
प्रतापगढ़/ बीकानेर 16 मार्च 2026 । भाकृअनुप-राष्ट्रीय उष्ट्र अनुसंधान केन्द्र, बीकानेर द्वारा जनजातीय उप योजना के तहत प्रतापगढ़ जिले के गांव सुहागपुरा में आज दिनांक को कृषक वैज्ञानिक संवाद एवं पशु स्वास्थ्य जागरूकता शिविर कार्यक्रम आयोजित किया गया। एनआरसीसी बीकानेर द्वारा इंडियन फार्म फोरेस्ट्री डवलपमेंट को-आपरेटिव लि, प्रतापगढ़ के सहयोग से आयोजित इस कार्यक्रम में 270 से अधिक पशुपालक परिवारों ने सहभागिता निभाई।
इस दौरान वैज्ञानिकों ने पशुपालकों से विभिन्न पशुओं यथा- गाय, भैंस, ऊँट, भेड़-बकरी, मुर्गी आदि के स्वास्थ्य, उत्पादन एवं पशु पालन व्यवसाय संबंधी चुनौतियों के बारे में खुलकर चर्चा की।
इस दौरान सहभागी पशुपालकों को कृषि में विविध उपयोग हेतु इनपुट (ग्रीन नेट, पीवीसी वॉटर पाईप, वॉटर कैम्पर, टॉर्च, मूंग बीज) आदि की सुविधाएं प्रदान की गई।
संवाद कार्यक्रम के दौरान जनजातीय पशुपालकों से बातचीत करते हुए एनआरसीसी के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. रतन कुमार चौधरी ने पशुपालन की महत्ता बताते हुए कहा कि जनजातीय क्षेत्रों में यह आजीविका और आर्थिक सशक्तिकरण का महत्वपूर्ण माध्यम है, इस उपयोजना के माध्यम से केन्द्र सरकार द्वारा देश के विभिन्न राज्यों एवं केन्द्र शासित प्रदेशों में लाभ प्रदान किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि आने वाले गर्मी के मौसम में पशुओं को लू/हीट-स्ट्रोक से बचाना अत्यंत आवश्यक है। इसके लिए उन्होंने छायादार स्थान, स्वच्छ व पर्याप्त पेयजल तथा उचित देखभाल जैसे उपाय अपनाने की सलाह दी, जिससे पशुओं का स्वास्थ्य सुरक्षित रहे और उनका उत्पादन स्तर भी सर्वोत्तम बना रहे।
केन्द्र के वैज्ञानिक डॉ. श्याम सुन्दर चौधरी ने पशुपालकों को थनैला रोग की जांच तथा स्वच्छ दूध उत्पादन से संबंधित तकनीकी जानकारी संप्रेषित की। उन्होंने जनजातीय पशुपालकों को पशुओं के नियमित स्वास्थ्य परीक्षण, स्वच्छता तथा संतुलित आहार प्रबंधन अपनाने की सलाह दी, जिससे पशुओं को रोगों से सुरक्षित रखा जा सके और दूध की गुणवत्ता एवं उत्पादन में वृद्धि हो। साथ ही किसानों को कृषि एवं पशुपालन की नवीन तकनीकों तथा पशु उत्पादों के मूल्य संवर्धन के संबंध में भी जानकारी प्रदान की गई।
केन्द्र के निदेशक डॉ. अनिल कुमार पूनिया ने वैज्ञानिकों के माध्यम से बात रखते हुए कहा कि भारत सरकार का मुख्य उद्देश्य टीएसपी के माध्यम से जनजातीय समुदाय को देश के विकास की मुख्यधारा से जोड़ना है, सूचना एवं प्रौद्योगिकी के इस युग में यह अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि पशुपालकों का पशुधन सुदृढ़ होने से उनके आर्थिक स्तर एवं जीवनशैली में सकारात्मक परिवर्तन आएगा तथा योजनाबद्ध जानकारी तथा आधुनिक तकनीकों के प्रभावी प्रसार से पशुधन उत्पादन में वृद्धि संभव होगी, जिससे स्थानीय आजीविका सुदृढ़ होने के साथ-साथ देश के समग्र पशुधन विकास को भी नई दिशा मिलेगी।
श्रीमती संतोष चौधरी, वरिष्ठ अधिकारी (परियोजना), आई.एफ.एफ.डी.सी. ने जनजातीय महिलाओं को संबोधित करते हुए कहा कि नारी विकास की शुरुआत परिवार के भीतर आत्म-जागरूकता और आत्मविश्वास से होती है। उन्होंने महिलाओं को शिक्षा, स्वास्थ्य तथा स्वावलंबन के प्रति सजग रहने और उपलब्ध योजनाओं का लाभ उठाने के लिए प्रेरित किया।
केन्द्र के टीएसपी योजना के नोडल अधिकारी श्री मनजीत सिंह ने उपयोजना के महत्व पर बाते रखते हुए कहा कि इस योजना के तहत जनजातीय क्षेत्रों में किसानों और पशुपालकों को पशुपालन और उन्नत खेती की तकनीकों की जानकारी के साथ-2 कृषि एवं पशुपालन संबद्ध संसाधन (इनपुट) उपलब्ध करवाएं जाते हैं ।
गांव की प्रशासक श्रीमती श्यामा मीणा ने एनआरसीसी द्वारा जनजातीय क्षेत्र में आयोजित इस महत्वपूर्ण गतिविधि के लिए आभार जताया। इस दौरान लाभार्थियों ने केन्द्र द्वारा पूर्व में वितरित इनपुट (संसाधनों) की उपयोगिता एवं उनसे प्राप्त आर्थिक लाभ के संबंध में अपने अनुभव साझा करते हुए प्रसन्नता व्यक्त की तथा सकारात्मक फीडबैक दिया। इस महत्वपूर्ण गतिविधि में केन्द्र के सहायक प्रशासनिक अधिकारी श्री राजेश चौधरी ने पशुपालकों के पंजीयन, इनपुट वितरण आदि विभिन्न कार्यों में सक्रिय सहयोग प्रदान किया।














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