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ऑनलाइन एफआईआर से ठगी की कोशिश:मेडिकल छात्रा के पास आया सीबीआई के नाम से फोन, अकाउंट में करोड़ों का काला धन और लेनदेन बताकर डराया

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ऑनलाइन एफआईआर से ठगी की कोशिश:मेडिकल छात्रा के पास आया सीबीआई के नाम से फोन, अकाउंट में करोड़ों का काला धन और लेनदेन बताकर डराया

बीकानेर

मेडिकल कॉलेज में स्त्री रोग विशेषज्ञ द्वितीय वर्ष की डॉक्टर के पास मुंबई सीबीआई के नाम से फोन आया। उसके नाम से अलग-अलग राज्यों में बैंक खातों में करोड़ों रुपए का काला धन, मनी लान्ड्रिंग और हवाला का लेनदेन बताया गया। उसे केस दर्ज कर गिरफ्तारी का डर दिखाया और 7.30 लाख रुपए की ऑनलाइन ठगी कर ली।

उदासर में विराट नगर निवासी श्रुति बुढ़ानिया मेडिकल कॉलेज में स्त्री रोग विभाग में द्वितीय वर्ष की छात्रा है। 22 मई को उसके मोबाइल पर मुंबई सीबीआई के नाम से फर्जी कॉल आया और आधार कार्ड आईडी बताकर कहा कि फेडेक्स से पार्सल जो मुंबई कस्टम ने सीज कर लिया है।

पार्सल में तीन फर्जी पासपोर्ट, जूते और ड्रग्स है। मुंबई साइबर क्राइम यह मैटर डील करेगी। उसने कॉल कनेक्ट कर बात कराई तो छात्रा को डराया गया कि उसके नाम से पंजाब, गुजरात, हैदराबाद, राजस्थान में अलग-अलग बैंक खाते हैं जिनमें करोड़ों रुपए का काला धन, मनी लान्ड्रिंग और हवाला की बड़ी राशि का लेनदेन हुआ है।

एक टेरेरिस्ट ग्रुप की फंडिंग का भी केस दर्ज है। छात्रा को सीबीआई के लेटर हेड भेजा। उसे धमकाते हुए सीनियर अधिकारी डीसीपी राजेश प्रधान को केस हैंडओवर करने के लिए कहा। छात्रा को वीडियो कॉल की और उससे पूरी जानकारी लेकर हाउस अरेस्ट कर दिया। उससे कहा गया कि खातों की जांच होगी और रुपया आरबीआई को भेजना पड़ेगा।

छात्रा को पूरी रात जगा कर रखा और कहा कि आरबीआई के लैटर के मुताबिक 3.30 लाख रुपए फर्जी तरीके से खाते में आए हैं जिसे वेरिफाई कर रहे हैं। छात्रा को एक अकाउंट देकर 3.30 लाख रुपए आरटीजीएस करवा लिए। इसके अलावा 4 लाख रुपए की एफडी बताकर यह राशि भी एक अलग अकाउंट में ट्रांसफर करवा ली। छात्रा से 7.30 लाख रुपए ऑनलाइन हासिल करने के बाद फोन कट कर दिया गया। छात्रा ने अपने पति और दोस्त को बताया तो ठगी का पता चला। व्यास कॉलोनी पुलिस थाने में रिपोर्ट दी गई जिस पर धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज किया गया है। मामले की जांच एएसआई मांगीलाल को सौंपी गई है।

केस एक : चाय-पानी के नाम पर मांगे तीन हजार रुपए

बिग्गा बास निवासी 33 वर्षीय अहमद रजा ने 16 मई को श्रीडूंगरगढ़ थाने में मारपीट का मुकदमा दर्ज करवाया था। 18 मई को उसके पास कॉल आया कि एसपी ऑफिस से नारायण वर्मा बोल रहा हूं। आरोपियों पकड़ने जा रहे हैं। तीन हजार भेजो। पीड़ित थाने पहुंचा तो ठगी का पता चला।

ऑनलाइन एफआईआर से ठगी की कोशिश, जांच अधिकारी बन किया फोन, जांच में सहयोग के लिए मांग लिए रुपए

श्रीडूंगरगढ़ – ठगी के हर दिन नए-नए तरीके सामने आ रहे हैं। न्याय के लिए लोग एफआईआर लिखवाते हैं। अब एफआईआर का रिकॉर्ड जन सूचना पोर्टल पर अपलोड होने से देश में कहीं भी बैठा व्यक्ति, किसी भी राज्य, जिले, तहसील और कस्बे स्तर के थाने में दर्ज एफआईआर निकाल रहा है। एफआईआर में जांच अधिकारी का नाम, पीड़ितों का नाम, आरोपियों का नाम और पीड़ितों के मोबाइल नंबर तो होते ही हैं। साथ ही केस की पूरी हिस्ट्री भी होती है।

इसका फायदा अब ठग उठाने लगे हैं। कभी जांच अधिकारी बनकर तो कभी एसपी कार्यालय का अधिकारी बताकर जांच में सहयोग करने के नाम पर। हाल में ही श्रीडूंगरगढ़ थाने क्षेत्र में भी दो ऐसे मामले सामने आए हैं। पीड़ित फंसे तो मगर, उन्हें ऑनलाइन रुपए ट्रांसफर करने आते नहीं थे जिसके कारण वे बच गए।

केस दो : आरोपियों को 6 महीने के लिए भेजेंगे जेल, 3 हजार भेजो

लिखमादेसर निवासी ब्रह्मानंद पारीक पुत्र सीताराम पारीक ने 16 मई को मारपीट का मुकदमा दर्ज करवाया। 17 मई को इनके पास कॉल आया। बीकानेर एसपी कार्यालय से एसआई वर्मा बोल रहा हूं। आरोपियों को 6 महीने के लिए भेजेंगे जेल, 3 हजार भेजो। शक होने पर थाने पहुंचा तो ठगी का पता चला।

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