारतीय सेना के जवान के साथ पुलिस ने मारपीट की। सिर पर डंडों से जमकर वार किया। पुलिस ने जवान को गिरफ्तार किया है। ओरण परिक्रमा के दौरान जवान का पुलिस से विवाद हो गया था।

जिस जवान को पुलिस ने गिरफ्तार किया है, वो 25 सितंबर को अनंतनाग में शहीद हुए जवान रामस्वरूप कस्वां के बड़े भाई हैं। रामस्वरूप कस्वां को शहीद का दर्जा दिलवाने के लिए करीब 2 महीने पहले बीकानेर में हाईवे जाम किया गया था।

सेना के जवान से मारपीट मामले में राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (RLP) के संयोजक हनुमान बेनीवाल ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर सीएम भजनलाल शर्मा से पुलिस के कृत्य पर संज्ञान लेने की मांग की।

पुलिसकर्मी के साथ की मारपीट देशनोक थानाधिकारी सुमन शेखावत ने बताया- जवान श्रीराम कस्वां गुरुवार शाम को करणी माता की ओरण यात्रा कर रहा था। जेगला फांटे पर ओरण परिक्रमा की यातायात व्यवस्था की जा रही थी। इस दौरान जवान पुलिस से उलझ गया और यातायात व्यवस्था में सहयोग नहीं किया।

उन्होंने बताया- जवान अपनी गाड़ी नो एंट्री में ले जाना चाहता था, जिसे रोकने पर उसने एक पुलिसकर्मी विजयपाल के साथ मारपीट की। साथ ही महिला पुलिसकर्मी से धक्का-मुक्की की। इस दौरान उसके भी सिर में चोट लगी। जवान के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाई गई है। वहीं जवान श्रीराम कस्वां ने भी शिकायत दी है, जिसकी जांच की जा रही है।

बेनीवाल की पुलिस के कृत्य पर संज्ञान लेने की मांग मामले में राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (RLP) के संयोजक हनुमान बेनीवाल ने सोशल मीडिया पर पोस्ट में लिखा- देशनोक पुलिस ने श्रीराम के साथ मारपीट की। उसका सिर फोड़ दिया। बेनीवाल ने लिखा- मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा जी, बीकानेर जिले की पुलिस के कृत्य पर संज्ञान लीजिए।

विगत दिनों शहीद हुए बीकानेर जिले के नोखा क्षेत्र के जवान रामस्वरूप जी कस्वां के भाई और भारतीय सेना के एक जवान श्रीराम के साथ देशनोक में पुलिस ने बेवजह मारपीट की है और डंडे से सिर फोड़ दिया।

मामले में एफआईआर दर्ज करवाने के लिए सेना का जवान देशनोक थाने में बैठा है, लेकिन एफआईआर दर्ज नहीं की जा रही है। मामले में तत्काल प्रभाव से मुकदमा दर्ज करके दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्यवाही होनी चाहिए।

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